Bangladesh-Myanmar: म्यांमार में लड़ाई तेज होने से बांग्लादेश का सिरदर्द बढ़ा, आ सकते हैं नए शरणार्थी
Bangladesh-Myanmar: गैर सरकारी संगठन अराकान रोहिंग्या सोसायटी फॉर पीस एंड ह्यूमन राइट्स के मुताबिक ये लोग नदी पार कर बांग्लादेश पहुंच जाने के अवसर की तलाश में हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दर्जन भर रोहिंग्या शरणार्थी पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश आ चुके हैं...
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म्यांमार में सेना और विद्रोहियों के बीच लड़ाई तेज होने के साथ बांग्लादेश में ये चिंता गहरा गई है कि म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों का नए सिरे सीमा पार कर वहां आने का सिलसिला शुरू हो सकता है। बांग्लादेश पहले से ही रोहिंग्या शरणार्थियों का भारी बोझ उठाए हुए है। अब फिर तेज हुई लड़ाई के कारण इन शरणार्थियों की जल्द वापसी की संभावना भी कमजोर पड़ गई है।
ताजा खबरों के मुताबिक घर-बाड़ छोड़ कर भागे सैकड़ों भयभीत लोग नाफ नदी के पास इकट्ठे हो चुके हैं। गैर सरकारी संगठन अराकान रोहिंग्या सोसायटी फॉर पीस एंड ह्यूमन राइट्स के मुताबिक ये लोग नदी पार कर बांग्लादेश पहुंच जाने के अवसर की तलाश में हैं। इस संगठन के महासचिव मोहम्मद जुबैर ने इस महीने एक पुरुष, दो महिलाएं और दो बच्चे नदी पार कर बांग्लादेश पहुंच गए। कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दर्जन भर रोहिंग्या शरणार्थी पिछले कुछ दिनों में बांग्लादेश आ चुके हैं। बांग्लादेश में पहले से लगभग दस लाख रोहिंग्या शरणार्थी हैं।
म्यांमार में सेना और सैनिक शासन विरोधी विद्रोही गुटों के बीच लड़ाई का नया दौर अगस्त में शुरू हुआ। इस दौरान म्यांमार से दागी गई कई गोलियां और मोर्टार बांग्लादेश सीमा में आकर गिरे हैं। इससे बांग्लादेश के सीमाई इलाकों में डर का माहौल बना है। हाल में बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने म्यांमार के राजदूत को बुला कर इन घटनाओं पर विरोध जताया था।
स्थिति बिगड़ती देख बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुर्रहमान खान कमाल कह चुके हैं कि बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की मांग करेगा। उन्होंने पिछले हफ्ते एक बयान में बांग्लादेश से लगे सीमाई इलाकों में म्यांमार की सेना की गतिविधियों की कड़ी निंदा की थी। लेकिन बांग्लादेश में म्यांमार के राजदूत आंग क्याव मोये ने यहां सफाई दी है कि जो मोर्टार बांग्लादेश में आकर गिरे, उन्हें बागी गुट अराकान आर्मी ने दागे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस गुट ने सेना के मोर्टार चुरा लिए हैं।
नए शरणार्थियों के आने के बारे में अभी बांग्लादेश सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी है। कॉक्स बाजार स्थित शरणार्थी आयुक्त रिजवान हयात ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि वे आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई सूचना देने में समर्थ नहीं हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत में अस्थिर स्थिति बन गई है, इसलिए सीमा पर तैनात बांग्लादेश के बलों को चौबीसों घंटे मुस्तैद रखा जा रहा है।
बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जुलाई तक 480 रोहिंग्या लोगों ने बांग्लादेश में घुसने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सीमा पर से ही लौटा दिया गया। विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमिन ने बीते हफ्ते कहा था कि सरकार ने बांग्लादेश- म्यांमार सीमा को सील करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश अभी रोहिंग्या शरणार्थियों को स्वीकार करने की स्थिति में बिल्कुल ही नहीं है।
ढाका यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर इम्तियाज अहमद ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि म्यांमार सरकार ऐसी स्थिति बना रही है, जिससे रोहिंग्या देश छोड़ कर जाने पर मजबूर हो जाएं। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले का खुला उल्लंघन है।