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कौन हैं नाहिद इस्लाम: बांग्लादेश में क्यों लाए AAP की तर्ज पर सियासी दल, यूनुस से अलग होने की क्या वजह? जानें
Fri, 28 Feb 2025 06:26 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Fri, 28 Feb 2025 06:26 PM IST
सार
बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य कैसे तेजी से बदल रहे हैं? एक समय छात्र संगठन का नेतृत्व करने वाले नाहिद इस्लाम कौन हैं? वह बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस का साथ छोड़कर अपनी नई पार्टी क्यों बना रहे हैं? बांग्लादेश में राजनीतिक दलों का क्या इतिहास रहा है? इसके अलावा नई पार्टी का गठन किस आधार पर हो रहा है? आइये जानते हैं...
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बांग्लादेश में नई सियासी पार्टी की एंट्री।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बांग्लादेश में आज एक नए राजनीतिक दल- जातीय नागरिक पार्टी का एलान हो गया। खास बात यह है कि इस पार्टी की लॉन्चिंग कोई मंझा हुआ राजनीतिज्ञ या पार्टी से अलग हुआ नेता नहीं कर रहा। बल्कि इस दल को छात्र नेताओं के नेतृत्व में गठित किया जा रहा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के कभी करीबी रहे नाहिद इस्लाम इस पार्टी के सर्वेसर्वा के तौर पर खुद को पेश भी कर चुके हैं।
27 वर्षीय छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने 28 फरवरी को दोपहर माणिक मिया एवेन्यू से अपनी नई पार्टी लॉन्च कर दी। इस शुरुआत से पहले हुए कार्यक्रम में पवित्र ग्रंथों- कुरान, गीता, त्रिपितका और बाइबल का पाठ हुआ। इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता, जिसमें अधिकतर छात्र हैं, ने एक जबरदस्त रैली निकाली। गौरतलब है कि जातीय नागरिक पार्टी के नेताओं ने ही कहा है कि उनका दल भारत की आम आदमी पार्टी, पाकिस्तान की पीटीआई और तुर्किये में राष्ट्रपति अर्दोआन की पार्टी से प्रेरणा लेकर लॉन्च किया गया है।
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27 वर्षीय छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने 28 फरवरी को दोपहर माणिक मिया एवेन्यू से अपनी नई पार्टी लॉन्च कर दी। इस शुरुआत से पहले हुए कार्यक्रम में पवित्र ग्रंथों- कुरान, गीता, त्रिपितका और बाइबल का पाठ हुआ। इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता, जिसमें अधिकतर छात्र हैं, ने एक जबरदस्त रैली निकाली। गौरतलब है कि जातीय नागरिक पार्टी के नेताओं ने ही कहा है कि उनका दल भारत की आम आदमी पार्टी, पाकिस्तान की पीटीआई और तुर्किये में राष्ट्रपति अर्दोआन की पार्टी से प्रेरणा लेकर लॉन्च किया गया है।
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य कैसे तेजी से बदल रहे हैं? एक समय छात्र संगठन का नेतृत्व करने वाले नाहिद इस्लाम कौन हैं? वह बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस का साथ छोड़कर अपनी नई पार्टी क्यों बना रहे हैं? बांग्लादेश में राजनीतिक दलों का क्या इतिहास रहा है? इसके अलावा नई पार्टी का गठन किस आधार पर हो रहा है? आइये जानते हैं...
कौन हैं नाहिद इस्लाम?
पिछले साल जब बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ छात्र संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किया था, तब ढाका यूनिवर्सिटी के एक 26 वर्षीय छात्र का नाम जोर-शोर से चर्चा में रहा था। यह नाम था छात्रनेता नाहिद इस्लाम का, जो कि कोटा-विरोधी प्रदर्शनों का चेहरा बने थे।
1998 में ढाका में शिक्षण जगत से नाता रखने वाले परिवार में जन्मे नाहिद हसीना सरकार के कट्टर आलोचक रहे हैं। 2017 में यूनिवर्सिटी में एडमिशन के पहले साल में ही उन्होंने भारत से लगते सुंदरबन के जंगलों में एक कोयले का प्लांट लगाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। दो साल बाद नाहिद ने अपने कॉलेज के चुनावों में हिस्सा लिया और ढाका यूनिवर्सिटी में एक छात्र संगठन की भी शुरुआत की। इसका नाम डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फोर्स (एसडीएफ) रखा गया।
पिछले साल जब बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ छात्र संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किया था, तब ढाका यूनिवर्सिटी के एक 26 वर्षीय छात्र का नाम जोर-शोर से चर्चा में रहा था। यह नाम था छात्रनेता नाहिद इस्लाम का, जो कि कोटा-विरोधी प्रदर्शनों का चेहरा बने थे।
1998 में ढाका में शिक्षण जगत से नाता रखने वाले परिवार में जन्मे नाहिद हसीना सरकार के कट्टर आलोचक रहे हैं। 2017 में यूनिवर्सिटी में एडमिशन के पहले साल में ही उन्होंने भारत से लगते सुंदरबन के जंगलों में एक कोयले का प्लांट लगाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। दो साल बाद नाहिद ने अपने कॉलेज के चुनावों में हिस्सा लिया और ढाका यूनिवर्सिटी में एक छात्र संगठन की भी शुरुआत की। इसका नाम डेमोक्रेटिक स्टूडेंट फोर्स (एसडीएफ) रखा गया।
2024 आते-आते नाहिद ने अपनी पहचान पूरे बांग्लादेश में बना ली थी। हालांकि, इसी दौरान एक घटना घटी। जुलाई 2024 में उनका कथित तौर पर अपहरण हो गया। इसका आरोप लगा बांग्लादेश के खुफिया विभाग पर। नाहिद के मुताबिक, 19 जुलाई की रात को करीब सादे कपड़ों में 30 अधिकारी उनके दोस्त के घर पहुंचे। नाहिद इस दौरान आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के लिए वांछित थे और इसी दोस्त के घर छिपे थे। छात्र नेता का दावा था कि इन अधिकारियों ने उनके मुंह पर काला कपड़ा डाला और कहा कि दुनिया तुम्हें अब कभी नहीं देख पाएगी।
नाहिद ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में तब दावा किया था कि उन्हें एक गुप्त जेल में रखा गया। यहां उन्हें लोहे की रॉड जैसी चीज से मारा गया। हालांकि, एक दिन बाद ही उन्हें एक पुल के पास फेंक दिया गया। नाहिद इस्लाम का कहना कि जब वे धनमोंडी में गणोशास्थ्य अस्पताल में इलाज करा रहे थे, उसी दौरान 26 जुलाई को उन्हें फिर से किडनैप कर लिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस बार भी अपहरणकर्ताओं ने खुद की पहचान ढाका मेट्रो जासूसी विभाग के खुफिया अधिकारियों की बताई।
नाहिद ने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में तब दावा किया था कि उन्हें एक गुप्त जेल में रखा गया। यहां उन्हें लोहे की रॉड जैसी चीज से मारा गया। हालांकि, एक दिन बाद ही उन्हें एक पुल के पास फेंक दिया गया। नाहिद इस्लाम का कहना कि जब वे धनमोंडी में गणोशास्थ्य अस्पताल में इलाज करा रहे थे, उसी दौरान 26 जुलाई को उन्हें फिर से किडनैप कर लिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस बार भी अपहरणकर्ताओं ने खुद की पहचान ढाका मेट्रो जासूसी विभाग के खुफिया अधिकारियों की बताई।
टाइम मैगजीन की टाइम100 नेक्स्ट लिस्ट का बने हिस्सा
शेख हसीना के देश छोड़ने और बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद इसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने नाहिद को सरकार में सूचना सलाहकार बनाया।
प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें टाइम100 नेक्स्ट लिस्ट में शामिल किया। उनका इंटरव्यू मैगजीन में प्रकाशित हुआ।
शेख हसीना के देश छोड़ने और बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद इसके प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने नाहिद को सरकार में सूचना सलाहकार बनाया।
प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने उन्हें टाइम100 नेक्स्ट लिस्ट में शामिल किया। उनका इंटरव्यू मैगजीन में प्रकाशित हुआ।
मोहम्मद यूनुस कैबिनेट से क्यों हुआ नाहिद का इस्तीफा?
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में नाहिद इस्लाम की नियुक्ति अक्तूबर में हुई थी। वह करीब छह महीने तक सूचना सलाहकार के तौर पर रहे। हालांकि, 25 फरवरी को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की वजह बताते हुए नाहिद ने कहा, "देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एक नई राजनीतिक ताकत का उभार जरूरी है। मैंने एक बार फिर सड़कों पर सामूहिक विद्रोह छेड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अंतरिम सरकार में रहते हुए मैंने दो मंत्रालय और एक अन्य जिम्मेदारी संभाली। छह महीने का समय काफी छोटा होता है और लोग मेरे काम को तौलेंगे। आज से मैं सरकार में किसी पद पर नहीं हूं।"
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में नाहिद इस्लाम की नियुक्ति अक्तूबर में हुई थी। वह करीब छह महीने तक सूचना सलाहकार के तौर पर रहे। हालांकि, 25 फरवरी को उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की वजह बताते हुए नाहिद ने कहा, "देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए एक नई राजनीतिक ताकत का उभार जरूरी है। मैंने एक बार फिर सड़कों पर सामूहिक विद्रोह छेड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अंतरिम सरकार में रहते हुए मैंने दो मंत्रालय और एक अन्य जिम्मेदारी संभाली। छह महीने का समय काफी छोटा होता है और लोग मेरे काम को तौलेंगे। आज से मैं सरकार में किसी पद पर नहीं हूं।"
इस्लाम ने कहा कि मैं जो पद छोड़ रहा हूं, उस पर अब कौन आएगा, इसका फैसला सलाहकार परिषद करेगा। लेकिन छात्र इस सरकार की योजनाओं को लागू कराने में भूमिका निभाते रहेंगे, ताकि न्याय और सुधार के वादों को निभाया जा सके। उन्होंने कहा कि नौकरशाही की जटिलताओं की वजह से अभी भी कई सुधार बाकी हैं और हमें विश्वास है कि सरकार पिछले प्रदर्शनों में की गई मांगों को पूरा करेगी।
नाहिद की पार्टी का स्वरूप क्या होगा?
नाहिद ने अंतरिम सरकार से इस्तीफा देने के ठीक बाद साफ कर दिया था कि वह नया राजनीतिक दल बनाने जा रहे हैं। उनकी यह पार्टी मुख्यतः दो छात्र संगठनों- स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) और जातीय नागरिक समिति (जेएएनएसी) के विलय से होगा।
नाहिद की पार्टी के इन चुनाव चिह्नों पर हुई चर्चा
नाहिद ने अंतरिम सरकार से इस्तीफा देने के ठीक बाद साफ कर दिया था कि वह नया राजनीतिक दल बनाने जा रहे हैं। उनकी यह पार्टी मुख्यतः दो छात्र संगठनों- स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) और जातीय नागरिक समिति (जेएएनएसी) के विलय से होगा।
नाहिद की पार्टी के इन चुनाव चिह्नों पर हुई चर्चा
- बंद हाथ
- हाथी
- रॉयल बंगाल टाइगर
- हिल्सा मछली
आम आदमी पार्टी से प्रेरणा की बात क्यों?
नाहिद इस्लाम जिन दो छात्र इकाईयों के विलय से अपनी नई पार्टी बनाने जा रहे हैं, उनमें से एक जातीय नागरिक समिति की प्रवक्ता सामंथा शर्मिन ने एक मीडिया समूह को बताया कि उनका राजनीतिक दल- अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप), इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और तुर्किये में राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन के नेतृत्व वाली एके पार्टी से प्रेरित होगी। यह एक मध्यमार्गीय विचारधारा वाली पार्टी होगी।
नाहिद इस्लाम जिन दो छात्र इकाईयों के विलय से अपनी नई पार्टी बनाने जा रहे हैं, उनमें से एक जातीय नागरिक समिति की प्रवक्ता सामंथा शर्मिन ने एक मीडिया समूह को बताया कि उनका राजनीतिक दल- अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप), इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) और तुर्किये में राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन के नेतृत्व वाली एके पार्टी से प्रेरित होगी। यह एक मध्यमार्गीय विचारधारा वाली पार्टी होगी।
बांग्लादेश में नए राजनीतिक दल की कितनी जगह?
बांग्लादेश में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 50 से ज्यादा राजनीतिक दल हैं। हालांकि, 1971 में आजादी के बाद से अगर देश के इतिहास को उठाकर देखा जाए तो यहां मुख्यतः दो ही पार्टियों ने बीते 50 साल में शासन किया है। यह हैं- आवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)।
बांग्लादेश में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 50 से ज्यादा राजनीतिक दल हैं। हालांकि, 1971 में आजादी के बाद से अगर देश के इतिहास को उठाकर देखा जाए तो यहां मुख्यतः दो ही पार्टियों ने बीते 50 साल में शासन किया है। यह हैं- आवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)।
बीते 50 साल में बांग्लादेश में करीब 25 साल आवामी लीग की सरकार रही है। वहीं, 15 साल से ज्यादा समय के लिए बांग्लादेश नेशनिस्ट पार्टी (बीएनपी) का शासन रहा है। यानी 50 में से 40 वर्ष तक इन्हीं दोनों पार्टियों ने राज किया है। वहीं, सैन्य शासन के दौरान ही जिस इकलौते राजनीतिक दल ने थोड़ी पहचान स्थापित की, वह थी जातीय पार्टी (जेपी)। यानी बांग्लादेश ने इतिहास में इन दो मुख्यधाराओं की पार्टी के अलावा किसी और नए दल का शासन नहीं देखा।