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Bangladesh: बांग्लादेशी संविधान में अंतरिम सरकार की व्यवस्था नहीं, फिर भी आज शपथ; संवैधानिक संकट में अब क्या?

Thu, 08 Aug 2024 10:17 AM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 08 Aug 2024 10:17 AM IST
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सार
Bangladesh Interim Government Challenges: बांग्लादेश में शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे कैबिनेट भंग हो गई। वहीं राजनीतिक दलों की मांग के चलते राष्ट्रपति ने संसद को भी भंग कर दिया। फिलहाल, देश पर शासन करने के लिए आवश्यक संवैधानिक ढांचा मौजूद नहीं है। 
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Bangladesh Crisis Swearing in of Interim Government Phase Constitutional Challenges Muhammad Yunus
बांग्लादेश अंतरिम सरकार - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्ते से जारी आरक्षण आंदोलन के चलते शेख हसीना को प्रधानमंत्री का पद छोड़ना पड़ा। हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सोमवार को शेख हसीना ने अपने इस्तीफे की घोषणा की। यह एलान सेना प्रमुख वकर-उज-जमान ने टेलीविजन पर किया। इस्तीफे के साथ ही शेख हसीना ने देश छोड़ दिया। पूर्व प्रधानमंत्री फिलहाल भारत में रुकी हुई हैं। सेना प्रमुख ने शेख हसीना के इस्तीफे की जानकारी देते हुए घोषणा की थी कि अंतरिम सरकार बनाई जाएगी। आंदोलन चलाने वाले छात्र नेताओं की मांग के अनुसार मंगलवार को नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को अस्थायी सरकार की कमान सौंपी गई है। 



राजनीतिक अस्थिरता के बीच, अंतरिम सरकार के कार्यवाहक के तौर पर नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस आज शपथ ग्रहण करेंगे। बांग्लादेश सेना के प्रमुख वकर-उज-जमान ने मुहम्मद यूनुस के शपथ ग्रहण की जानकारी दी है। यह कोई पूर्णकालिक सरकार नहीं है, बल्कि अस्थायी तौर पर काम करेगी। हालांकि, इस अंतरिम सरकार को लेकर अभी कई संवैधानिक सवाल भी खड़े होने लगे हैं। पहले ऐसी सरकार चलाने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ गया था। 


आइये जानते हैं कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार को लेकर अभी क्या हुआ है? सरकार की संवैधानिकता को लेकर क्या सवाल हैं? बांग्लादेश में पहले कब अंतरिम सरकार चली और तब क्या हुआ था? 

बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन
बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन - फोटो : AMAR UJALA

पहले जानते हैं बांग्लादेश में अंतरिम सरकार की जरूरत क्यों पड़ी? 
आरक्षण के मुद्दे पर जारी छात्र आंदोलन के बीच 5 अगस्त को प्रधानमंत्री शेख हसीना ने राष्ट्रपति को इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया। इस बीच, सेनाध्यक्ष जनरल वकार-उज-जमान ने देश को चलाने के लिए अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा की।

बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 57 में कहा गया है कि यदि प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया है तो कैबिनेट के दूसरे मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उप-मंत्रियों का भी इस्तीफा माना जाता है। इसका मतलब है कि कैबिनेट भंग हो चुकी। 

राजनीतिक दलों की मांग के चलते राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मंगलवार को संसद को भंग कर दिया। इससे देश में अंतरिम सरकार के गठन का रास्ता खुल गया। उधर मंगलवार को छात्र नेताओं ने सेना प्रमुख जमान से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान छात्र नेताओं ने नई सरकार के प्रारूप पर चर्चा की। तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद यह घोषणा की गई कि अंतरिम सरकार के मुखिया यूनुस होंगे। आंदोलन के समन्वयकों ने बताया कि राजनीतिक दलों से बातचीत के बाद अन्य सदस्यों के नाम भी तय किए जाएंगे।

इस बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रपति के प्रेस सचिव जोयनल आबेदीन ने कहा कि जब अन्य सदस्यों का मुद्दा सुलझ जाएगा तो अंतरिम सरकार का गठन कर दिया जाएगा।

 

सरकार की संवैधानिकता को लेकर क्या सवाल हैं?  
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ढाका ट्रिब्यून में छपे एक लेख में कहा गया है कि फिलहाल, देश पर शासन करने के लिए आवश्यक संवैधानिक ढांचा मौजूद नहीं है। वहीं मौजूदा संविधान में अंतरिम सरकार का प्रावधान नहीं है। इसमें केवल निर्वाचित सरकारों का ही जिक्र है। निर्वाचित सरकार के विकल्प के तौर पर कार्यवाहक सरकार का प्रावधान था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित कर दिया। बाद में संविधान में 15वें संशोधन के जरिए कार्यवाहक सरकार के प्रावधान को खत्म कर दिया गया। शेख हसीना की अवामी लीग के 2009-14 के कार्यकाल के दौरान इस व्यवस्था को खत्म किया गया था। इस परिस्थिति में विशेषज्ञों ने यह प्रश्न उठाया है कि अंतरिम सरकार का गठन कैसे होगा। 

विशेषज्ञों ने न्यायमूर्ति शहाबुद्दीन अहमद के अस्थायी सरकार के नेतृत्व से जुड़े फैसले का हवाला दिया है। जानकारों का तर्क दिया है कि देश में संकट के समय ऐसा प्रावधान बनाया जा सकता है, लेकिन भविष्य में इसके लिए संवैधानिक मान्यता की आवश्यकता होगी।

बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन
बांग्लादेश में आरक्षण आंदोलन - फोटो : AMAR UJALA

अस्थायी सरकार के बारे में संविधान क्या कहता है?
मौजूदा संविधान में अंतरिम सरकार के लिए कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, पहले एक ऐसा ही प्रावधान था जिसे कार्यवाहक सरकार के नाम से जाना जाता था। बांग्लादेश के संविधान में 13वां संशोधन 1996 में पारित किया गया था, जिसमें आम चुनाव कराने और सत्ता हस्तांतरण के लिए कार्यवाहक सरकार के प्रावधान शामिल थे। इस संशोधन के जरिए संविधान के भाग IV में 'गैर-पार्टी कार्यवाहक सरकार' से जुड़ा एक नया अध्याय, अध्याय IIA जोड़ा गया। इसमें पांच नए अनुच्छेद शामिल किए गए, जिनमें कार्यवाहक सरकार के मुख्य सलाहकार और अन्य सलाहकारों की नियुक्ति और कार्यकाल का जिक्र किया गया। 

इस व्यवस्था का इस्तेमाल तीन चुनाव कराने के लिए किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कार्यवाहक सरकार वाली व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित कर दिया। इसके बाद, शेख हसीना की अवामी लीग सरकार ने 30 जून, 2011 को एक संवैधानिक संशोधन के जरिए इसे खत्म कर दिया।

फैसले में यह कहा गया था कि न्यायपालिका को शामिल किए बिना अगले दो कार्यकालों के लिए इस व्यवस्था के जरिए चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, इस सलाह को न मानते हुए डेढ़ महीने बाद ही 30 जून, 2011 को अवामी लीग सरकार ने संवैधानिक संशोधन के जरिए कार्यवाहक सरकार प्रणाली को पूरी तरह से खत्म कर दिया। 

बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले और बाद में आरक्षण
बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले और बाद में आरक्षण - फोटो : AMAR UJALA

एक सरकार के बाद दूसरी सरकार को सत्ता सौंपने का क्या विकल्प होता है?
बांग्लादेश के मौजूदा संविधान के अनुसार, मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने के बाद उसके तहत ही आम चुनाव होते हैं। यह सरकार फिर जीतने वाले राजनीतिक दल या गठबंधन को सत्ता सौंप देती है।

हालांकि, बिना चुनाव के अवामी लीग सरकार के अचानक गिरने से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जहां अंतरिम सरकार बनाने की मांग हो रही है। चूंकि संविधान में इसका कोई जिक्र ही नहीं है, इसलिए बांग्लादेश में इस वक्त संवैधानिक संकट की स्थिति है।

बांग्लादेश में अस्थायी सरकार कभी चली है और आगे क्या?
संविधान के जानकार प्रोफेसर डॉ. आसिफ नजरुल ने ढाका ट्रिब्यून को अस्थायी सरकार से जुड़े तमाम पहलू बताए। डॉ. आसिफ ने बताया कि विशेष समय में देश और लोगों के हित में कदम उठाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए ऐसा प्रावधान बनाया जा सकता है, लेकिन भविष्य में इसके लिए संवैधानिक वैधता की जरूरत होगी। उन्होंने 1991 में न्यायमूर्ति शहाबुद्दीन अहमद के अस्थायी सरकार का प्रमुख बनने का उदाहरण भी दिया।

बता दें कि 6 दिसंबर 1990 को एक विद्रोह के कारण सैन्य तानाशाह हुसैन मुहम्मद इरशाद की सरकार गई थी। इसके बाद तीन महीने के भीतर देश के पांचवें आम चुनाव कराने के लिए एक अंतरिम या अस्थायी सरकार बनाई गई थी। उस समय तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश शहाबुद्दीन अहमद के नेतृत्व में एक अस्थायी सरकार का गठन किया गया था। यह फैसला अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी) सहित सभी दलों के बीच आम सहमति के आधार पर हुआ था। 

जस्टिस शहाबुद्दीन को पहले उपराष्ट्रपति बनाया गया और फिर उन्होंने अस्थायी राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी दी गई। इसे 11वें संशोधन के जरिए संवैधानिक वैधता दी गई। 1991 में चुनाव के बाद गठित नई संसद में इससे जुड़ा कानून पारित किया गया था।

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