फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Ban: Eastern Europe became dangerous for homosexuals, now in Hungary PM Orban took these strict steps

पाबंदी: समलैंगिकों के लिए खतरनाक बना पूर्वी यूरोप, अब हंगरी में पीएम ऑर्बान ने उठाए ये सख्त कदम

Fri, 02 Jul 2021 03:47 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाल, बुडापेस्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाल, बुडापेस्ट Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Fri, 02 Jul 2021 03:47 PM IST
सार

पोलैंड के बाद हंगरी दूसरा ऐसा देश बन गया है, जहां एलजीबीटीक्यू के अधिकारों में कटौती की गई है। इन देशों में पहले उदार नियमों की वजह से समलैंगिकों को कोई समस्या नहीं थी। हंगरी तो इनके लिए सबसे सुरक्षित था। 
 

विज्ञापन
Ban: Eastern Europe became dangerous for homosexuals, now in Hungary PM Orban took these strict steps
सांकेतिक चित्र - फोटो : amar ujala

विस्तार

एक समय था, जब हंगरी को एलजीबीटीक्यू (समलैंगिक-बाइसेक्सुअल-ट्रांसजेंडर-क्वीअर) लोगों के लिए यूरोप में सबसे सुरक्षित जगहों में गिना जाता था। लेकिन मौजूदा प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान देश को अब दूसरी दिशा में ले गए हैं। उनकी कट्टरपंथी राष्ट्रवादी सरकार ने पिछले महीने एक कानून बनाया, जिससे समलैंगिकता और लिंग परिवर्तन से संबंधित सामग्रियों के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। साथ ही स्कूलों में समलैंगिकता संबंधी किसी तरह की चर्चा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

विज्ञापन


पर्यवेक्षकों के मुताबिक ऑर्बान इस मामले में पोलैंड की सरकार का अनुपालन कर रहे हैं। पोलैंड में भी हाल के वर्षों में एलजीबीटीक्यू समुदायों के अधिकारों में भारी कटौती की गई है। साथ ही वहां राजनीतिक प्रचार के जरिए समलैंगिक लोगों को लेकर एक तरह का भय भी फैलाया गया है। 
विज्ञापन


विशेषज्ञों और मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि विक्टर ऑर्बान ने हालिया कानून के जरिए सियासी दांव खेला है। एक तरफ नए कानून से उन्होंने कंजरवेटिव मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है, दूसरी तरफ उन्होंने अपने विरोधियों में विभाजन पैदा करने का प्रयास किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हंगरी में एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों की समर्थक संस्था हैटेर के संचार अधिकारी लुका दुडिट्स के मुताबिक ऑर्बान सरकार समाज में एक समुदाय को दूसरे से लड़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- 'सबसे पहले उसने रोमा समुदाय के लोगों को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की। उन्हें जनता के दुश्मन के रूप में पेश किया। इस समुदाय के लोग शरणार्थी के रूप में 2014 में हंगरी आए थे। उसके बाद ऑर्बान सरकार ने यूरोपियन यूनियन के खिलाफ मुहिम छेड़ी। अब वह एक के बाद दूसरे कमजोर, हाशिये पर के सामाजिक समूहों को निशाना बना रही है।’
 

यूरोपियन यूनियन ने किया हंगरी के नए कानून का कड़ा विरोध

आरोप है कि हंगरी सरकार एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को बच्चों के यौन शोषक और असामान्य नागरिकों के रूप में पेश कर रही है। ऑर्बान की फिडेस्ज पार्टी ने एलजीबीटीक्यू समुदाय के खिलाफ लाए गए बिल को बाल यौन शोषण निरोधक बिल के रूप में पेश किया। उससे विपक्षी दलों के लिए उसका विरोध करना मुश्किल हो गया। फिडेस्ज पार्टी ने एलजीबीटीक्यू और बाल यौन शोषकों को एक जैसा ही दिखाने की कोशिश की है।

हंगरी के नए कानून का यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने कड़ा विरोध किया था। कई देशों के नेताओं ने कहा कि ऐसे कानूनों के साथ हंगरी ईयू का सदस्य बना नहीं रह सकता, लेकिन मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि हंगरी ऐसा कदम उठाने वाला अकेला देश नहीं है। बल्कि एलजीबीटीक्यू अधिकारों को संकुचित करने की कोशिश दुनिया के कई हिस्सों में हो रही है। 

पहले जहां मान्यता थी, वहां अब अधिकारों को चुनौती दी जा रही
इंटरनेशनल लेस्बियन, गे, बाइ सेक्सुअल, ट्रांस एंड इंटरसेक्स एसोसिएशन की यूरोप शाखा की कार्यकारी निदेशक एवलिन पैराडिस ने कहा है- ‘बहुत से देशों में इस समय प्रतिगामी कदम उठाए जा रहे हैं। जिन अधिकारों को पहले मान्यता मिल गई थी, उन्हें अब चुनौती दी जा रही है।’

दूसरे विशेषज्ञों का भी कहना है कि एलजीबीटीक्यू अधिकारों पर हमला सिर्फ यूरोप की परिघटना नहीं है। बेल्जियम में यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प में यूरोपीय उसूल विभाग की अध्यक्ष हेलीन टौके के मुताबिक उग्र राष्ट्रवादी और धुर दक्षिणपंथी आंदोलन अक्सर एलजीबीटीक्यू विरोधी भावनाएं फैलाते हैं। अपनी पहचान स्थापित करने और अपने लोगों की श्रेष्ठता जताने के लिए वे ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जिन्हें वे खुद से नीचा बता सकें। शरणार्थियों, एलजीबीटी लोगों और ट्रांस महिलाओं ऐसे समुदाय के रूप में चुना जाता है।

दक्षिणपंथी ताकतों ने माहौल बदल दिया

विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वी यूरोप में जब कम्युनिस्ट शासन था, तब वहां एलजीबीटीक्यू लोगों को काफी अधिकार मिले हुए थे। लेकिन अब दक्षिणपंथी ताकतों ने माहौल बदल दिया है। हाल में अमेरिकी संस्था पिउ रिसर्च सेंटर के एक सर्वे से सामने आया कि जहां पश्चिमी यूरोप में समलैंगिक विवाहों के लिए भारी जन समर्थन है, वहीं पूर्व यूरोप में जनमत इसके खिलाफ है। पूर्वी यूरोप में सिर्फ चेक रिपब्लिक ऐसा देश है, जहां अभी भी ज्यादातर लोग समलैंगिक विवाह के अधिकार का समर्थन करते हैँ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed