फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   b cells muscle endurance study glutamate energy immune system exercise performance research

अध्ययन में खुलासा: बी-सेल्स की कमी से घटती है सहनशक्ति, मांसपेशियों पर भी पड़ता है असर

Sun, 26 Apr 2026 04:56 AM IST
अमन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग
अमर उजाला नेटवर्क, बीजिंग Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 26 Apr 2026 04:56 AM IST
सार

वैज्ञानिकों ने खोजा है कि बी-सेल्स केवल बीमारियों से ही नहीं लड़तीं, बल्कि मांसपेशियों की ताकत भी बढ़ाती हैं। ये कोशिकाएं शरीर में ग्लूटामेट के स्तर को नियंत्रित करती हैं, जिससे व्यायाम के दौरान थकान कम होती है। बी-सेल्स की कमी होने पर शारीरिक सहनशक्ति घट जाती है और मांसपेशियां जल्दी थकने लगती हैं।

विज्ञापन
b cells muscle endurance study glutamate energy immune system exercise performance research
बी-सेल्स (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

अब तक बी-सेल्स को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के सुरक्षा प्रहरी के रूप में देखा जाता था, जो बाहरी रोगजनकों की पहचान कर एंटीबॉडी बनाकर उनसे लड़ने में मदद करती हैं। लेकिन वैज्ञानिक जर्नल सेल में प्रकाशित अध्ययन ने बी-सेल्स की एक अलग और महत्वपूर्ण भूमिका सामने रखी है। चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि ये इम्यून कोशिकाएं व्यायाम के दौरान मांसपेशियों की सहनशक्ति और प्रदर्शन को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
विज्ञापन


शोध में क्या?
शोध के अनुसार बी-सेल्स एक विशेष प्रोटीन के जरिए ग्लूटामेट नामक अमीनो अम्ल के स्तर को नियंत्रित करती हैं, जो मांसपेशियों की ऊर्जा प्रणाली और मांसपेशियों के बेहतर कामकाज के लिए जरूरी है। अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता और सिंघुआ यूनिवर्सिटी के इम्यूनोलॉजिस्ट पेंग जियांग ने कहा कि यह पहली बार है जब बी-सेल्स की ऐसी भूमिका सामने आई है जो सीधे इम्यून सिस्टम से जुड़ी नहीं है। उन्होंने इसे हमारी शुरुआती अपेक्षाओं से पूरी तरह परे बताया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Mali: माली में इस्लामी उग्रवादियों ने फैलाया आतंक, कई जगहों पर हमलों को दिया अंजाम; भारत ने जारी की एडवाइजरी
विज्ञापन
विज्ञापन


शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या इम्यून सिस्टम और व्यायाम क्षमता के बीच कोई सीधा संबंध है। इसके लिए उन्होंने ऐसे चूहों का अध्ययन किया, जिनमें आनुवंशिक रूप से बी-सेल्स की संख्या कम कर दी गई थी। इन चूहों को ट्रेडमिल पर दौड़ाया गया। लगभग 15 मिनट की अवधि में मशीन की गति तय अंतराल पर बढ़ाई गई और परीक्षण तब रोका गया, जब चूहा पूरी तरह थक गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने दूसरे समूह पर भी यही प्रयोग किया। इस समूह को एंटीबॉडी थेरेपी दी गई, जिसका उपयोग इंसानों में कैंसर पैदा करने वाली बी-सेल्स को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।


यह थेरेपी शरीर में मौजूद बी-सेल्स को नष्ट कर देती है। दोनों समूहों की तुलना सामान्य बी-सेल्स वाले नियंत्रण समूह से की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन चूहों में बी-सेल्स कम थीं, चाहे वह आनुवंशिक बदलाव के कारण हो या एंटीबॉडी थेरेपी की वजह से,उनकी सहनशक्ति और मांसपेशियों की ताकत सामान्य चूहों की तुलना में कम थी। इससे संकेत मिला कि बी-सेल्स केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता ही नहीं, बल्कि शारीरिक प्रदर्शन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ग्लूटामेट ऊर्जा उत्पादन में निभाता है अहम भूमिका
वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन चूहों में बी-सेल्स की कमी थी, उनके व्यायाम के बाद मांसपेशियों में ग्लूटामेट का स्तर भी कम था। ग्लूटामेट एक अमीनो अम्ल है, जो कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है। जब इसका स्तर अधिक होता है, तो मांसपेशियां अधिक प्रभावी होती हैं और थकान देर से महसूस होती है। शोध के अनुसार बी-सेल्स टीजीएफ-बीटा-1 नामक एक सिग्नलिंग प्रोटीन बनाती हैं। यह प्रोटीन लीवर में ग्लूटामेट के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। यदि यह प्रक्रिया बाधित हो जाए तो मांसपेशियों और रक्त में ग्लूटामेट की उपलब्धता घट जाती है, जिससे व्यायाम क्षमता कम हो सकती है।

अन्य वीडियो-
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed