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ऑस्ट्रेलिया ने बनाई दुनिया की पहली बायोनिक आंख, अब दृष्टिहीनता से मिलेगा छुटकारा
Sat, 19 Sep 2020 03:53 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मेलबर्न
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sat, 19 Sep 2020 03:53 PM IST
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लोगों की मिलेगा दृष्टिहीनता से छूटकारा
- फोटो : Social Media
अब जल्द ही लोगों की दृष्टिहीनता से छुटकारा मिल सकेगा। ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बायोनिक आंख का आविष्कार किया है, ये आंख काफी गहन शोध के बाद विकसित की गई है। इस बायोनिक आंख का परीक्षण हो चुका है, अब इसे मनुष्य के दिमाग में लगाने की तैयारी चल रही है।
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शोधकर्ताओं ने यह दावा किया है कि ये दुनिया की पहली बायोनिक आंख है। यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर लाओरी ने बताया कि शोधकर्ताओं ने एक वायरलेस ट्रांसमीटर चिप तैयार की है, जो मस्तिष्क की सतह पर फिट की जाएगी।
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वैज्ञानिकों ने इस आविष्कार को बायोनिक आंख का नाम दिया है और इस आंख में कैमरे के साथ हेडगियर भी फिट किया गया है। ये आस-पास होने वाली गतिविधियों पर नजर रखकर सीधा दिमाग से संपर्क करेगा। इस डिवाइस का आकार नौ गुणा नौ मिमी है। बायोनिक आंख को बनाने में दस साल से ज्यादा का समय लगा है।
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प्रोफेसर लाओरी का मानना है कि इस बायोनिक आंख की मदद से मनुष्य की दृष्टिहीनता को कम करने में मदद मिलेगी। ये आंख जन्म से नेत्रहीन व्यक्ति को भी लगाई जा सकती है। शोधकर्ताओं ने इस डिवाइस को बेचने के लिए फंड की मांग की है। हालांकि पिछले साल शोधकर्ताओं को 7.35 करोड़ रुपये का फंड दिया गया था।
मोनाश बायोमेडिसिन डिस्कवरी इंस्टीट्यूट के डॉक्टर यांग वोंग ने बताया कि शोध के दौरान दस डिवाइस का परीक्षण भेड़ों पर किया गया था। इनमें से सात डिवाइसों ने भेड़ो को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था और नौ महीने तक वो भेड़ों की आंखों में सक्रिय रही थीं।