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Discovery: Discovery: सौरमंडल के बाहरी ग्रह के वातावरण में सबसे भारी तत्व की खोज, खगोलविदों को भी हुआ आश्चर्य
Sun, 16 Oct 2022 03:36 AM IST
देव कश्यप
एएनआई, वाशिंगटन।
एएनआई, वाशिंगटन।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 16 Oct 2022 03:36 AM IST
सार
इस खोज को लेकर आज खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व करने वाले पीएचडी छात्र टॉमस अजेवेदो सिल्वा (Tomas Azevedo Silva) का कहना है कि यह हैरान करने वाला और सामान्य अपेक्षा के विपरीत है कि इन ग्रहों के वायुमंडल की ऊपरी परतों में इतना भारी तत्व क्यों है
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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विस्तार
खगोलविदों ने एक एक्सोप्लैनेट (सौर मंडल के बाहर एक ग्रह) वातावरण में पाए जाने वाले अब तक के सबसे भारी तत्व बेरियम की खोज की है। खगोलविद अत्यधिक गर्म गैस से भरे विशाल डब्ल्यूएएसपी-76 बी (WASP-76 b) और डब्ल्यूएएसपी-121 बी (WASP-121 b) नाम के दो सौर मंडल के बाहर के ग्रह, जो हमारे सौर मंडल के बाहर सितारों की परिक्रमा करते हैं, के वातावरण में उच्च ऊंचाई पर बेरियम की खोज करके आश्चर्यचकित थे। यह अप्रत्याशित खोज सवाल उठाती है कि यह अनोखा वातावरण कैसा हो सकता है।
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इस खोज को लेकर आज खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी में प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व करने वाले पोर्टो विश्वविद्यालय और पुर्तगाल में इंस्टिट्यूट डी एस्ट्रोफिसिका ई सिएनसियास एस्पाको (आईए) के पीएचडी छात्र टॉमस अजेवेदो सिल्वा (Tomas Azevedo Silva) का कहना है कि "यह हैरान करने वाला और सामान्य अपेक्षा के विपरीत है कि इन ग्रहों के वायुमंडल की ऊपरी परतों में इतना भारी तत्व क्यों है?"
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डब्ल्यूएएसपी-76 बी और डब्ल्यूएएसपी-121 बी कोई साधारण एक्सोप्लैनेट नहीं हैं। दोनों को अत्यधिक गर्म बृहस्पति ग्रह के रूप में जाना जाता है क्योंकि वे आकार में बृहस्पति ग्रह के बराबर हैं, जिसकी सतह का अत्यधिक उच्च तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होता है। यह उनके मेजबान सितारों से उनकी निकटता के कारण है, जिसका अर्थ यह भी है कि प्रत्येक तारे के चारों ओर एक कक्षा में परिक्रमा करने में केवल एक से दो दिन लगते हैं। यह इन ग्रहों को आकर्षक विशेषताएं देता है; उदाहरण के लिए डब्ल्यूएएसपी-76 बी को लेकर खगोलविदों को संदेह है कि यह लोहे की बारिश करता है।
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लेकिन फिर भी वैज्ञानिकों को डब्ल्यूएएसपी-76 बी और डब्ल्यूएएसपी-121 बी के ऊपरी वायुमंडल में बेरियम को देखकर आश्चर्य हुआ। बेरियम लोहे से 2.5 गुना भारी होता है। पोर्टो विश्वविद्यालय और आईए के एक शोधकर्ता, सह-लेखक ओलिवियर डेमेन्जियन बताते हैं कि "ग्रहों के उच्च गुरुत्वाकर्षण को देखते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि बेरियम जैसे भारी तत्व जल्दी से वायुमंडल की निचली परतों में गिर जाएंगे।
अजेवेदो सिल्वा कहते हैं कि "यह एक तरह से एक 'आकस्मिक' खोज थी। हम विशेष रूप से बेरियम की उम्मीद या तलाश नहीं कर रहे थे और अभी हमें क्रॉस-चेक करना है कि यह वास्तव में ग्रह से आ रहा था क्योंकि इसे पहले कभी किसी एक्सोप्लैनेट में यह तत्व नहीं देखा गया है।" तथ्य यह है कि अत्यधिक गर्म बृहस्पति ग्रह के जैसे दिखने वाले इन दोनों ग्रहों के वायुमंडल में बेरियम का पता चला है, जो यह बताता है कि ग्रहों की यह श्रेणी पहले की तुलना में भी अजनबी हो सकती है। हालांकि हम कभी-कभी अपने आसमान में बेरियम को आतिशबाजी में शानदार हरे रंग के रूप में देखते हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों के सामने सवाल यह है कि इन एक्सोप्लैनेट में इतनी ऊंचाई पर यह भारी तत्व किस प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण बन सकता है? डेमेन्जियन बताते हैं कि फिलहाल, हमें इस बारे में निश्चित रूप से कुछ पता नहीं है कि यह क्या मैकेनिज्म है।
एक्सोप्लैनेट वायुमंडल के अध्ययन में अत्यधिक गर्म बृहस्पति ग्रह अत्यंत उपयोगी है। जैसा कि डेमेन्जियन बताते हैं कि गैस से भरे होने और गर्म होने के कारण, उनके वायुमंडल बहुत विस्तारित होते हैं और इसलिए छोटे या ठंडे ग्रहों की तुलना में इनका निरीक्षण और अध्ययन करना आसान होता है। उन्होंने बताया कि एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल की संरचना का निर्धारण करने के लिए बहुत विशिष्ट उपकरणों की आवश्यकता होती है। टीम ने डब्ल्यूएएसपी-76 बी और डब्ल्यूएएसपी-121 बी के वायुमंडल के माध्यम से फिल्टर किए गए स्टारलाइट का विश्लेषण करने के लिए चिली में ईएसओ (ESO) के वीएलटी (VLT) पर ESPRESSO उपकरण का उपयोग किया। इससे उनमें बेरियम सहित कई तत्वों का स्पष्ट रूप से पता लगाना संभव हो पाया।