Artemis: '2030 से पहले चांद पर रहने लगेंगे लोग, वहीं करेंगे काम', NASA के अधिकारी ने जताई उम्मीद
नासा के ओरियन चंद्र अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नेतृत्व कर हॉवर्ड हू ने कहा कि इंसान 2030 से पहले चांद पर एक्टिव हो सकते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नासा के एक अधिकारी ने न्यूज वेबसाइट बीबीसी को बताया है कि इस दशक में इंसान लंबे समय तक चांद पर रह सकता है। नासा के ओरियन चंद्र अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे हॉवर्ड हू ने कहा कि इंसान 2030 से पहले चांद पर एक्टिव हो सकते हैं, जिसमें, उनके रहने के लिए बस्ती होंगी और उनके काम को समर्थन करने के लिए रोवर्स होंगे। उन्होंने कहा कि इस दशक में हम कुछ लंबे कालखंडों के लिए चांद पर रह सकते हैं वहां इंसानों के रहने लायक जगह होगी, उनके पास जमीन पर रोवर्स होंगे। हम चांद की जमीन पर इंसानों को भेजेंगे और वह वहां रहकर वैज्ञानिक काम करेंगे। वैज्ञानिक जल्द ही वहां के वातावरण में ढल जाएंगे।
करीब 50 साल बाद नासा ने चंद्रमा पर अपने मिशन को लॉन्च किया
करीब 50 साल बाद नासा ने चंद्रमा पर अपने मिशन को फिर से लॉन्च कर दिया है। बुधवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर इंसानी मिशन की शुरुआत की। अपने तीसरे प्रयास में नासा ने आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया। इससे पहले चंद्रमा पर 50 साल पहले नासा ने अपोलो मिशन भेजा गया था। जानकारी के मुताबिक, 32 मंजिल के बराबर ऊंचाई वाले अंतरिक्ष लांच सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट को फ्लोरिडा के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।
अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट
अंतरिक्ष रॉकेट आर्टेमिस-1 और ऑरियन स्पेसक्रॉफ्ट की पहली परीक्षण उड़ान है। 322 फुट (98 मीटर) लंबा यह रॉकेट नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इससे बिना चालक दल वाले ऑरियन स्पेसक्राफ्ट को चांद पर छोड़ा गया। ऑरियन करीब 42 दिनों तक चांद पर परीक्षण करेगा।
2025 में नासा का तीसरा चंद्र मिशन
यह नासा के आर्टेमिस चंद्र कार्यक्रम का पहला मिशन होगा। नासा 2025 में अपने तीसरे मिशन द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की योजना पर काम कर रहा है। नासा ने चांद के समीप जाने से पहले उसकी सतह से 60 मील ऊपर ओरियन उपग्रह से परीक्षण की योजना बनाई है।