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Artemis: '2030 से पहले चांद पर रहने लगेंगे लोग, वहीं करेंगे काम', NASA के अधिकारी ने जताई उम्मीद

Mon, 21 Nov 2022 02:58 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 21 Nov 2022 02:58 PM IST
सार

नासा के ओरियन चंद्र अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नेतृत्व  कर हॉवर्ड हू ने कहा कि इंसान 2030 से पहले चांद पर एक्टिव हो सकते हैं।

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Artemis Nasa expects human being to live on Moon before
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

नासा के एक अधिकारी ने न्यूज वेबसाइट बीबीसी को बताया है कि इस दशक में इंसान लंबे समय तक चांद पर रह सकता है। नासा के ओरियन चंद्र अंतरिक्ष यान कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे हॉवर्ड हू ने कहा कि इंसान 2030 से पहले चांद पर एक्टिव हो सकते हैं, जिसमें, उनके रहने के लिए बस्ती होंगी और उनके काम को समर्थन करने के लिए रोवर्स होंगे।  उन्होंने कहा कि इस दशक में हम कुछ लंबे कालखंडों के लिए चांद पर रह सकते हैं वहां इंसानों के रहने लायक जगह होगी, उनके पास जमीन पर रोवर्स होंगे। हम चांद की जमीन पर इंसानों को भेजेंगे और वह वहां रहकर वैज्ञानिक काम करेंगे। वैज्ञानिक  जल्द ही वहां के वातावरण में ढल जाएंगे।

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करीब 50 साल बाद नासा ने चंद्रमा पर अपने मिशन को लॉन्च किया
करीब 50 साल बाद नासा ने चंद्रमा पर अपने मिशन को फिर से लॉन्च कर दिया है। बुधवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चांद पर इंसानी मिशन की शुरुआत की। अपने तीसरे प्रयास में नासा ने आर्टेमिस-1 मिशन लॉन्च किया। इससे पहले चंद्रमा पर 50 साल पहले नासा ने अपोलो मिशन भेजा गया था। जानकारी के मुताबिक, 32 मंजिल के बराबर ऊंचाई वाले अंतरिक्ष लांच सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट को फ्लोरिडा के फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया। 
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अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट
अंतरिक्ष रॉकेट आर्टेमिस-1 और ऑरियन स्पेसक्रॉफ्ट की पहली परीक्षण उड़ान है। 322 फुट (98 मीटर) लंबा यह रॉकेट नासा द्वारा बनाया गया अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है। इससे बिना चालक दल वाले ऑरियन स्पेसक्राफ्ट को चांद पर छोड़ा गया। ऑरियन करीब 42 दिनों तक चांद पर परीक्षण करेगा।  
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2025 में नासा का तीसरा चंद्र मिशन
यह नासा के आर्टेमिस चंद्र कार्यक्रम का पहला मिशन होगा। नासा 2025 में अपने तीसरे मिशन द्वारा अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की योजना पर काम कर रहा है। नासा ने चांद के समीप जाने से पहले उसकी सतह से 60 मील ऊपर ओरियन उपग्रह से परीक्षण की योजना बनाई है।

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