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अंटार्कटिका में सफेद से हरे रंग के हुए बर्फ के पहाड़, बदलाव देख वैज्ञानिक भी हुए हैरान

Fri, 22 May 2020 11:22 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: अनवर अंसारी Updated Fri, 22 May 2020 11:22 AM IST
सार

  • अंटार्कटिका पर जलवायु परिवर्तन का असर
  • अंटार्कटिका में सफेद पहाड़ हरे रंग के हुए
  • वैज्ञानिकों ने बताया, शैवाल की वजह से ऐसा हो रहा है

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Antarctica Turning Green: Antarctica snow mountain turn green from White, Scientists says climate change is the reason behind it
अंटार्कटिका में सफेद से हरे रंग के हुए बर्फ के पहाड़ - फोटो : Twitter

विस्तार

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पूरी दुनिया पर देखा जा सकता है। अंटार्कटिका भी इससे अछूता नहीं है, वहां बर्फ से सफेद पहाड़ों ने अपना रंग बदलना शुरू कर दिया है। अंटार्कटिका में अब हरे रंग के बर्फ के पहाड़ दिखाई दे रहे हैं। इन बर्फीले पहाड़ों ने तेजी से अपने रंग में बदलाव किया है। 

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अंटार्कटिका के सफेद बर्फ से लदे पहाड़ों को देखकर किसी का भी मन मंत्रमुग्ध हो जाएगा। लेकिन अब इन पहाड़ों द्वारा खुद को हरे रंग में तब्दील करने की प्रक्रिया हैरान करने वाली है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस असामान्य गतिविधि से चिंतित हैं। 
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वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरी दुनिया पर जलवायु परिवर्तन की मार पड़ रही है। इसका असर अंटार्कटिका पर भी देखा जा सकता है। अंटार्कटिका में पहाड़ों के रंग बदलने के पीछे की वजह पर्यावरण में आया बदलाव है। जलवायु परिवर्तन की वजह से बर्फ का रंग सफेद से हरा हो रहा है। इस बदलाव को इस तरह समझा जा सकता है कि अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में भी इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 
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रंग बदलने के पीछे ये है वजह 
वैज्ञानिकों ने पहाड़ों के सफेद से हरे रंग में बदलने की वजह शैवाल को बताया है। उनका कहना है कि अंटार्कटिका में लंबे समय से शैवाल मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने कहा कि वहां शैवाल की मौजदूगी बढ़ गई है, जिस कारण पहाड़ों पर जमी बर्फ का रंग सफेद से बदलकर हरा होने लगा है। ब्रिटिश खोजकर्ता अर्नेस्ट शैकेलटन ने इस बारे में जानकारी दी है।

दो वर्षों के डाटा का किया गया विश्लेषण
यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने सेंटीनल-2 सैटेलाइट के जरिए पिछले दो वर्षों का डाटा जमा किया है। इसमें अंटार्कटिका की सतह का सही तरीके से विश्लेषण किया गया। कैंब्रिज विश्वविद्यालय और ब्रिटिश अंटार्कटिका सर्वेक्षण ने साथ मिलकर एक मानचित्र तैयार किया है। इस मानचित्र में शैवाल के तेजी से बढ़ने का पता चलता है। खास तौर पर अंटार्कटिका पठार तट पर इसकी मात्रा ज्यादा पाई गई है। कार्बन का उत्सर्जन काफी बढ़ा है। 

हरे रंग के साथ लाल और नारंगी रंग के भी शैवाल
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने बताया है कि वो इस बात की जांच कर रहे हैं कि शैवाल कहां से बढ़ रहे हैं और क्या भविष्य में इनके तेजी से बढ़ने की गुंजाइश है। शैवाल की खासियत होती है कि वो वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को सोख लेते हैं। वैज्ञानिक बता रहे हैं कि इसका सीधा मतलब है कि इस इलाके में कार्बन का उत्सर्जन बढ़ा है।


वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके में यूके की पेट्रोल कारों के सफर की वजह से कार्बन का उत्सर्जन काफी बढ़ा है। वैज्ञानिक सिर्फ हरे रंग की नहीं बल्कि लाल और नारंगी रंग के शैवाल पर भी शोध कर रहे हैं। हालांकि ये शैवाल अंतरिक्ष से दिखाई नहीं देता है।

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