मिशन कश्मीर : बड़ी तैयारी में अमित शाह, घाटी में 10 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की सूची फाइनल
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यभार संभालने के बाद से ही ‘मिशन कश्मीर’ मोड में नजर आ रहे हैं। मंगलवार सुबह शुरू हुआ शाह की बैठकों का सिलसिला लंबा चला। इनमें जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की तैयारियों से लेकर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पर लंबी चर्चाएं हुई।
बैठक के बाद उन्होंने प्रदेश राज्यपाल सतपाल मलिक से फोन पर बात की। बताया जा रहा है कि बैठक में शाह ने गृह सचिव राजीव गौबा और कश्मीर मामलों के अतिरिक्त सचिव ज्ञानेश कुमार के साथ परिसीमन आयोग के गठन संबंधी फैसले लिए।
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में परिसीमन करना चाहती है और इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। सरकार जम्मू के प्रतिनिधित्व में असमानता दूर करने के लिए इस दिशा में फौरन बढ़ना चाहती है। इस मसले पर गृह मंत्रालय और राज्यपाल एक-दूसरे के संपर्क में हैं। पिछले हफ्ते शनिवार को प्रदेश के राज्यपाल मलिक ने शाह को कानून व्यवस्था और जमीनी हालात की जानकारी दी थी।
सुरक्षा एजेंसियों की नई हिट लिस्ट, निशाने पर मोस्ट वॉन्टेड 10 आतंकवादी
गृह मंत्री शाह की सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर में शीर्ष दस आतंकवादियों की सूची तैयार हो गई है। ये अब सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर होंगे। इसमें हिज्बुल मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज अहमद नायकू का नाम शामिल है। मंगलवार को अधिकारियों ने बताया कि इनके खिलाफ जल्द ही ऑपरेशन शुरू हो जाएगा।
यह सूची आईबी, पैरामिलिट्री, सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिले इनपुट्स के आधार पर बनाई गई है। इनमें रियाज नायकू उर्फ मोहम्मद बिन कासिम, वसीम अहमद उर्फ ओसामा, मोहम्मद अशरफ खान उर्फ असरफ मौलवी, मेहराजुद्दीन, डॉ. सैफुल्ला उर्फ सैफुल्ला मीर, अरशह उल हक, हाफिज उमर,, जाहिद शेख उर्फ उमर अफगानी, जावेद मट्टू उर्फ फैसल और एजाज अहमद मलिक का नाम शामिल है।
अभी कश्मीर का पलड़ा भारी
परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों के आकार और जनसंख्या में उलटफेर हो सकता है। हालांकि, आयोग की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। अनुमान है कि एक जुलाई को शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के बाद विधानसभा चुनाव हो सकता है।
जब परिसीमन पर फारूख ने लगाया अड़ंगा
जम्मू-कश्मीर में परिसीमन पर 1995 में एक आयोग गठित हुआ था। रिटायर्ड जस्टिस केके गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि राज्य में हर 10 साल बाद परिसीमन होना चाहिए।इस हिसाब से 2005 में परिसीमन होना था लेकिन 2002 में फारूक अब्दुल्ला सरकार ने परिसीमन पर 2026 तक के लिए रोक लगा दी थी। अभी प्रदेश में राज्यपाल शासन है। ऐसे में नए सिरे से विधानसभा की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी इसलिए केंद्र सरकार परिसीमन पर जल्द आगे बढ़ना चाहती है।