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यूक्रेन संकट के बीच एक और तनाव की आहट: इससे पहले कि चीन कर दे हमला, ताइवान कैसे कर रहा बचाव की तैयारी, जानें

Wed, 23 Feb 2022 05:46 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ताइपे Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 23 Feb 2022 05:46 PM IST
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सार
ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि चीन यूक्रेन संकट का फायदा उठाने पर विचार कर सकता है और हमारी नजर उसके हर कदम पर बनी हुई है। 
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Amid Ukraine Crisis now Taiwan fears for its sovereignity expecting attack by China news and updates
ताइवान लगातार चीन से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है। - फोटो : Social Media

विस्तार

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का खतरा बढ़ता जा रहा है। जहां पुतिन सरकार लगातार यूक्रेन पर हमले की तैयारी करती नजर आ रही है, वहीं अमेरिका समेत सभी पश्चिमी देश प्रतिबंधों के अलावा और किसी भी तरह की कार्रवाई से लाचार नजर आ रहे हैं। इन परिदृश्यों ने फिलहाल ताइवान की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ा दी है। चीन के तट से कुछ ही दूरी पर मौजूद ताइवान की सरकार ने खतरे को भांपते हुए हाई-अलर्ट जारी किया है और अपनी तीनों सेनाओं को तैयार रहने का निर्देश दिया है। 


ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग-वेन ने कहा, "हमने अपनी ताकत बढ़ाने पर काम जारी रखा है, ताकि चीन से लगे जलडमरूमध्य पर हम अपनी सेना को पूरी तरह तैयार रख सकें।" उन्होंने अपने एक ट्वीट में यूक्रेन संकट को लेकर रूस पर निशाना भी साधा और कहा कि ताइवान पूरी तरह यूक्रेन की स्वायत्ता का समर्थन करता है।


यूक्रेन संकट का फायदा उठा सकता है चीन, क्या है ताइवान का विचार?
ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि चीन यूक्रेन संकट का फायदा उठाने पर विचार कर सकता है और हमारी नजर उसके हर कदम पर बनी हुई है। ब्रिटेन आईटीवी न्यूज को दिए इंटरव्यू में  उन्होंने कहा, "चीन हमारे खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की सोच सकता है, लेकिन हम किसी भी वक्त उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।"

ताइवान के खिलाफ क्यों आक्रामक रुख अपना सकता है चीन?
गौरतलब है कि 1949 में चीन पर शासन करने वाली चीनी गणतंत्र सरकार (ROC) की कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ हार हुई थी। इसके बाद जहां चीन के मुख्य भाग पर कम्युनिस्ट पार्टी का शासन कायम हो गया था, वहीं पिछली सरकार ताइवान तक ही सिमट गया। हालांकि, ताइवान में तब से लेकर अब तक चीन से अलग लोकतांत्रिक सरकार का राज चलता आ रहा है। 

दूसरी तरफ ताइवान को संयुक्त राष्ट्र की तरफ से चीन का हिस्सा माना जाता है। हालांकि, इसके बावजूद ताइवान में चीन के तानाशाही राज से उलट लोकतांत्रिक शासन है। इसे लेकर चीन लगातार आपत्ति जताता रहा है और ताइवान की स्वायत्ता पर दावा करता रहा है। हालांकि, अब तक ताइवान चीन से अलग पहचान बनाने में काफी हद तक कामयाब रहा है। 
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