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Sri Lanka: नौ दिन के लिए श्रीलंका के 15 नेता गए चीन, ‘ब्रेन-वॉशिंग’ की है आशंका

Sat, 22 Apr 2023 05:36 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 22 Apr 2023 05:36 PM IST
सार

Sri Lanka: पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि इस यात्रा से भारत और अमेरिका की चिंताएं बढ़ सकती हैं। दोनों देशों में इस यात्रा पर करीबी निगाह रखी जाएगी। पर्यवेक्षकों ने इस ओर भी ध्यान खींचा है कि चीन श्रीलंका के सबसे बड़े कर्जदाता देशों में एक है...

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Amid rising geopolitical tensions in Asia, 15 leaders of Sri Lanka ruling coalition have reached China
Sri lanka-China - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच श्रीलंका के सत्ताधारी गठबंधन के 15 नेता चीन पहुंच गए हैं। इनमें कई सांसद भी शामिल हैं। ये लोग चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के आमंत्रण पर वहां गए हैं। इस यात्रा को खासा महत्त्वपूर्ण समझा गया है।

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चीन गए दल में राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व वाली यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के पांच सदस्य शामिल हैं। इसमें दस सदस्य महिंदा राजपक्षे के नेतृत्व वाली पार्टी श्रीलंका पोडुजना पेरामुना (एसएलपीपी) के हैं। एसएलपीपी के सदस्यों में निपुण रानावाका भी हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे के भतीजे हैं। बताया जाता है कि यह श्रीलंकाई सियासी दल नौ दिन तक चीन में रहेगा। इस दौरान और वह दो चीनी राज्यों का दौरा करेगा।

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पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि इस यात्रा से भारत और अमेरिका की चिंताएं बढ़ सकती हैं। दोनों देशों में इस यात्रा पर करीबी निगाह रखी जाएगी। पर्यवेक्षकों ने इस ओर भी ध्यान खींचा है कि चीन श्रीलंका के सबसे बड़े कर्जदाता देशों में एक है। 2009 में देश में गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से चीन और श्रीलंका की निकटता बढ़ती चली गई है। इस बीच पश्चिमी देशों का आरोप रहा है कि चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में शामिल होने के बाद श्रीलंका ने चीन से जो ऋण लिए, वह उसके कर्ज संकट में फंसने का एक बड़ा कारण रहा। जबकि चीन इस आरोप का खंडन करता रहा है।

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भारत और अमेरिका को इस बात की आशंका भी है कि चीन श्रीलंका में अपना सैनिक अड्डा बनाने की कोशिश कर सकता है। दक्षिणी श्रीलंका में स्थित हम्बनटोटा में चीन पहले ही बीआरआई के तहत बंदरगाह बना चुका है, जबकि कोलंबो पोर्ट के पास उसने जमीन ले रखी है। 

वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन पहले भी रसूखदार लोगों को अपने यहां बुलाता रहा है। ऐसी यात्राओं के दौरान राजनेताओं, पत्रकारों और पेशेवरकर्मियों को चीन अपनी प्रगति और अपने खास कार्यक्रमों की कामयाबियों का दर्शन कराता है। इस बात 15 सदस्यीय दल में जो लोग चीन गए हैं, उनमें कई ऐसे युवा नेता शामिल हैं, जो अगला चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।

श्रीलंकाई दल कुनमिंग और यूनान प्रांतों का दौरा करेगा। प्रांतीय राजधानियों में श्रीलंकाई प्रतिनिधियों की सीपीसी के अधिकारियों के साथ बातचीत होगी। यह एक दल एक सेमिनार में भी भाग लेगा, जिसका विषय चीन में गरीबी खत्म करने और गांवों के पुनर्जीवन की बहुचर्चित योजनाएं हैं। दल के सदस्यों को कुछ मॉडल गांवों का दौरा कराया जाएगा, जहां आधुनिक ढंग से होने वाली खेती को वे प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे।     

यात्रा के आखिरी दौर में प्रतिनिधिमंडल फुजियान प्रांत और उसके बाद राजधानी बीजिंग की यात्रा करेगा। फुजियान में भी दल के सदस्य एक सेमीनार में भाग लेंगे, जिसका विषय बीआरआई में सहयोग और इस परियोजना से उपलब्ध होने वाले विकास के अवसर है। बीजिंग में सीपीसी की सेंट्रल कमेटी से जुड़े विशेषज्ञों से उनकी बातचीत होगी। विश्लेषकों के मुताबिक यात्रा का कार्यक्रम से स्पष्ट है कि चीन वहां गए श्रीलंकाई राजनेताओं को अपनी सफलता दिखा कर उन्हें प्रभावित करना चाहता है।

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