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Bangladesh: भारत से बांग्लादेश ने अपने राजदूत को बुलाया वापस; फेरबदल के दूसरे चरण में पहुंची अंतरिम सरकार

Thu, 03 Oct 2024 06:46 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 03 Oct 2024 06:46 PM IST
सार

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने घरेलू प्रशासन के साथ-साथ राजनयिक सेवा में फेरबदल के दूसरे चरण को अंजाम देते हुए नई दिल्ली में अपने उच्चायुक्त सहित पांच राजदूतों को वापस बुलाया है।

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Amid diplomatic reshuffle, Bangladesh recalls envoy from India
मोहम्मद यूनुस, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार - फोटो : X / @Yunus_Centre

विस्तार

बांग्लादेश में मुख्य सलाहकार के रूप में प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत, ब्रुसेल्स, कैनबरा, लिस्बन और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के स्थायी मिशन में बांग्लादेश के राजदूतों को नए फेरबदल के हिस्से के रूप में तुरंत वापस लौटने और यहां विदेश मंत्रालय को रिपोर्ट करने के लिए कहा है।
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कुछ दिन पहले लंदन से बुलाई गई थीं उच्चायुक्त
एक अधिकारी ने गुरुवार को बताया, कि राजदूतों को वापस बुलाना सरकार के उस फैसले का हिस्सा है जिसके तहत भारत में हमारे उच्चायुक्त मुस्तफिजुर रहमान को ढाका में विदेश मंत्रालय में वापस लौटने के लिए कहा गया है। इस कड़ी में लंदन में बांग्लादेश की उच्चायुक्त सादिया मुना तस्नीम को चार दिन पहले ढाका लौटने के लिए कहा गया था।
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हसीना सरकार के पतन के बाद से बदलाव
अगस्त के आखिर में विदेश सेवा में बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व में हुए व्यापक जन-आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। बड़े पैमाने पर हुए इस जन-आंदोलन के बाद 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। 
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पहले भी कई देशों के राजनयिक बुलाए गए थे वापस
उस समय ढाका ने संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में अपने राजदूतों और मालदीव में उच्चायुक्त को स्वदेश लौटने का आदेश दिया था। इनमें से कई राजदूत पूर्व राजनयिक या सेवानिवृत्त और सेवारत नागरिक और सैन्य अधिकारी थे, जिन्हें अपदस्थ सरकार ने विदेश में नियुक्त किया था। विदेश मंत्रालय ने अभी तक इन देशों में कोई नई नियुक्ति नहीं की है। 

देश में घरेलू प्रशासन में भी हुआ बड़ा बदलाव
इस बीच, कार्यभार संभालने के बाद अंतरिम सरकार ने घरेलू प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ अधिकारियों या शीर्ष नौकरशाहों की संविदा नियुक्तियों को रद्द कर दिया, जबकि मुख्य कानून प्रवर्तन एजेंसी के प्रमुख समेत कई पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया। उन पर जुलाई और अगस्त की शुरुआत में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और आम लोगों की हत्या करने का आरोप था, जो सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली में बदलाव की मांग से पैदा हुआ था। 


छात्र आंदोलन के बाद से तमाम बदलाव और गिरफ्तारी
गृह मंत्रालय के बर्खास्त वरिष्ठ सचिव जहांगीर आलम और बर्खास्त पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल मामून दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और छात्र आंदोलन के तहत हुए घातक विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी गतिविधियों के लिए पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इस आंदोलन में लगभग एक हजार लोगों की जान चली गई थी।

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