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हां, मैं एक समलैंगिक हूं...
Updated Tue, 26 Mar 2013 11:41 PM IST
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वो 1975 का साल था। पहली बार किसी शख्स ने समलैंगिकों पर लगाए गए अमेरिकी सेना की पाबंदियों को चुनौती दी थी। लियोनार्दो मैटोल्विक ही वह शख़्स थे जिन्होंने समलैंगिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने की पहल की।
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अफ़सोस कि वे इस ऐतिहासिक दिन को नहीं देख पाए जब अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने सालों बाद जाकर साल 2013 में समलैंगिकों के विवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को खत्म कर दिया है।
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मई 1975 में टीवी को दिए गए अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "ये बात मुझे भीतर ही भीतर कचोटती है। मेरी अंतरात्मा मुझे बार-बार पुकारती है। कहती है कि आगे बढ़ो और सब को बता दो। अब तुम्हारी ज़्यादती और नहीं सहूंगा, अमेरिका।”
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सच छुपा कर और नहीं जी सकते
मैटोल्विक एक सैनिक थे और उनपर अमेरिकी वायुसेना को नाज था। उन्हें उनकी बेहतरीन सेवाओं के लिए सेना की ओर से पर्पल हार्ट और द ब्रोंज स्टार मेडल भी मिल चुका था।
मैटोल्विक तब वियतनाम में कार्यरत थे। उसी समय डेविड एडेल्सटोन अमेरिकी सिविल लिबर्टीज यूनियन के लिए वकील का काम कर रहे थे उन्हें एक ऐसे समलैंगिक सैनिक की तलाश थी जो सेना द्वारा समलैंगिकों पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दे सके।
एडेल्सटोन कहते हैं,"मुझे मैटोल्विक में इसकी मजबूत संभावनाएं दिखीं। उनका सैन्य रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। इसीलिए मुझे उम्मीद थी कि उनके द्वारा विरोध किए जाने पर वायु सेना इस प्रतिबंध के बारे में दोबारा सोच सकती है।"
हालांकि एडेल्सटोन ने उन्हें आगाह भी किया कि ऐसा करने से उनकी 13 साल की नौकरी पर तलवार लटक सकती है।
एडेल्सटोन उस वक्त को याद करते हुए कहते हैं कि लियानार्दो ने कहा था कि वे इस सच को छिपा कर अब और नहीं जी सकते।
हर मायने में ‘अलग’
लियोनार्दो को समलैंगिक हुए बस दो साल ही हुए थे। तब वे 30 के थे। उनके माता-पिता दोंनो धार्मिक और राजनीतिक रूप से बेहद रुढ़िवादी थे। मैटोल्विक खुद भी एक सच्चे कैथोलिक थे।
मैटोल्विक की भतीजी विकी वॉकर ने बताया,"पड़ोसी क्या सोचेंगे? हमारा परिवार इस बारे में ज्यादा सोचता था। हमारा परिवार इतना परंपरावादी था कि हमें सोडा तक पीने की इजाज़त नहीं थी।"
समलैंगिक अधिकारों के कार्यकर्ता माइकल बेडवेल उनके करीबी दोस्त रह चुके हैं। उनके अनुसार लियोनार्दो अपनी कच्ची उम्र से ही हर मायने में ‘डिफ़रेंट’ थे।
समलैंगिकता की ओर रुझान
बेडवेल के अनुसार मैटलोविक शुरू से ऐसे नहीं थे। यह सब तब शुरु हुआ जब उन्हें ‘समलैंगिक बार’ जाने का मौका मिला।
वहां कई प्रतिष्ठित ‘समलैंगिक मॉडलों’ से उनकी मुलाकात होने लगी। तब पहली बार उन्हें समलैंगिक संबंधों की ओर आकर्षण महसूस हुआ।
मैटोल्विक ने खुद के समलैंगिक होने की बात अपने करीबी दोस्तों या परिवार के अतिरिक्त और किसी से नहीं बांटी।
बेडवेल ने बताया,"लियोनार्दो को बचपन से यही रटाया गया था कि अमेरिका आज़ाद इंसानों का मुल्क है। इसीलिए उन्हें लगता था कि अमेरिका को समलैंगिकों को भी उनका हक दे देना चाहिए।"
यही सोचते हुए मैटोल्विक ने अपने कमांडिंग ऑफिसर को एक चिट्ठी लिखी।
उसमें उन्होंने अपने समलैंगिक होने का रहस्य जाहिर करते हुए उनसे ये गुजारिश की कि उन्हें इसकी आज्ञा दी जाए।
ऑफिसर ने उस चिट्ठी पर एक नजर डाली और बस इतना कहा,"इसे तुरंत फाड़ डालो, फिर मैं सब भूल जाऊंगा।"
मगर लियोनार्दो ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया।
अगले ही दिन वायुसेना ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरु कर दी।
ये बात जब उनकी मां को मालूम हुई तो उन्होंने बस इतना ही कहा कि वे ये बात अपने पिता को न बताएं।
पिता फूट-फूट कर रो उठे
बेडवेल बताते हैं,“जब यह बात उनके पिता को पता चली तो वे बेहद भावुक हो उठे। वे फूट-फूट कर रोने लगे। मगर फिर संयत होते हुए कहा कि अगर उसे यह सही लगता है। तो मुझे भी कोई आपत्ति नहीं।"
एडेल्सटोन मैटोल्विक मामले को सार्वजनिक करना चाहते थें। इसलिए 1975 में मैटोल्विक ने न्यूयार्क टाइम्स को एक इंटरव्यू दिया।
इसके बाद तो उनके समलैंगिक होने की खबर आग की तरह पूरे अमेरिका में फैल गई।
ये सितंबर 1975 की बात है। टाईम मैगजीन के मुख पृष्ट पर उनकी तस्वीर के साथ छपा था,“हां, मैं एक समलैंगिक हूं।"
समलैंगिकता का मिथ
बेडवेल कहते हैं,"उसके बाद तो वे खुलकर समलैंगिकता का समर्थन करने लगे। समलैंगिक अधिकारों के झंडाबरदार बन कर उभरे। खासकर सेना में वे एक नायक के रूप मे देखे जाने लगे।"
बेडवेल आगे कहते हैं,"एक देशभक्त होने के साथ-साथ रूढिवादी मध्य वर्ग के सुपरहीरो बन गए थे मैटोल्विक। उन्होंने समलैंगिकता के चिरपरिचित मिथक को ध्वस्त कर डाला था।"
पांच साल बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत जज ने उनकी सेवाओं को फिर से बहाल करने का आदेश दिया।
मैटोल्विक समलैंगिक के अन्य मुद्दों पर सक्रिय होते चले गए। 25 साल पहले 1988 में उन्होंने अपनी अंतिम सांसें ली।