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लगातार 10 घंटे तक बैठने वाली महिलाएं हो जाती हैं कमजोर, रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ता है असर
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Wed, 27 Jun 2018 05:06 AM IST
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लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठे रहने वाली महिलाओं को उम्र बढ़ने के साथ-साथ कमजोर होने का जोखिम अधिक रहता है। जो महिलाएं अपना अधिक समय बैठे रहने में बिताती हैं उनका शरीर बढ़ती उम्र के साथ धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने 12 वर्ष की अवधि में लगभग 5,500 अधेड़ उम्र की महिलाओं के बैठने के तरीकों का अध्ययन किया। यूनिवर्सिटी के पॉल गार्डिनर ने कहा कि जो महिलाएं प्रतिदिन 10 घंटे बैठे रहने में बिता देती हैं, वह बढ़ती उम्र के साथ-साथ कमजोरी का शिकार हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘प्रति दिन 5.5 घंटे तक बैठना इसका मध्यम स्तर है जबकि 3.5 घंटे तक बैठना कम स्तर है।’ गार्डिनर ने कहा कि कमजोरी या निर्बलता का मतलब है कि किसी बीमारी या रोग से उबरने के लिए क्षमता का कम होना। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कम होने लगती है। ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडीमीऑलजी’ नामक एक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि महिलाओं के लगातार बैठे रहने के समय में कटौती के बाद इस तरह की समस्याओं में कमी देखी जा सकती है।
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लेकिन 10 घंटे तक बैठे रहना स्वास्थ्य लिहाज से हानिकारक हो सकता है। इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने, चक्कर खाकर गिरने व समयपूर्व मृत्यु के जोखिम जैसी संभावनाएं भी हो सकती हैं। गार्डिनर ने कहा कि महिलाओं को इस तरह के जोखिम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए अपने बैठने के समय में बदलाव करने के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी सक्रिय रहना होगा।
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ऑस्ट्रेलिया में क्वीन्सलैंड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने 12 वर्ष की अवधि में लगभग 5,500 अधेड़ उम्र की महिलाओं के बैठने के तरीकों का अध्ययन किया। यूनिवर्सिटी के पॉल गार्डिनर ने कहा कि जो महिलाएं प्रतिदिन 10 घंटे बैठे रहने में बिता देती हैं, वह बढ़ती उम्र के साथ-साथ कमजोरी का शिकार हो सकती हैं।
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शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘प्रति दिन 5.5 घंटे तक बैठना इसका मध्यम स्तर है जबकि 3.5 घंटे तक बैठना कम स्तर है।’ गार्डिनर ने कहा कि कमजोरी या निर्बलता का मतलब है कि किसी बीमारी या रोग से उबरने के लिए क्षमता का कम होना। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कम होने लगती है। ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडीमीऑलजी’ नामक एक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि महिलाओं के लगातार बैठे रहने के समय में कटौती के बाद इस तरह की समस्याओं में कमी देखी जा सकती है।
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लेकिन 10 घंटे तक बैठे रहना स्वास्थ्य लिहाज से हानिकारक हो सकता है। इसके कारण अस्पताल में भर्ती होने, चक्कर खाकर गिरने व समयपूर्व मृत्यु के जोखिम जैसी संभावनाएं भी हो सकती हैं। गार्डिनर ने कहा कि महिलाओं को इस तरह के जोखिम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए अपने बैठने के समय में बदलाव करने के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी सक्रिय रहना होगा।