दुनिया भर में कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं, आखिर क्यों?
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मैक्सिको में सड़कों पर चलते हुए फब्तियां और आवाज़ें सुनना रोज़ की बात थी। एक बार मैंने फब्ती कसने वालों के मुंह पर ठंडा पानी मारकर इसका करारा जवाब भी दिया था, जिससे यकीनन बहुत अच्छा महसूस हुआ। उसके कुछ साल बाद मैं मध्य-पूर्व पहुंच गई। शुरू में तो मुझे लगा कि लातिन अमेरिका और यहां जमीन-आसमान का फर्क है।
लेकिन अगर आप आम धारणा से परे देखें तो दोनों जगहों में महिलाओं की स्थिति एक जैसी ही है। मध्य-पूर्व की संस्कृति का मूल आधार महिलाओं के सम्मान की रक्षा है जिसे अक्सर महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार देने से रोकने के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
सऊदी अरब में आपको कहीं भी जाने के लिए एक पुरुष की ज़रूरत होती है और यात्रा करने के लिए पुरुष अभिभावक की अनुमति चाहिए होती है। एक के बाद एक नियम महिलाओं को खुलकर रहने से रोकते हैं। मैं अक्सर सोचती हूं कि इसकी तुलना में लातिन अमेरिका की मचिस्ता (मर्दानगी भरा व्यवहार) संस्कृति जो पौरुष के विचार पर ज़ोर देती है, कहां खड़ी होती है। बहरहाल भले ही इस कथित मचिस्ता संस्कृति में गौरव हो लेकिन अंततः परिणाम एक ही है।
महिलाएं दूसरे दर्जे की नागरिक हैं। कोलंबिया की और मैक्सिको शहर में रहने वाली फ़ेमिनिस्ट कैटेलिना रुइज़-नवार्रो कहती हैं कि इसे देखना आसान नहीं। लातिन अमेरिका के पुरुष अक्सर मर्दानगी भरे बरताव पर गर्व करते हैं और महिलाएं अपने 'रक्षक' मर्दाना आदमी को पसंद करती हैं। लेकिन आप आंकड़ों पर नज़र डालें तो चौंकाने वाली बातें पता चलती हैं।
किसी न किसी किस्म के यौन शोषण का सामना करना पड़ा
मिस्र में महिलाओं के खतने (एफ़जीएम) पर 2008 से प्रतिबंध है लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार 50 साल से कम उम्र की 90 प्रतिशत महिलाएं एफ़जीएम के अनुभव से गुजरती हैं।
संयुक्त राष्ट्र के 2013 के एक अध्ययन के अनुसार 99.3 प्रतिशत मिस्री महिलाओं को किसी न किसी किस्म के यौन शोषण का सामना करना पड़ा है। लेकिन आप देखें तो लातिन अमेरिका के आंकड़े भी बहुत अच्छी तस्वीर नहीं दिखाते।
थॉमसन रॉयटर्स फ़ाउंडेशन के लिए किए गए यूगोव के हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित सार्वजनिक परिवहन वाले तीन शहर लातिन अमेरिका में है, बोगोटा, मैक्सिको सिटी और लीमा।
मैक्सिको सिटी में मैट्रो में सिर्फ़ महिलाओं वाले डिब्बे लगाकर इस पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी लेकिन इसे आंशिक सफलता ही मिली। मैंने अक्सर देखा है कि पुरुष भी इनमें घुस जाते हैं और अधिकारी इसे अनदेखा कर देते हैं।
कानून और हकीकत
लातिन अमरीकी देशों ने 1994 में कन्वेंशन ऑफ़ बेलेम दो पारा पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके सदस्य देश महिला अधिकारों को बढ़ावा देने और महिलाओँ के ख़िलाफ़ हिंसा के ख़िलाफ़ कई प्रभावशाली क़ानून लागू करने को प्रतिबद्ध होते हैं। लेकिन क़ानून एक चीज़ है और हक़ीक़त दूसरी। न तो लातिन अमेरिका और न ही मध्य-पूर्व में क़ानून यौन हिंसा से महिलाओं को उचित सुरक्षा देते हैं।
संयुक्त अरब अमीरात में ऐसे मामले हुए हैं जहां बलात्कार की शिकायत करने वाली महिलाओं को अन्य किसी आरोप में जेल में डाल दिया गया है। लेकिन ब्राज़ील और मैक्सिको जैसे देश महिलाओं के लिए सबसे ख़तरनाक 10 देशों में से हैं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार ब्राज़ील के सबसे बड़े शहर साओ पाओलो में हर 15 सेकेंड पर एक महिला पर हमला होता है। मैक्सिको में हर साल करीब एक लाख बीस हज़ार महिलाओं का बलात्कार होता है- यानी हर चार मिनट पर एक बलात्कार। मैक्सिकों की फ़ेमिसाइड ऑब्ज़र्वेट्री के अनुसार, सिर्फ़ मैक्सिको राज्य में ही 2011 और 2012 में 1,258 लड़कियां और महिलाएं गायब हो गईं।
2011 से 2013 के बीच 840 महिलाएं मारी गईं, जिनमें से 145 हत्याओं की फ़ेमिसाइड (लैंगिक विरोध के चलते महिलाओं की हत्या) मानकर जांच की जा रही है। पैन अमरीकन हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के अनुसार, बोलिविया की 15-49 साल की 53 प्रतिशथ महिलाओं ने अपने जीवन में शारीरिक या यौन हिंसा की शिकायत की है। इक्वाडोर की 38 प्रतिशत महिलाएं कहती हैं कि पत्नी को पीटना कम से कम एक वजह से सही ठहराया जाता है।