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ओसामा बिन लादेन पर बनी फिल्म 'गलत'
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 22 Dec 2012 10:24 PM IST
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ओसामा बिन लादेन की खोज के बारे में एक नई फिल्म को 'फिल्म' बताया गया है क्योंकि उसमें ऐसे संकेत हैं कि यातना की वजह से बिन लादेन को ढूंढने में मदद मिली थी।
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ये उन तीन अमेरिकी सांसदों का कहना है जिन्होंने सोनी पिक्चर्स एंटरटेंमेंट के प्रमुख को एक पत्र लिखकर कंपनी के बैनर तले बनी फिल्म जीरो डार्क थर्टी पर अपनी आपत्ति जाहिर की है। इस पत्र में दावा किया गया है कि निर्देशक कैथरिन बिगलो की फ़िल्म 'उस मिथक को बढ़ावा देती है जिसके मुताबिक यातना काम करती है।'
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एक वक्तव्य में कैथरिन बिगलो ने कहा है कि उनकी फिल्म 'कई विवादित प्रथाओं और खुफ़िया तरीकों' को दर्शाती है। बिगलो और फिल्म के पटकथा लेखक मार्क बॉयल के मुताबिक ऐसा नहीं कहा जा सकता कि अल-कायदा नेता बिन लादेन की सफलतापूर्वक खोज किसी एक तरीक़े की वजह से ही हो पाई।
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आपत्ति
अमेरिकी सीनेटर, डाएन फ़ाइनस्टेन, कार्ल लेविन और राष्ट्रपति पद के पूर्व उम्मीदवार जॉन मैक्केन द्वारा लिखा गया पत्र बुधवार को सार्वजनिक किया गया। ये तीनों ही सीनेट की खुफिया मामलों की समिति के सदस्य हैं और इनका कहना था कि फिल्म कंपनी सोनी और उसके मुख्य कार्यकारी माइकल लिंटन का कर्तव्य है कि वो फिल्म में बदलाव करें।
इन तीनों ने लिखा, "मूल समस्या ये है कि जो लोग जीरो डार्क थर्टी देखेंगे, वो इसमें दिखाई गई घटनाओं को सही मानेंगे। इसलिए इस फिल्म में ग़लत तरीक़े से अमरीकी लोगों की राय प्रभावित करने की क्षमता है।" पत्र में आगे लिखा है, "आंतकवाद के खिलाफ लड़ाई में यातना के इस्तेमाल से अमेरिकी मूल्यों और अमेरिका की साख को भारी नुक़्सान हुआ जिसे न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता और न ही मिटाया जा सकता है।"
इन सांसदों के मुताबिक फिल्म के निर्माताओं की "सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी थी कि वे अपने तथ्यों की पुष्टि करें।" इस साल की शुरुआत में कैथरिन बिगलो की फिल्म पर प्रचार हथियार होने के आरोप लगे थे जिसके इस्तेमाल से राष्ट्रपति ओबामा के चुनाव अभियान में मदद मिली सकती थी।
इसके बाद फिल्म की रिलीज चुनाव के बाद तक के लिए टाल दी गई थी। जीरो डार्क थर्टी, ब्रिटने में अगले वर्ष 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग भारत में चंडीगढ़ में भी हुई थी।