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ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका के बीच सहयोग के कई मौके, 280 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत 

Thu, 29 Mar 2018 10:12 PM IST
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Updated Thu, 29 Mar 2018 10:12 PM IST
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us said many opportunities for cooperation between India and the america in the energy sector
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के काफी अवसर हैं। भारतीय मूल के शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह मौके सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों के कारोबार में ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के वित्तीय क्षेत्रों से लाभ कमाने में भी मौजूद हैं।
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अमेरिका में संघीय ऊर्जा नियामक आयोग (एफईआरसी) के सदस्य नील चटर्जी ने अपने पहले भारत के दौरे से लौटने के बाद कहा कि आगामी दशकों में भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में लाभ कमाने की काफी संभावनाएं हैं। 
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चटर्जी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत में अमेरिका के लिए द्विपक्षीय तरीके से काम करने के वास्तविक अवसर हैं और ये अवसर न केवल हमारे ईंधन बेचने के लिए हैं बल्कि प्रौद्योगिकी और पूंजी मुहैया कराने के लिए भी हैं।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय ग्रिडों के आधुनिकीकरण के लिए ऊर्जा उत्पादन, पारेषण एवं वितरण में 280 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है।’
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उन्होंने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को द्विपक्षीय जरूरत बताते हुए कहा कि अमेरिका को भारत के अनुभव से भी काफी कुछ सीखने की जरूरत है। चटर्जी ने भारत सरकार एवं राज्यों की महत्वाकांक्षी ऊर्जा नीति लक्ष्यों का जिक्र करते हुए कहा कि एफईआरसी केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग तथा ऊर्जा नीति योजनाओं के क्रियान्वयन के भारतीय सरकार के तरीकों से सीखने को उत्सुक है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाने के भारतीय प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। 


दो निर्यातक कर चुके हैं 32 अरब डॉलर का कांट्रेक्ट

एफईआरसी के सदस्य नील चटर्जी ने बताया कि अमेरिका के दो बड़े गैस निर्यातक चेनेयर और डोमिनियन ने अमेरिका के प्राकृतिक गैस के सालाना 280 बिलियन क्यूबिक फुुट आपूर्ति के लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ एक कांट्रेक्ट किया है। उन्होंने बताया कि सिर्फ इन दो कांट्रेक्ट की कीमत ही 32 अरब अमेरिकी डॉलर है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संघ ने भारत में 2040 तक प्राकृतिक गैस की खपत के सालाना 4.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान जताया है। 
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