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पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाएगी ट्रंप की अफगानिस्तान नीति

Fri, 25 Aug 2017 03:50 PM IST
राकेश सूद/ पूर्व राजदूत, बीबीसी
राकेश सूद/ पूर्व राजदूत, बीबीसी Updated Fri, 25 Aug 2017 03:50 PM IST
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us president donald Trumps Afghan policy to boost pressure on Pakistan
डोनाल्ड ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया पर अपने प्रशासन की नीति की रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा, वह चाहेंगे कि अफगानिस्तान में भारत और आर्थिक सहयोग करे।

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उन्होंने भारत की अब तक की भूमिका की तारीफ की और कहा कि इसे इसी दिशा में बढ़ाया जाना चाहिए। मगर ट्रंप के भाषण में अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को लेकर नई बात नहीं है क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी अपने कार्यकाल में इसी बात पर ज़ोर दिया था। भारत की भूमिका पिछले 15-16 सालों से वैसी की वैसी ही बनी हुई है। भारत पहले ही सकारात्मक भूमिका निभा रहा है।
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अफगानिस्तान को 2 बिलियन डॉलर का आर्थिक सहयोग पहले ही दे चुका है। वहां पर पुनर्निर्माण से लेकर इन्फ़्रास्ट्रक्चर के विकास तक में भारत सहयोग कर रहा है। स्कूल, मशीन और टूल सेंटर, पावर ट्रांसमिशन सिस्टम, डैम और पार्लियामेंट बिल्डिंग समेत कई चीज़ों को बनाने में भारत की भूमिका रही है। भारत ने कई लोगों को पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए वज़ीफ़े दिए हैं।
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हर साल एक हज़ार से ज़्यादा छात्र अफ़ग़ानिस्तान से भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में आते हैं। इसके अलावा भारत ने ज़रूरत पड़ने पर मानवता की दृष्टि से दवाइयां, डॉक्टर, मेडिकल कैंप, 10 लाख टन गेहूं, बिस्किट और स्पेशल हाई प्रोटीन बिस्किट मुहैया करवाने जैसे कई काम भी करवाए हैं। जब अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ ग़नी भारत आए थे तो 1 बिलियन डॉलर और देने का ऐलान किया गया था।

भारत और पाकिस्तान से हैं अलग उम्मीदें
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका भारत और पाकिस्तान की भूमिका तो देख रहा है मगर दोनों देशों से उसकी उम्मीदें अलग हैं। अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान आतंकवाद से मुकाबले में उसकी पूरी मदद करे।

वह जानता है कि तालिबान को सहयोग मिला हुआ है। अमरीका के जनरल्स साफ़-साफ़ कह चुके हैं कि किसी भी अराजकता को अगर बाहरी ताकत का सहयोग मिलता रहेगा तो उससे पार पाना असंभव है। वहीं भारत से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह पुनर्निर्माण में अमरीका के साथ दे। वैसे ऐसा करना भारत के भी हित में है कि अफ़ग़ानिस्तान विकासशील देश के तौर पर उभरे और वहां स्थिरता आए।


ट्रंप प्रशासन की इस नीति में किसी की जीत जैसा कुछ नहीं है। ट्रंप ने सब बातें खुलकर रखी हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि पहले उनकी सोच थी कि अमरीका को अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिक हटा लेने चाहिए क्योंकि यह उसकी लड़ाई नहीं है। मगर बावजूद इसके उन्होंने अगर सलाहकारों के कहने या सोच-विचार के बाद यहां रुकने का इरादा बनाया है तो इससे पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा।

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