{"_id":"5bb3756c867a55019d618015","slug":"us-parliament-proposed-highest-civilian-award-to-mahatma-gandhi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महात्मा गांधी को अमेरिकी संसद का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का प्रस्ताव","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
महात्मा गांधी को अमेरिकी संसद का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने का प्रस्ताव
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
Updated Tue, 02 Oct 2018 07:11 PM IST
विज्ञापन
महात्मा गांधी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आधा दर्जन प्रभावशाली अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को मरणोपरांत प्रतिष्ठित ‘कांग्रेसनल गोल्ड मेडल’ से सम्मानित करने का प्रस्ताव एक बार फिर संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में पेश किया है।
विज्ञापन
प्रस्ताव पेश करने वालों में चार भारतीय अमेरिकी सांसद भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि शांति और अहिंसा को बढ़ावा देने में महात्मा गांधी के योगदान को देखते हुए उन्हें इस सम्मान से नवाजा जाए। ‘कांग्रेसनल गोल्ड मेडल’ अमेरिकी संसद की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
विज्ञापन
अमेरिकी संसद की सदस्य कैरोलिन मलोनी ने 23 सितंबर को प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव संख्या एचआर-6916 पेश किया था। भारतीय मूल के चार सांसदों एमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना और प्रमीला जयपाल ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
विज्ञापन
भारत एवं भारतीय-अमेरिकियों पर संसदीय कॉकस की मौजूदा सह अध्यक्ष तुलसी गबार्ड ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इस प्रस्ताव वित्तीय सेवा समिति और सदन की प्रशासन समिति को भेज दिया गया है ताकि जरूरी कार्यवाही की जा सके।
सत्याग्रह आंदोलन ने पूरी दुनिया को प्रेरित किया
कैरोलिना ने न्यूयॉर्क में अगस्त में हुई लोकप्रिय इंडिया डे परेड के दौरान इस प्रस्ताव के संबंध में घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि महात्मा गांधी के अहिंसक प्रतिरोध के ऐतिहासिक सत्याग्रह आंदोलन ने एक देश और पूरी दुनिया को प्रेरित किया। उनका उदाहरण हमें दूसरों की सेवा में खुद को समर्पित करने की ऊर्जा देता है।
इन विदेशी नागरिकों को मिल चुका है सर्वोच्च सम्मान
कांग्रेसनल गोल्ड मेडल अब तक बहुत कम विदेशी नागरिकों को दिया गया है। पहली बार 1997 में मदर टेरेसा को यह सम्मान दिया गया था। इसके बाद नेल्सन मंडेला (1998), पोप जॉन पॉल द्वितीय (2000), दलाई लामा (2006), आंग सान सू ची (2008), मोहम्मद युनूस (2010) और शिमोन पेरेज (2014) को इस सम्मान से नवाजा गया था।