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आतंक को समर्थन देने वाले किसी भी देश की सरकार पर केस ठोक सकेंगे 9/11 पीड़ित
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 10 Sep 2016 01:00 PM IST
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- फोटो : getty
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अमेरिकी संसद ने शुक्रवार को एक विधेयक पारित किया है जिसके मुताबिक 9/11 हमले के पीड़ित और उनके संबधी उन देशों की सरकारों के खिलाफ मुकदमा कर सकेंगे, जिन पर आतंकवाद के कृत्यों का समर्थन करने का संदेह है।
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने शुक्रवार को वह विधेयक पारित कर दिया जो 9/11 हमले के पीड़ितों एवं उनके संबंधियों को अमेरिका के खिलाफ आतंकवाद के कृत्यों का समर्थन करने के मामले में संदिग्ध विदेशी सरकारों के खिलाफ मुकदमा करने की अनुमति देता है।
‘जस्टिस अगेंस्ट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म एक्ट’ नाम के इस विधेयक को अमेरिकी संसद ने ध्वनिमत से पारित किया। यह विधेयक अमेरिकी संसद में चार महीने पहले पेश हुआ था। सऊदी अरब की सरकार ने इस विधेयक के पारित होने पर कड़ा विरोध जताया है। बता दें कि 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों में शामिल 19 विमान अपहर्ताओं में से 15 अपहर्ता सऊदी अरब से ताल्लुक रखते थे।
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9/11 की बरसी से ठीक पहले अमेरिकी संसद से यह विधेयक पास होने के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास चला गया है। व्हाइट हाउस ने इस कदम के विरोध का संकेत दिया है क्योंकि इससे देशों को छूट का वह सिद्धांत समाप्त हो जाएगा जिसके तहत देशों के खिलाफ दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
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अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने शुक्रवार को वह विधेयक पारित कर दिया जो 9/11 हमले के पीड़ितों एवं उनके संबंधियों को अमेरिका के खिलाफ आतंकवाद के कृत्यों का समर्थन करने के मामले में संदिग्ध विदेशी सरकारों के खिलाफ मुकदमा करने की अनुमति देता है।
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‘जस्टिस अगेंस्ट स्पॉन्सर्स ऑफ टेररिज्म एक्ट’ नाम के इस विधेयक को अमेरिकी संसद ने ध्वनिमत से पारित किया। यह विधेयक अमेरिकी संसद में चार महीने पहले पेश हुआ था। सऊदी अरब की सरकार ने इस विधेयक के पारित होने पर कड़ा विरोध जताया है। बता दें कि 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों में शामिल 19 विमान अपहर्ताओं में से 15 अपहर्ता सऊदी अरब से ताल्लुक रखते थे।
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9/11 की बरसी से ठीक पहले अमेरिकी संसद से यह विधेयक पास होने के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास चला गया है। व्हाइट हाउस ने इस कदम के विरोध का संकेत दिया है क्योंकि इससे देशों को छूट का वह सिद्धांत समाप्त हो जाएगा जिसके तहत देशों के खिलाफ दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।