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अमेरिकी प्रस्ताव पर भारत ने किया श्रीलंका के खिलाफ वोट
बीबीसी
Updated Thu, 21 Mar 2013 05:29 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंकाई गृह युद्ध के दौरान मानवाधिकारों के हनन से जुड़े अमरीकी प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया है।
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इस प्रस्ताव में श्रीलंका से कहा गया है कि वो अपने यहां गृह युद्ध के अंतिम चरण में हुए मानवाधिकारों के गंभीर हनन की जांच करे।
प्रस्ताव के समर्थन में 25 वोट पड़े जबकि विरोध में 13 वोट। 8 सदस्य मतदान से गैर मौजूद रहे।
भारत ने भी इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट डाला। भारत ने पड़ोसी श्रीलंका से कहा है कि वो मानवाधिकारों के हनन के मामलों की “स्वतंत्र और विश्वसनीय” जांच कराए।
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भारत में इस मुद्दे पर घरेलू राजनीति खासी गर्म रही है। यूपीए की एक अहम सहयोगी पार्टी डीएमके ने इसी मुद्दे पर सरकार से अपने मंत्रियों को हटा लिया। डीएमके चाहती थी कि भारत इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करे।
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श्रीलंका का विरोध
श्रीलंका सरकार इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में मतदान से पहले श्रीलंकाई दूत ने कहा कि इस प्रस्ताव से श्रीलंका में जारी मेलमिलाप की प्रक्रिया प्रभावित होगी।
श्रीलंका के बयान में कहा गया, “सच्चाई ये है कि मानवाधिकार परिषद में मतदान किसी विशेष मुद्दे के आधार पर नहीं बल्कि रणनीतिक गठबंधनों और उन देशों की घरेलू राजनीति से जुड़े मुद्दे के आधार पर हो रही है जिनका इस प्रस्ताव से कोई लेना देना नहीं है।”
संवाददाताओं का कहना है कि मानवाधिकारों के मुद्दे के प्रति श्रीलंका के रुख से अमरीकी सरकार नाराज है।
श्रीलंकाई सेना ने 2009 में तमिल विद्रोहियों को हरा कर श्रीलंका में 26 साल से चल रहे गृह युद्ध का खात्मा किया। लेकिन इस गृह युद्ध का अंतिम चरण विवादस्पद रहा है।
उस दौरान तमिलविद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना, दोनों पर ही मानवाधिकारों के गंभीर हनन के आरोप लगते हैं।
कोलंबो में प्रदर्शन
अमरीका मानता है कि श्रीलंका की सरकार मानवाधिकारों का हनन करने वाले सैन्य बलों को के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है।
उधर श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में सरकार समर्थक कार्यकर्ताओं ने अमरीकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया है। श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के सरकारी निवास के पास स्थित अमरीकी दूतावास के बाहर सैकड़ों प्रदर्शकारियों ने यातायात को ठप कर दिया।
प्रदर्शकारियों ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने हाथों में बैनर उठाए हुए थे जिनमें से कइयों पर इन दोनों नेताओं के लिए अपशब्द लिखे थे।