आतंकवाद को शह देने वाले देशों को बनाया जाए जिम्मेदार: भारत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों को जिम्मेदार बनाने का मुद्दा उठाया है। भारत ने दो टूक कहा है कि ऐसे देश जो आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वालों को पनाह देते हैं। उनको जिम्मेदार बनाने की जरूरत है।
भारत ने इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र सम्मेलन को (सीसीआईटी) को जल्द से जल्द अपनाने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद निरोधी रणनीति की पांचवी समीक्षा के मौके पर यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कोई भी बहस आतंकवादी की गतिविधियों को जायज नहीं ठहरा सकती। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म, औचित्य, राजनीतिक उद्देश्य और तर्क आतंकवाद को जायज नहीं ठहरा सकता। उन्होंने कहा कि आतंकवाद दुनियाभर में फैल रहा है और निर्दोंष लोगों की जानें जा रही हैं।
कोई सिर्फ एक देश इससे ग्रस्त नहीं है। वहीं पीड़ित भी कोई एक धर्म से संबंधित नहीं हैं। अकबरुद्दीन ने सीसीआईटी के अधूरे एजेंडे को लेकर निराशा जताते हुए कहा कि भारत इसके ज्यादा प्रस्तावों को लेकर सहमत है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आतंकवाद से मुकाबले के लिए सीसीआईटी को अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अगर सर्वसम्मति बनेगी तो आतंकवाद से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्ता जाहिर होगी। गौरतलब है कि आतंकवाद से मुकाबले के लिए कानूनी ढांचे को बनाने के लिए भारत ने 1996 में सीसीआईटी का मसौदा को लाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं कर पाए, क्योंकि कई देशों ने इसे लेकर आतंकवाद की परिभाषा को लेकर पेंच फंसा दिया है।
आतंकवाद से शिक्षा और सोशल मीडिया के जरिए लड़ें : यूएन प्रमुख
संयुक्त राष्ट्र की 193 सदस्यीय महासभा की एक रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून ने कहा कि अब आतंकवाद का स्वरूप बदल रहा है। सोशल मीडिया के जरिए कट्टरता को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसको रोकने के लिए उपाय उठाना जरूरी है।
उन्होंने अपनी रिपोर्ट में युवाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा के मौकों को बढ़ावा देने और मानवाधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया।
बान ने लिखा है, हमें पता लगाना होगा कि आखिर क्यों कुछ व्यक्ति हिंसक कट्टर समूहों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।