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डोनाल्ड ट्रंप के ऑर्डर हुए लीक, अब भारतीयों पर प्रतिबंध की बारी?

Mon, 30 Jan 2017 03:04 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jan 2017 03:04 PM IST
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Trump’s forthcoming executive draft order leaked, Indian Techies Could Face Tough Time
- फोटो : getty

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एच1बी वीजा को लेकर काफी सख्त हैं। ऐसे में एच1बी के जरिए अमेरिका में जाने वाले भारतीय प्रोफेशनल के लिए ट्रंप नई मुसीबत लेकर आ सकते हैं। गौरतलब है कि भारत की ज्यादातर आईटी कंपनियां अपने एंप्लॉयीज को एच1बी वीजा के जरिए ही अमेरिका भेजती हैं। अब खबर है कि ट्रंप आगे चलकर जिन फैसलों पर अमल करने वाले हैं उनका ड्राफ्ट ऑर्डर लीक हो गया है। 

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समाचार वेबसाइट vox.com के मुताबिक ट्रंप के चार ड्राफ्ट ऑर्डर लीक हुए हैं। लीक ड्रॉफ्ट ऑर्डर में खुलासा हुआ है कि ट्रंप आगे चलकर कुछ ऐसे फैसले लेने वाले हैं जिनसे भारतीय आईटी सेक्टर को काफी परेशानी हो सकती है। 
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vox.com के मुताबिक ट्रंप अपने अगले कार्यकारी आदेश में 'कानूनी आव्रजन' को कम करने का आदेश दे सकते हैं। यह लीक हुए ड्राफ्ट ऑर्डर में से एक है। इसमें कहा गया है कि कानूनी तौर पर अमेरिका आने वालों की संख्या घटाई जाएगी।
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ट्रंप का मानना है कि ऐसा करने से अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। गौरतलब है कि एच1बी वीजा के जरिए बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका जाते हैं। यदि ट्रंप 'कानूनी आव्रजन' को कम करते हैं तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान भारतीयों को होगा।

ड्रॉफ्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी छात्रों की कड़ी निगरानी की जाएगी और एच-1बी वीजाधारकों को काम पर रखने वाली कंपनियों की जांच होगी। ट्रंप ओबामा सरकार के उस फैसले को भी पलटने का सोच रहे हैं जिसमें उन्होंने एच-1बी वीजा धारकों की पत्नियों को अमेरिका में काम करने का अधिकार दिया था।

एच-1बी पर है ट्रंप की नजर

Trump’s forthcoming executive draft order leaked, Indian Techies Could Face Tough Time
डोनल्ड ट्रंप - फोटो : WWE

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका का राष्ट्रपति बनते ही साइबर सिटी की आईटी-आईटीईएस कंपनियों में सन्नाटा छा गया है। अब ट्रंप आउटसोर्सिंग को लेकर किस प्रकार का रुख अख्तियार करेंगे, इसे लेकर संशय और दुविधा का माहौल है।

यही कारण है कि यहां की हर आईटी-आईटीईएस कंपनियों ने 31 मार्च तक अपने नए प्लान को होल्ड पर डाल दिया है। साथ ही हायरिंग को पूरी तरह से रोक दिया गया है। हायरिंग रुकने का असर कैंपस प्लेसमेंट पर भी पड़ेगा। फिलहाल यह सेक्टर वेट एंड वॉच की स्थिति में आ चुका है।

राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने आउटसोर्सिंग को लेकर काफी सख्त रवैया अपना रखा था। अब वह राष्ट्रपति बन चुके हैं, ऐसे में कंपनियों की नजर उनके रुख पर टिकी हुई है। वह स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ाने को लेकर वहां की जनता से वादा कर चुके हैं। माना जा रहा है कि वह अब इसे अमल में लाएंगे।

एच-1बी एक प्रोफेशनल वीजा है, जो लोगों को अमेरिका की कंपनियों में तीन साल तक काम करने की इजाजत देता है। इसका अगले तीन साल के लिए नवीनीकरण भी हो जाता है, मगर ट्रंप इसमें भारी कटौती करने जा रहे हैं। आईटी कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे में वह अपने क्लाइंट को खो देंगे।

'देशभर के आईटी सेक्टर में संशय का माहौल'

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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : REUTERS

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से साइबर सिटी ही नहीं, देशभर के आईटी सेक्टर में संशय का माहौल है। 31 मार्च तक अपने यहां हायरिंग से लेकर इंक्रीमेंट तक को रोक दिया है। वह आउटसोर्सिंग व एच1बी वीजा पर ट्रंप के रुख का इंतजार कर रही हैं। अगर इस पर उनका तेवर सख्त हुआ, तो आईटी सेक्टर को काफी परेशानी हो सकती है। 

आपको बता दें कि ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर पूरी दुनिया में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया है। दरअसल ट्रंप ने सात मुस्लिम बाहुल्य देश के अप्रवासियों के अमेरिका आने पर रोक लगा दी।

ट्रंप के इस आदेश के तहत इराक, सीरिया, ईरान, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन के लोगों की गहन जांच के बाद ही उन्हें अमेरिका में प्रवेश मिल सकता है। वहीं, ट्रंप के इस आदेश की अमेरिका समेत दुनिया भर में तीखी आलोचना हो रही है।

187 गूगल कर्मचारी भी होंगे प्रभावित

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भारत में जन्मे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने ट्रंप के विवादित आव्रजन आदेश की निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे दुनियाभर की प्रतिभाओं को अमेरिका पहुंचने में रुकावटें पैदा हो जाएंगी। गूगल ने विदेश यात्रा पर गए अपने 100 कर्मचारियों को अमेरिका लौटने का आदेश दिया है, जो इस फैसले से प्रभावित होंगे।

स्टाफ को भेजे ई-मेल में पिचाई ने कहा कि सात मुस्लिम-बहुल देशों के नागरिकों पर अमेरिकी प्रतिबंध के फैसले से कम से कम 187 गूगल कर्मचारी प्रभावित होंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘हम इस फैसले और ऐसे किसी भी प्रस्ताव से पड़ने वाले प्रभाव से परेशान हैं जिससे गूगल के कर्मचारियों और उनके परिवारों या दुनियाभर के प्रतिभाशाली लोगों को अमेरिका पहुंचने में बाधा आए।’ 

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