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सीपीईसी के जरिए चीन अफ्रीका में चाहता है सैन्य अड्डे, पाक से जोड़ेगा बंदरगाह
Sat, 09 Mar 2019 06:06 AM IST
गौरव द्विवेदी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Sat, 09 Mar 2019 06:06 AM IST
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चीन
- फोटो : SELF
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चीन चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के जरिये अफ्रीका में स्थायी सैन्य उपस्थिति चाहता है और साथ ही वह ऐसे बंदरगाहों की तलाश में हो सकता है, जो दक्षिणी पाकिस्तान के बंदरगाहों से जुड़ सकें। एक शीर्ष अमेरिकी कमांडर ने यह दावा किया है।
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सीपीईसी को वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) की ‘धमनी’ बताते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल जोसेफ वोटल ने कहा, निश्चित रूप से इस परियोजना के विकास के कारण उस क्षेत्र में चीनी प्रभाव है। हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘जिस प्रकार वह (चीन) उस क्षेत्र में जमीन पर इतनी बड़ी परियोजना विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद वह समुद्री रास्तों को भी जोड़ने का प्रयास करेंगे। वह एएफआरआईसीओएम (अमेरिका अफ्रीका कमांड) के ऐसे बंदरगाहों की तलाश करेंगे, जो दक्षिणी पाकिस्तान के बंदरगाहों से जुड़ सकें। हमें यह समझने की कोशिश करनी होगी कि चीन समुद्री सैन्य गतिविधियों को बढ़ा सकता है। वह वहां अपनी सेना की उपस्थिति स्थायी करना चाहेगा।
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... तो जिबूती के अलावा भी बन सकते हैं चीनी मिलिट्री बेस
कमांडर ने चिंता जताते हुए कहा, ‘अफ्रीका ही वह एकमात्र जगह है जहां चीन का मिलिट्री बेस पहले से मौजूद है। जिबूती पहला विदेशी चीनी बेस है। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मुझे विश्वास नहीं है कि यह अंतिम होगा। क्योंकि वह दूसरे क्षेत्रों विशेष तौर पर बंदरगाहों पर नजर गढ़ाए हुए हैं। वह वहां बुनियादी ढांचों, बंदरगाहों, सड़कों, पुलों का निर्माण कर सकते हैं। दरअसल, वह खनिज संपदा से भरपूर अफ्रीकी देशों पर पहुंच बनाना चाहता है।’
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बीआरआई पर अगले माह होगी दूसरी वैश्विक बैठक : चीन
चीन अगले महीने अपनी महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना पर दूसरी वैश्विक बैठक की मेजबानी करेगा। चीन के विदेश मंत्री वांग ने कहा कि यह बैठक बहुत बड़े स्तर की होगी। वांग ने मीडिया से कहा, ‘अगले महीने की बैठक में भाग लेने वाले देशों और सरकार के प्रमुखों की संख्या पिछले बेल्ट एंड रोड फोरम (बीआरएफ) से बहुत अधिक होगी। यह बहुत बड़ी बैठक होगी, जिसमें 100 से अधिक देशों के हजारों प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।’