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चार दशक में 10 गुना बढ़े मोटापे का शिकार बच्चे
एजेंसी/ वाशिंगटन
Updated Sun, 15 Oct 2017 05:10 AM IST
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मोटापा अब अच्छे खानपान का नतीजा नहीं रहा, बल्कि पिछले एक दशक में हुए शोध यह साबित कर चुके हैं कि यह एक बड़ी बीमारी है, जो कई दूसरे रोगों को जन्म देती है।
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अब एक नया अध्ययन बताता है कि पिछले चालीस वर्षों के भीतर 18 साल तक के बच्चों में मोटापे के स्तर में दस गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। भारत में ऐसे बच्चों की संख्या किसी गुब्बारे की तरह बढ़ती जा रही है, जबकि चीन भी इसमें पीछे नहीं है। मेडिकल जर्नल लांसेट में प्रकाशित इस शोध में 200 देशों पर अध्ययन किया गया है।
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वर्ल्ड ओबेसिटी डे पर जारी इस शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 तक मोटापे के कारण पैदा होने वाली बीमारियों पर पूरी दुनिया को 920 अरब पाउंड से अधिक रकम खर्च करनी पड़ेगी। रिपोर्ट के मुताबिक अकेले ब्रिटेन में पांच से नौ साल की आयु के प्रत्येक दस बच्चों में से एक बच्चा मोटा है। हालांकि ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों में मोटापे की दर अब स्थिर हो चुकी है लेकिन विश्व के अन्य विकसित और विकासशील देशों में यह खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है।
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इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन से शोधकर्ताओं द्वारा हुए इस शोध में बताया गया है कि वर्तमान में विकासशील देशों में बिक रहे सस्ते खाद्य पदार्थों के कारण यह मोटापा और भी अधिक बढ़ रहा है क्योंकि इनमें मोटापा बढ़ाने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।
भारत और चीन में मोटापा बढ़ाने वाली खाद्य वस्तुओं में शुगर और वसा का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए यहां किसी गुब्बारे की तरह बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने आशंका जाहिर की है कि यदि इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो कम वजन वाले बच्चों की तादाद से अधिक संख्या मोटे बच्चों की होगी।
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मेडिकल जर्नल लांसेट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि इसी तरह से मोटापा बढ़ता रहा तो दुनिया में कम वजन वाले बच्चों की संख्या से अधिक मोटे बच्चों की आबादी हो जाएगी। इन हालातों में डायबिटीज, कॉलेस्ट्रॉल, तनाव और अवसाद जैसी कई बीमारियां बड़ी तेजी से पैर पसारेंगी। शोधकर्ताओं ने मोटापा बढ़ने का एक कारण बच्चों द्वारा शारीरिक परिश्रम में कमी आना भी है।