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कंसास में जान गंवाने वाले भारतीय इंजीनियर की पत्नी ने कहा- एक शख्स की वजह से हमारे सपने अधूरे रह गए
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 05 May 2018 03:10 PM IST
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Srinivas Kuchibhotla
- फोटो : social media
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अमेरिका में भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचिभोतला और उनके दोस्त को 52 साल के अमेरिकी नौसेना अधिकारी एडम पुरिंटोन ने नस्लीय नफरत की वजह से कंसास में गोली मार दी थी। इस गोलीबारी में श्रीनिवास की मौत हो गई थी जबकि उनका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया था। उनकी पत्नी सुनैना दुमाला ने पति की मौत के बाद कोर्ट में अपने बयान दर्ज करवाए थे। हम आपकों बताते हैं कि कोर्ट में सुनैना ने क्या कहा था-
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कोर्ट में सुनैना ने कहा कि मैं श्रीनिवास कुचिभोतला की पत्नी हूं। हम दोनों ही भारत से हैं और यहां मास्टर डिग्री की पढ़ाई करने के लिए आए थे। मेरी अपने पति से मुलाकात अमेरिका की यूनिवर्सिटी में ऐप्लीकेशन प्रक्रिया के दौरान हुई थी। वह शुरुआती दिन से ही मेरे सपोर्ट सिस्टम थे। वह मुझे विदेश और इस संस्कृति में ढालने की कोशिश कर रहे थे। 6 साल तक डेट करने के बाद हमने साल 2012 के अक्टूबर में शादी कर ली थी और हमने एक अच्छी जिंदगी जीने के सपने देखे थे।
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सुनैना ने कहा कि जनवरी 2014 में कंसास के ओलाथे में अपने अच्छे भविष्य के साथ हम रहने के लिए आ गए। यहां आने के कुछ ही समय बाद हमें अपने सपनों का घर मिल गया। हमारा सपना भी परिवार को आगे बढ़ाकर बच्चों को पढ़ाने का था। हालांकि एक शख्स की वजह से हमारे सारे सपने छोटे हो गए। 22 फरवरी 2017 मेरी जिंदगी का सबसे बदतर दिन था जिसे कि मैं एक सामान्य दिन समझ रही थी। हम सुबह काम के लिए निकले और डिनर के लिए घर पहुंचने का वादा किया।
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दाम्याल ने आगे कहा कि मैं श्रीनू का इंतजार कर रही थी और तब परेशान हो गई जब उसका फोन नहीं लगा। मेरे एक दोस्त द्वारा शेयर किए गए फेसबुक पोस्ट के जरिए मेरी चिंता और बढ़ गई। मेरी उम्मीद उस समय खत्म हो गई जब दरवाजे पर पुलिस ने खटखटाया। उन्होंने मुझे बैठने के लिए कहा और मैं उनके बारे में जानने के लिए उत्सुक हो गई। उन्होंने मुझसे मेरा, श्रीनू का नाम और जन्म तिथि पूछी। उन्होंने कुछ ऐसा सबताया जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया। मुझे उनकी बात पर विश्वास नहीं हुआ और मैं प्रार्थना करने लगी कि वह अपने शब्द वापस ले लें।
सुनैना ने बताया कि अचानक मुझे लगा कि मेरी जिंदगी का कोई मतलब नहीं है क्योंकि मेरे पति कि मौत हो चुकी है। यह दर्द मेरे लिए असहनीय था। 23 फरवरी की दोपहर को मुझे पुलिस से पता चला कि मेरे पति को नस्लीय नफरत की वजह से मारा गया था। मेरे श्रीनू ने कभी किसी को दुख नहीं पहुंचाया था। वह हमेशा दूसरों से प्यार और उनकी इज्जत करता था। मगर उसे नफरत की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी। मुझे उम्मीद है कि जेल में बिताए जाने वाले अपने वर्षों के दौरान एक दिन तुम्हें अपनी गलती का अहसास होगा और फिर तुम इसका प्रायश्चित करोगे। हमें एक दूसरे को समझने के साथ ही प्यार करना चाहिए। श्रीनू को मारने से मेरे अंदर पैदा हुए खालीपन को सजा भर नहीं सकती लेकिन इससे समाज में एक कड़ा संदेश जरूर जाएगा।