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'तालिबान के हमले से डरी नहीं हूं'
Updated Sun, 14 Jul 2013 11:12 AM IST
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पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने पर चरमपंथियों की गोलियों का शिकार बनी मलाला युसुफ़जई ने अपने 16वें जन्मदिन पर संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया।
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संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मलाला ने कहा कि वो हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार के लिए बात करने आई हैं।
पिछले साल अक्टूबर में पाकिस्तान की स्वात घाटी में गोली मारे जाने के बाद से मलाला का ये पहला सार्वजनिक संबोधन था।
तालिबान के हमले के बाद मलाला को इलाज के लिए इंग्लैंड लाया गया था और अब वह बर्मिंघम में रहती हैं।
किताब और पेन
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में युवाओं के एक विशेष सत्र में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून और दुनिया भर से आए 500 से ज्यादा छात्र-छात्राएं मलाला को सुनने के लिए मौजूद थे।
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मलाला ने कहा वह बहुत-सी लड़कियों में से एक हैं जिन्होंने उनके लिए आवाज़ उठाई है जो अपनी बात खुद नहीं रख सकते।
गुलाबी रंग का स्कार्फ़ पहने मलाला ने सभी बच्चों के लिए मुफ़्त अनिवार्य शिक्षा का आह्वान किया और कहा कि सिर्फ शिक्षा के माध्यम से ही जीवन स्तर सुधारा जा सकता है।
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मलाला ने कहा कि तालिबान के हमले से उनकी ज़िंदगी में कुछ नहीं बदला सिवाय इसके कि “कमज़ोरी, डर और नाउम्मीदी ख़त्म हो गई।”
उन्होंने कहा, “चरमपंथी किताब और कलम से डरते थे और अब भी डरते हैं। वह महिलाओं से भी डरते हैं।”
उन्होंने वैश्विक शक्तियों का आह्वान किया कि वे नीतियां शांति के पक्ष में बनाएं।
मलाला ने कहा कि वह महिला अधिकारों के लिए इसलिए संघर्ष कर रही हैं क्योंकि “उन्हीं को सबसे ज़्यादा भुगतना पड़ता है।”
उन्होंने कहा, “चलिए हम अपनी किताबें और पेन उठा लेते हैं। यही सबसे ताकतवर हथियार हैं। एक बच्चा, एक शिक्षक, एक पेन और एक किताब दुनिया को बदल सकते हैं। शिक्षा ही एकमात्र हल है।”
'हमारा हीरो'
पूर्व ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने सत्र का शुरुआती भाषण दिया।
उन्होंने वहां मौजूद युवाओं को कहा कि वही “नई महाशक्ति” हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी सत्र को संबोधित किया।
उन्होंने मलाला को “हमारा हीरो” और “हमारा चैंपियन” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा, “वह हमसे हमारे वायदे पूरे करने को कह रही है। युवाओं पर ध्यान देने और शिक्षा को पहली प्राथमिकता बनाने को कह रही है।”
मलाला को महिला शिक्षा के मुद्दे पर दुनिया का ध्यान खींचने का श्रेय दिया जाता है।