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क्या आप स्मार्ट सिटी में रहना चाहेंगे?

Fri, 23 Aug 2013 07:22 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Fri, 23 Aug 2013 07:22 PM IST
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अपनी कल्पनाओं के स्मार्ट शहर में रहने के बारे में आपका क्या ख्याल है? एक ऐसा शहर जो आपकी जरूरतों को अपने आप पूरा करे।
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आबू धाबी में मसदर से लेकर दक्षिण कोरिया के सोंगदो तक दुनियाभर में ऐसे शहरों के निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। हो सकता है कि आप जिस शहर में रह रहे हैं वो भी पूरी तरह स्मार्ट शहर में बदलने की तैयारी में हो।

भविष्य के शहर में बिजली के ग्रिड से लेकर सीवर पाइप, सड़कें, कारें और इमारतें हर चीज एक एक नेटवर्क से जुड़ी होगी। इमारत अपने आप बिजली बंद करेगी, स्वचालित कारें खुद अपने लिए पार्किंग ढूंढेंगी और यहां तक कि कूड़ादान भी स्मार्ट होगा।
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लेकिन सवाल यह है कि हम इस स्मार्ट भविष्य में कैसे पहुंच सकते हैं? शहर में हर इमारत, बिजली के खंभे और पाइप पर लगे सेंसरों पर कौन निगरानी रखेगा और कौन उन्हें नियंत्रित करेगा। और क्या हम ऐसा क्लिक करें भविष्य चाहते हैं?
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हर समस्या का समाधान

आईबीएम, सीमन्स, क्लिक करें माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और सिस्को जैसी तकनीकी कंपनियां शहर में जल के रिसाव से लेकर वायु प्रदूषण और ट्रैफिक जाम तक हर समस्या को सुलझाने के लिए सॉफ्टवेयर बेच रहे हैं।

सिंगापुर, स्टॉकहोम और कैलिफोर्निया में आईबीएम यातायात के आंकड़े जुटा रही है और जाम लगने के बारे में एक घंटे पहले ही भविष्यवाणी कर रही है।

रियो में कंपनी ने नासा की तरह एक कंट्रोल रूम बना रखा है जहाँ स्क्रीनें पूरे शहर में लगे संवेदकों और कैमरों से आंकड़े जुटाती हैं।

आईबीएम के पास कुल मिलाकर दुनियाभर में 2500 स्मार्ट शहरों की परियोजनाएं हैं। कंपनी का कहना है कि वो स्मार्ट शहर की अपनी परियोजनाओं में लोगों को साथ लेकर चलती है।

डबलिन में कंपनी ने सिटी काउंसिल के साथ मिलकर पार्कया ऐप्स तैयार किया है जो लोगों को शहर में पार्किंग की जगह ढूंढने में मदद करता है।

अमरीकी शहर डुबुक में कंपनी स्मार्ट वाटर मीटर बना रही है और कम्युनिटी पोर्टल के माध्यम से लोगों को डेटा उपलब्ध करा रही है ताकि वे पानी की अपनी खपत को देख सकें।

लोगों की जरुरत के मुताबिक


आईबीएम रिसर्च की निदेशक डॉक्टर लीसा एमिनी कहती हैं, "हमें एक शहर विकसित करने की जरूरत है जो लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। पहले यह संभव नहीं था क्योंकि तब ज्यादा सूचना उपलब्ध नहीं थीं।"

चीन दर्जनों ऐसे नए शहर बसा रहा है जिसमें रियो की तरह कंट्रोल रूम स्थापित किए जा रहे हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर के निदेशक और स्मार्ट सिटीजः बिग डेटा, सिविक हैकर्स, एंड द क्वेस्ट फॉर ए न्यू यूटोपिया के लेखक एंथनी टाउनसेंड इस पर चिंता जताते हैं।

उन्होंने कहा, "रियो में कंट्रोल रूम की स्थापना एक प्रगतिवादी मेयर ने की थी लेकिन कमान किसी बुरे आदमी के हाथ में आ जाए तो क्या होगा। क्या हम ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं जिनका दुरूपयोग हो सकता है?"

स्मार्ट शहर की कहानी में एक और अध्याय है और इसे ऐप्स, डीआईवाई सेंसर, क्लिक करें स्मार्टफोन तथा वेब इस्तेमाल करने वाले लोग लिख रहे है।

डोंट फ्लश मी एक छोटा डीआईवाई सेंसर और ऐप है जो अकेले दम पर क्लिक करें न्यूयॉर्क की पानी से जुड़ी समस्याओं को सुलझा रहा है।

इसी तरह सेंसर नेटवर्क एग लोगों को शहर की समस्याओं के प्रति सचेत कर रहा है। शोधों के मुताबिक हर साल 20 लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के कारण होती है और शहरों में बढ़ती भीड़भाड़ के कारण इस समस्या के और बदतर होने की संभावना है।

एग लोगों को सस्ते सेंसर बेचकर वायु की गुणवत्ता के बारे में आंकड़े जुटा रहा है। लोग इन सेंसरों को अपने घरों के बाहर लगाकर हवा में मौजूद ग्रीन हाउस गैसों, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनो ऑक्साइड के स्तर का पता लगा सकते हैं। इन आंकड़ों को इंटरनेट पर भेजा जाता है जहां इन्हें एक नक्शे से जोड़कर दुनियाभर में प्रदूषण के स्तर को दिखाया जाता है।

क्या स्थितियाँ सुधरेंगी

लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में सेंटर फॉर एडवांस स्पेशिएल एनालिसिस के निदेशक हडसन स्मिथ का कहना है कि शहरों की स्थिति सुधारने में लोगों की भागीदारी बेहद अहम है।

उनकी टीम में लंदन को स्मार्ट बनाने के लिए एक सिटी डैशबोर्ड विकसित किया है। रियो के कंट्रोल रूम की तरह डैशबोर्ड प्रदूषण, मौसम और नदी के जल स्तर से संबधित आंकड़ों को समाहित करता है। साथ ही यह ट्विटर और शहर की खुशहाली पर भी नजर रखता है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि शहरों को स्मार्ट बनने की ज़रूरत है। अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक दुनिया की 75 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करेगी जिससे यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर जबर्दस्त दबाव होगा।

सच्चाई यह है कि दुनियाभर में इस समय जो स्मार्ट शहर बन रहे हैं वो बहुत छोटे हैं। हडसन स्मिथ ने कहा कि इन शहरों के बारे में काफी चर्चा हो रही है लेकिन उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे वास्तव में लोगों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है।

लेकिन उन्होंने साथ ही उम्मीद जताई कि अगले पांच सालों में चीजें स्मार्ट हो जाएंगी। तब शहर का डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रेनों और सड़कों की तरह अहम हो जाएगा।


स्मार्ट लोग स्मार्ट शहर

रिसर्च फर्म फैब्रिका के मुख्य कार्यकारी डैन हिल का कहना है कि इस डेटा का नियंत्रण किसी बड़ी कंपनी के हाथ में रहेगा या लोगों के हाथों में, यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि शहरों को मूलरूप से किस उद्देश्य से विकसित किया गया था।

उन्होंने कहा, "हम सुगमता के लिए शहर नहीं बनाते हैं, हम संस्कृति, व्यापार और समुदाय के लिए शहर बनाते हैं और ये सभी चीजें सुगम नहीं हैं।"

डैन हिल ने कहा कि शहरों कि बेहतर बनाने के चक्कर में उनकी सबसे बड़ी धरोधर को खो सकते हैं। उन्होंने कहा, "स्मार्ट लोग स्मार्ट शहर बनाते हैं।"
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