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सीआईए के पूर्व अधिकारी ने लिखा- इराक को चलाने के लिए सद्दाम ही चाहिए था

Sat, 17 Dec 2016 05:32 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 17 Dec 2016 05:32 PM IST
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 Saddam Hussein Should Have Been Left To Run Iraq, Says CIA Officer Who Interrogated Him

मध्यपूर्व  में फैली अशांति और हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है? इराक-सीरिया के हालात के लिए गुनहगार कौन है? अगर आज इराक में सद्दाम की सत्ता होती तो क्या आईएसआईएस जैसे खूंखार आतंकी संगठन का खड़ा होना संभव था? और क्या अमेरिका ने इराक पर हमला और सद्दाम को मौत के घाट उतारकर बड़ी भूल की?

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इन सवालों के जवाब अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के पूर्व अधिकारी जॉन निक्सन ने अपनी नई किताब में दिए हैं। निक्सन की किताब जल्द दी बुक स्टॉल्स पर उपलब्ध होगी, लेकिन उनकी इस किताब के कुछ अंश टाइम मैगजीन ने छापे हैं, जिनको पढ़कर लगता है कि इराक को चलाने और पूरे मध्यपूर्व में स्थिरता कायम रखने के लिए तानाशाह सद्दाम हुसैन की ही जरूरत थी। गजब की बात यह है कि निक्सन की इस बात से अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इत्तेफाक रखते हैं। हालांकि दोनों में वैचारिक आधार पर दूर-दूर तक मतभेद हैं।
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निक्सन ने अपनी किताब में उस हकीकत को उकेरा है, जिसे उन्होंने खुद जिया है। यानी निक्सन ने उस वक्त का जिक्र किताब में किया है जब तानाशाह सद्दाम को अमेरिका की गठबंधन वाली सेना गिरफ्तार कर लिया था और हिरासत में उससे अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने पूछताछ की थी। निक्सन सीआईए की उस टीम का हिस्सा थे।
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निक्सन की मानें तो किताब में सद्दाम के साथ हुई बातचीत के अंश हैं। वे व्यक्तिगत तौर पर सद्दाम को बुरा आदमी मानते हैं, लेकिन उसका सम्मान भी करते हैं क्यों कि उसकी तानाशाह सल्तनत के दौरान इराक को चलाने में कोई कठिनाई आई नहीं और उसने 23 साल तक इराक पर एकछत्र राज किया। 2003 में इराक से सद्दाम की हुकूमत खत्म करने के लिए अमेरिका ने उस पर आक्रमण कर दिया था। तब से लेकर आज तक यह मुद्दा विवास्पद बना हुआ है कि क्या सद्दाम को वहां से हटाकर अमेरिका ने सही किया? 

निक्सन ने अपनी किताब में लिखा है कि सद्दाम हुसैन ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि इराक पर कब्जा करना उसके लिए आसान नहीं होगा। दूसरी ओर अमेरिकी सरकार और विशेषज्ञों को यह काफी आसान काम लग रहा था। निक्सन ने लिखा है कि एकबार हिरासत दौरान जब उन्होंने सद्दाम से पूछताछ की तो उसने साफ कहा था कि तुम इराक पर हमला करके सफल नहीं हो पाओगे। इराक पर शासन करना आसान नहीं होगा।

सद्दाम होता तो बगदादी न होता!

 Saddam Hussein Should Have Been Left To Run Iraq, Says CIA Officer Who Interrogated Him

निक्सन के मुताबिक जब उन्होंने सद्दाम से उसकी इस बात के पीछे वजह पूछी तो उसने बताया कि तुम इसकी जुबान और भाषा नहीं जानते हो। तुम्हें इसका इतिहास भी नहीं पता है, और तुम्हें अरब का दिमाग पढ़ना भी नहीं आता है, इसलिए अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाओगे।

निक्सन की मानें तो तब वह सद्दाम की बात से सहमत नहीं थे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सद्दाम ने सही कहा था। निक्सन की मानें को टुकड़ों में बंटे समुदायों से भरे इराक को चलाने, सुन्नी कट्टरपंथियों और शिया-बाहुल्य ईरान पर नियंत्रण रखने के लिए सद्दाम जैसे क्रूर शासक की ही जरूरत है।

निक्सन ने अपनी किताब में यहां तक लिखा है कि सद्दाम की हुकूमत में इस्लामिक स्टेट (आईएसआई) जैसे आतंकी संहठन का पनपना असंभव था। ऐसा भी नहीं था कि जनता सद्दाम के खिलाफ किसी आंदोलन को खड़ा कर पाती। 

निक्सन ने किताब में बताया कि एकबार सद्दाम ने मुझसे कहा था कि मुझसे पहले इराक में बस कलह और बहसबाजियां होती थीं। मैंने ये सब खत्म करके लोगों को अपनी बातों से सहमत किया है।

'सद्दाम को अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया गया'

 Saddam Hussein Should Have Been Left To Run Iraq, Says CIA Officer Who Interrogated Him

निक्सन की बातों से कई अरब जानकार सहमत नहीं दिखाई देते हैं, वे ऐसा नहीं मानते है कि इराक क्रूर शासक के राज में महफूज हो सकता था और निर्दयी शासक के न रहते ही वहां आतंकवाद ने पैर पसारे। जानकारों की मानें तो निरंकुश सत्ता अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ऐसे तर्कों का सहारा लेती हैं।

सद्दाम ने दो दशक से ज्यादा इराक पर राज किया। इस दौरान हजारों की तादात में कुर्द, शिया और अन्य समुदायों के लोगों की हत्याएं की गईं। 2004 में इराक के स्पेशल ट्राइब्यूनल ने सद्दाम को मानवता का दोषी करार दिया था और उसे मौत की सजा भी सुनाई थी। हालांकि कई मानवाधिकार संगठन आज भी मानते है कि सद्दाम को अपना बचाव करने का मौका नहीं दिया गया और न ही उसके खिलाफ चली कानूनी प्रक्रिया ही निष्पक्ष थी।

फिलहाल इराक में तो अमेरिका पहले से मौजूद है, आने वाले दिनों में सीरिया में भी अमेरिका की बड़ी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि ओबामा और ट्रंप का मानना है कि वहां से अमेरिका दूरी ही बनाए रखे तो ही ठीक होगा।

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