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सीरिया पर रूसी प्रस्ताव से अमेरिका सशंकित

Tue, 10 Sep 2013 11:35 AM IST
Updated Tue, 10 Sep 2013 11:35 AM IST
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russian proposal on syria crisis

अमेरिका ने रूस के उस प्रस्ताव पर संशय जताया है जिसमे कहा गया था कि अमेरिका के नेतृत्व में किसी भी हमले से बचने के लिए सीरिया को अपने रासायनिक हथियार अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखते हुए उन्हें नष्ट कर देना चाहिए।

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इससे पहले रूस ने सीरिया से कहा था कि अमेरिकी सैन्य हमले से बचने के लिए उसे अपने रासायनिक हथियारों के ज़खीरे को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में रख कर और फिर उसे तबाह कर देना चाहिए।
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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लैवरोव ने कहा था कि उन्होंने ये प्रस्ताव मॉस्को में सीरियाई विदेश मंत्री वालिद मुआलेम से बातचीत में रखा था।

सीरियाई मंत्री ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है लेकिन अभी ये साफ़ नहीं है कि उन्होंने इसे मंज़ूरी दी है या नहीं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की-मून ने कहा है कि वो इस प्रस्ताव का समर्थन करते हैं लेकिन सीरिया को इसे स्वीकृति देनी होगी।

अमेरिका ने सीरियाई प्रशासन पर युद्ध अपराधों का आरोप लगाया है और उस पर हमला करने की धमकी दी है लेकिन सीरिया इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

अमेरिका की चेतावनी

इस बीच सैन्य कार्रवाई के लिए समर्थन जुटाने यूरोप पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने फिर चेतावनी दी है कि सीरिया के खिलाफ़ कोई कदम नहीं उठाना वहां उस पर हमला करने से ज़्यादा ख़तरनाक होगा।
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एक पत्रकार सम्मेलन में ये पूछे जाने पर कि सीरियाई राष्ट्रपति असद हमले को टालने के लिए क्या करें, जॉन केरी ने कहा कि इसके लिए वे अगले एक हफ़्ते में रासायनिक हथियारों का सारा ज़खीरा सौंप सकते हैं।

बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने ये साफ़ किया कि केरी ने ये बात ''सिर्फ़ कहने के लिए कही थी'' और ये गंभीर प्रस्ताव नहीं था।

लेकिन रूसी विदेश मंत्री लैवरोव ने इसके बाद सीरिया से ''अपने रासायनिक हथियार अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में सौंपने और उन्हें नष्ट करने'' की बात कही।

एक दुभाषिए की मदद से सीरियाई विदेश मंत्री ने पत्रकारों को बताया कि सीरिया ने रूसी पहल का स्वागत किया है। उन्होंने ''हमारे लोगों के खिलाफ़ अमरीकी आक्रमकता को रोकने की कोशिश के लिए'' रूस की तारीफ़ की।

सीरिया के ढाई साल से चल रहे गृह युद्ध में रूस उसका मुख्य अंतरराष्ट्रीय सहयोगी रहा है।

रूस ने न सिर्फ़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के खिलाफ़ तीन प्रस्तावों को रोका है बल्कि 21 अगस्त को दमिश्क में हुए रासायनिक हमले को सीरियाई सरकार से जोड़ने वाले सबूत को भी खारिज कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र ने पिछले महीने रासायनिक हमले की जांच के लिए दमिश्क में एक विशेषज्ञ टीम भेजी थी।

'मध्यपूर्व धमाके की कगार पर'

इस बीच सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने एक अमेरिकी टीवी नेटवर्क के साथ इंटरव्यू में अमेरिका को चेतावनी दी कि वो सीरिया में हस्तक्षेप न करे। असद ने ये भी कहा कि मध्य पूर्व ''धमाके की कगार'' पर है।

असद ने कहा, "अगर आप आतंकवादियों से समझदारी से नहीं निपटेंगे तो आपको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके गंभीर नतीजे होंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "आपको किसी भी बात के लिए तैयार रहना होगा। इस क्षेत्र में सिर्फ़ सीरियाई सरकार ही अकेला पक्ष नहीं है। यहां अलग-अलग दल, गुट और विचारधाराएं हैं।"


असद सीरियाई विद्रोहियों को ''आतंकवादी'' कहते हैं और उन्होंने अकसर कहा है कि विद्रोहियों का अल-क़ायदा से संबंध है।

राष्ट्रपति ने रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल के आरोप से भी इनकार किया और कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उनकी सरकार इस हमले के लिए ज़िम्मेदार थी।

लेकिन अमेरिका ने तुरंत असद के बयान को खारिज कर दिया।

व्हाइट हाउज़ की प्रवक्ता बर्नाडेट मीहान ने कहा, "हमें इस बात पर कोई हैरानी नहीं है कि जो व्यक्ति ज़हरीली गैस से अपने ही लोगों को मार सकता है, वो इस बारे में झूठ बोलेगा।"

इस हफ़्ते अमरीकी कांग्रेस में सीरिया पर हमले के मुद्दे पर बहस होनी है। राष्ट्रपति ओबामा हमले के लिए कांग्रेस का समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं।

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