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अमेरिका के लिए नई सुरक्षा नीति बना रहे ट्रंप ने रूस और चीन को बताया विरोधी

Tue, 19 Dec 2017 04:13 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 19 Dec 2017 04:13 PM IST
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Russia and China are anti-forces Says American president Donald Trump
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिका के लिए नई सुरक्षा नीति बना रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और चीन को उनके देश के आर्थिक प्रभुत्व के लिए प्राथमिक खतरा बताया है। अपने ''अमेरिका फस्ट'' के सिद्धांत पर आधारित भाषण में ट्रंप ने पिछली सरकार की विदेश नीति की 'असफलताएं' गिनाई। ट्रंप ने पाकिस्तान की आलोचना की कि वो इस्लामी दहशतगर्दी को रोकने के लिए पूरी कोशिश नहीं कर रहा है। साथ ही उन्होंने परमाणु कार्यक्रम के लिए उत्तर कोरिया पर भी निशाना साधा।

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 वॉशिंगटन की रोनाल्ड रीगन बिल्डिंग में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह चुनौतियों का एक नया दौर है। उन्होंने दुनिया के ताकतवर देशों के प्रति पिछली अमेरिकी सरकारों के रवैये पर भी नाखुशी जताई। ट्रंप के मुताबिक रूस और चीन ''चुनौती देने वाली ताकत'' हैं लेकिन अमरीका को उनके साथ अच्छी साझेदारी बनाने की कोशिश करनी होगी। 
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अच्छी साझेदारी की कोशिश
इस भावना की मिसाल के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप ने उस वाकये का जिक्र किया जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने उन्हें फोन करके धन्यवाद दिया। ट्रंप के मुताबिक पुतिन सीआईए से मिली उस जानकारी के लिए शुक्रिया बोल रहे थे जिसमें सीआईए ने क्रेमलिन को एक कथित आतंकी हमले के बारे में आगाह किया था। हालांकि ट्रंप के भाषण से पहले छपी इस नई सुरक्षा नीति में रूस और चीन के लिए कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसमें इन्हें "सुधारवादी शक्तियां" बताया गया है। अपने भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि अमीर देशों को उनकी रक्षा में आने वाले अमेरिकी खर्च की भरपाई करनी चाहिए।

ट्रंप की नई योजना के ''चार स्तंभ''
11 महीने में तैयार हुई, 68 पेज की नई रणनीति में ''चार स्तंभ'' बताए गए हैं। इन चार स्तंभों में अपने देश की रक्षा, अमेरिकी समृद्धि को बढ़ावा देने, ताकत के इस्तेमाल से शांति लाने और अमेरिकी असर को बढ़ाना शामिल है। लेकिन आबोहवा में आ रहे बदलाव को देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना गया है। इस पर उनकी जमकर आलोचना भी हो रही है। जानकारों के मुताबिक उनके ''चार स्तंभों'' में मानवाधिकार और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों का कहीं जिक्र नहीं है। माना जा रहा है कि इस रणनीति के जरिए ट्रंप अपने चुनावी वादों की तरफ वापस लौटने की कोशिश कर रहे है।

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