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'हां, मेरे जिस्म में प्लूटोनियम है'

Sat, 17 Aug 2013 01:28 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Sat, 17 Aug 2013 01:28 PM IST
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plutonium is inside of my body

अमेरिका के डेनवर, कोलोराडो में रॉकी फ़्लैट्स परमाणु संयंत्र के पास क्रिस्टीन इवरसन का बचपन गुज़रा है।

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संयंत्र से होने वाले प्रदूषण के बारे में सालों तक किसी को पता नहीं था और लोग इसके शिकार होते रहे।

परमाणु संयंत्र के पड़ोस में ज़िंदगी पर क्रिस्टीन ने इस बारे में एक किताब 'फ़ुल बॉडी बर्डन' लिखी है।

मदर्स डे फ़ायर
रॉकी फ़्लैट्स में 38 साल के दौरान 70 हज़ार से ज़्यादा प्लूटोनियम पिट्स या ट्रिग्रर्स का उत्पादन किया गया। इन ट्रिग्रर्स को किसी भी परमाणु हथियार का दिल कहा जाता है।

रॉकी फ़्लैट्स बचपन के मेरे घर से सिर्फ़ 3 मील दूर था। उस समय यह पूरी तरह रहस्य के आवरण में घिरा हुआ था और आज भी है।

जब मैं छोटी थी तब प्लांट डाउ कैमिकल्स द्वारा चलाया जा रहा था और लोग कहते थे कि वह घर में सफ़ाई करने वाले उत्पाद बनाता है।

दरअसल कोई नहीं जानता था कि वहां क्या होता था। कर्मचारियों को इसके बारे में बात करने की इजाज़त नहीं थी और प्रेस से बहुत कम या बिल्कुल कोई जानकारी नहीं मिलती थी।
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शुरू-शुरू में लोगों को लगता था कि यह रहस्यात्मक वातावरण शीत-युद्ध की कूटनीति के चलते बनाया गया था और कई लोगों को जिनमें मेरे पिता भी शामिल थे, यह ज़रूरी लगता था।
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1970-80 में अदालत में कई मामले जाने के बाद और इस बारे में प्रेस में छपने के बाद ही लोगों को थोड़ा-बहुत पता चला।

11 मई, 1967 को मुख्य प्लूटोनियम उत्पादन संयंत्र की इमारत संख्या 771 में आग लग गई। इसे 'मदर्स डे फ़ायर' के नाम से जाना जाता है।

उस दिन जब मैं, मेरी दोनों बहनें, भाई, मां और पिता मदर्स डे की ख़ुशियां मनाते हुए घर में शाम का नाश्ता कर रहे थे ठीक उसी समय एक रेडियोएक्टिव बादल हमारे सिर के ऊपर से गुज़र रहा था।

ग्लव्स बॉक्स से शुरू हुई यह आग प्लूटोनियम के कारण तेजी से भड़की और इतनी तेज हो गई कि इमारत की छत गलने लगी और बुलबुले की तरह उठ गई।

विश्वासघात
रॉकी फ़्लैट्स में 800 से ज़्यादा इमारतें थीं जिनमें से ज़्यादातर भूमिगत थीं। सड़क से इनका पता नहीं चलता था और यह तभी दिखती थीं जब आप हवाई जहाज़ से नीचे देखें।

इसीलिए हम लोगों को इस बारे में ज़्यादा कुछ पता नहीं था।

दुर्घटना इसी इलाके में हुई थी और कुछ ही सेकेंड में हम चेर्नोबिल जैसे हादसे का शिकार हो सकते थे।

जब मैं छोटी थी तब मुझे विश्वास था और कोलोराडो में बहुत से लोगों को यह भरोसा अब भी होगा कि इस प्लांट चलाने वाली सरकार या कंपनियां अगर हमारी ज़िंदगी या सेहत को ख़तरे में डालेंगी तो इसके बारे में हमें ज़रूर बताएंगी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

रेडियोएक्टिव प्रदूषण हमारे पड़ोस तक आ गया था लेकिन उस वक्त हमें पता नहीं था।

मैं और मेरी बहन प्लांट के चारों तरफ़ घोड़े दौड़ाते रहते थे। उस झील में तैरते थे जिसे प्लूटोनियम ने प्रदूषित कर दिया था।

प्लूटोनियम सबसे ख़तरनाक था लेकिन उसके अलावा ट्रिटेनियम, एमरिसियम, कार्बन टेट्राक्लोराइड का भी प्रदूषण था।

इसका सबसे ख़राब पहलू यह था कि हमारे माता-पिता को लगता था कि वह हमें बहुत अच्छे माहौल में पाल रहे हैं।

हमारे पास घोड़े थे, कुत्ते थे, शानदार पहाड़ी इलाका था जहां हम हमेशा बाहर खेलते रहते थे।

लेकिन वातावरण ज़हरीला था और हमें इसका पता नहीं था। यह बहुत बड़ा विश्वासघात था।

जांच
जब मैंने सोचा था कि मैं किताब लिखूंगी तो वह घोड़ों और कुत्तों के साथ खेलते हुए बड़े होने के बारे में थी।

परमाणु प्रदूषण के बारे में मुझे सही मायने में तभी पता चला जब मैं प्लांट में काम करने लगी।

हमारे पड़ोस के बहुत से लोग प्लांट में काम करते थे।

जब मैं काम करने गई तब मैं दो बच्चों वाली एक अकेली मां थी।

मैं वहां रोज़ जाती थी लेकिन मुझे इसके बारे में कुछ पता नहीं था, मेरे साथ काम करने वाले किसी को कुछ पता नहीं था।

एक दिन मैं जब घर लौटी और मैंने टीवी खोला तो मैंने देखा कि उसमें रॉकी फ़्लैट्स पर ख़बर आ रही थी।

उसमें मेरे साथ काम करने वाले बहुत से लोगों के साक्षात्कार थे। इनमें ऊर्जा विभाग के प्रबंधक मार्क सिल्वरमैन भी थे।

सिल्वरमैन ने कहा कि यहां बहुत बड़ी समस्या है। यहां 14 टन से ज़्यादा प्लूटोनियम रखा हुआ है और ज़्यादातर असुरक्षित ढंग से।

मुझे तभी पहली बार इस बारे में पता चला और मैं भौंचक्की रह गई।

तभी मैंने सोच लिया था कि मैं नौकरी छोड़ दूंगी और एक किताब लिखूंगी। लेकिन मुझे यह पता नहीं था कि इसके शोध और लेखन में 10 साल लग जाएंगे।

ऊर्जा विभाग के स्वामित्व वाले प्लांट पर 1989 में एफ़बीआई और ईपीए (पर्यावरण सुरक्षा संस्था) ने छापा मारा।

एफ़बीआई और ईपीए के सदस्यों ने एक हवाई जहाज़ से इलाके की इंफ्रारेड तस्वीरें उतारीं। इसमें प्लांट से स्थानीय आबादी के बीच जाते हुए रेडियोएक्टिव पदार्थ को सफ़ेद रंग में देखा जा सकता है।


इसके बाद दो साल तक एक ग्रैंड ज्यूरी की जांच हुई।

ज़मीन का मामला
ज्यूरी ने ऊर्जा विभाग और प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी रॉकवेल के अधिकारियों पर मामला दर्ज करने की सिफ़ारिश की थी।

लेकिन किसी भी अधिकारी पर कोई मामला नहीं चलाया गया।

ज्यूरी के सदस्य इतने नाराज़ थे कि उन्होंने अपनी एक रिपोर्ट लिखी लेकिन जज ने उसे सील कर दिया और वह आज तक सील है।

प्लांट के आस-पास रहने वाले 13,000 लोग जिनकी ज़मीन प्लूटोनियम से प्रदूषित हो गई थी, अदालत चले गए।

इसका फ़ैसला आने में बीस साल लगे और अदालत ने लोगों के हक़ में फ़ैसला दिया। हालांकि तकनीकी कारणों से ऊपरी अदालत में यह केस ख़ारिज हो गया।

ख़ास बात यह है कि यह केस प्लूटोनियम के कारण लोगों की सेहत ख़राब होने को लेकर नहीं था प्रदूषण के चलते ज़मीन के दाम गिरने के लिए किया गया था।

क्योंकि बहुत से शोधों से पता चला है कि रॉकी फ़्लैट्स के आसपास रहने वाले लोगों के शरीर में प्लूटोनियम है।

इससे किसी को थायराइड, कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं लेकिन कई बार इसके लक्षण दिखने में बहुत वक्त लग जाता है।

इसलिए कई कारणों से सेहत में नुक्सान की वजह से अदालत में मामला नहीं ले जाया जा सकता।

6000 एकड़ के इस इलाके को बाड़ लगाकर घेर दिया गया है लेकिन ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई है कि वहां जाना ख़तरनाक है। 13000 एकड़ का इलाका इतना ज़्यादा प्रदूषित है कि उसे इंसानों के लिए कभी नहीं खोला जा सकता।

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