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अमेरिका ने एशिया के लिए दी चेतावनी!

Sat, 15 Nov 2014 04:15 PM IST
Updated Sat, 15 Nov 2014 04:15 PM IST
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obama on G-20 summit 2014 brisbane

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एशियाई देशों की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी नीति का रुख साफ किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि एशिया की सुरक्षा किसी डर या धमकी पर आधारित नहीं होनी चाहिए जहां बड़े राष्ट्र छोटे देशों पर धौंस जमाते हैं।

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ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में जी-20 सम्मेलन में शिरकत करने आए ओबामा ने छात्रों से कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा पारस्परिक समझौते पर आधारित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एशिया-प्रशांत के सहयोगी देशों के प्रति अमेरिका की कटिबद्धता पर "कोई सवाल नहीं" है। जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन ब्रिसबेन में दुनिया के शीर्ष स्तर के नेता मुलाक़ात कर रहे हैं।
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दो दिनों के इस सम्मेलन में अमेरिका, चीन और रूस के नेता भी शामिल होंगे जिनका ज़ोर वैश्विक आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने पर होगा।

इस सम्मेलन में यूक्रेन संकट और इबोला के ख़तरे पर चर्चा की उम्मीद है जबकि अभियानकर्ता जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की मांग कर रहे हैं।

जी-20 में भारत के मुद्दे

obama on G-20 summit 2014 brisbane

यूएनआई के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कौशिक ने बीबीसी को बताया कि जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए सुरक्षा कारणों की वजह से मेजबान शहर ब्रिसबेन से स्थानीय लोगों को हटा दिया गया है और फिलहाल यह जगह सुनसान लग रही है।

कौशिक का कहना है कि इस सम्मेलन में भारत जिन मुद्दों पर अपनी निगाह रखेगा उनमें दुनिया की दो फ़ीसदी वृद्धि दर में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का योगदान शामिल है।

भारत बैंकों के खाते से जुड़ी स्वतः सूचना साझेदारी पर ज़ोर देगा ताकि अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले काले धन से जुड़े मसले पर जी-20 देशों के बीच आवाज उठाई जा सके।

भारत विदेश से अपने नागरिकों के रेमिंटेंस (बाहर से भेजी जाने वाली रकम) से जुड़े मुद्दे पर ज़ोर देगा जो लगभग 70 अरब डॉलर प्रतिवर्ष है और यह दुनिया में सबसे अधिक है।

भारत के मुताबिक़ बैंकों की रेमिंटेंस लागत 10 फ़ीसदी के स्तर पर पहुंच गई है जिसे कम करके 5 फ़ीसदी के स्तर पर लाना चाहिए। कौशिक कहते हैं कि इस सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है।

'जी-20 से रोजगार के मौके तलाशे जाएं'

obama on G-20 summit 2014 brisbane

इस पर दुनिया के बड़े देशों के बीच सहमति बनती दिख रही है कि ऊर्जा सुरक्षा पर काम करने वाली एक वैश्विक संस्था बनाई जाए ताकि तेल और गैस की क़ीमतें राजनीतिक हथियार के तौर इस्तेमाल न हो।

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट का कहना है कि जी-20 मंच का इस्तेमाल रोजगार के मौक़े तैयार करने, कर चोरी की पहचान करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए हो। एबट ने कहा, "ब्रिसबेन में वृद्धि और रोज़गार जैसे मुद्दे पर हमारा ज़ोर होगा।"

जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की फरवरी की बैठक में इन मुद्दों को विस्तार दिए जाने की उम्मीद है ताकि पांच सालों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में दो फीसदी की बढ़ोतरी हो सके।

मुकेश कौशिक का कहना है कि यहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पश्चिम देशों के नेताओं के निशाने पर रह सकते हैं जो रूस की सैन्य आक्रामकता को लेकर चिंता जताते रहे हैं।

हाल में रूस के राष्ट्रपति ने कहा है कि यूक्रेन में रूस की कार्रवाई के ख़िलाफ़ अमेरिका और यूरोपीय संघ ने जो प्रतिबंध लगाया है उससे न केवल रूस बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचेगी।

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