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जमा हो रहे हैं अमेरिकी नागरिकों के फ़ोन रिकॉर्ड

Fri, 07 Jun 2013 01:50 PM IST
Updated Fri, 07 Jun 2013 01:50 PM IST
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nsa is recording phones of americans

अमेरिका में अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी(एनएसए) लाखों अमेरिकी नागिरकों के फ़ोन रिकॉर्ड को जमा कर रही है। सबसे पहले इस बारे में अंग्रेज़ी अख़बार गार्डियन ने ख़बर छापी थी।

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एक वरिष्ठ अमेरिकी सांसद ने कहा कि 'अमेरिका पर चरमपंथी हमले को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है।'

बुधवार को गार्डियन अख़बार ने उस 'ख़ुफ़िया आदेश' को भी छाप दिया था जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने वेरीज़ोन कंपनी को फ़ोन रिकॉर्ड के आंकड़े उनके हवाले करने के आदेश दिए थे।
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वेरीज़ोन अमेरिका की बड़ी फ़ोन कंपनियों में से एक है। नागरिक अधिकारों के लिए काम कर रहे गुटों ने इस रिपोर्ट को आश्चर्यजनक क़रार दिया है।

अधिकार
अमेरिका में ख़ुफ़िया मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष माइक रॉजर्स ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमरीकियों के फ़ोन रिकॉर्ड को जमा करना पूरी तरह से क़ानूनी है जिसे संसद ने अधिकृत किया है और ओबामा प्रशासन ने इसका कोई ग़लत इस्तेमाल नहीं किया है।
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बाद में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने फ़ोन रिकॉर्ड जमा किए जाने को बहुत 'महत्वपूर्ण उपकरण' क़रार दिया जिससे अमेरिकी अधिकारियों को संदिग्ध चरमपंथियों पर नज़र रखने में काफ़ी मदद मिलती है।

लेकिन इस जानकारी के सार्वजनिक होने के बारे में सुरक्षा एजेंसी और वेरोज़ोन कंपनी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गार्डियन अख़बार ने जो ख़बर छापी है उसमें अमेरिका के विदेशी ख़ुफ़िया निरीक्षण अदालत के न्यायाधीश जस्टिस रॉजर विंसन के 25 अप्रैल को दिए गए आदेश का ज़िक्र है।

ये आदेश जॉर्ज बुश के कार्यकाल के दौरान बने पेट्रियट ऐक्ट की एक धारा के आधार पर दिए गए है।

आदेश के अनुसार वेरीज़ोन कंपनी को एनएसए को उन सभी देसी-विदेशी कॉलों की जानकारी देनी है जिनमें बात करने वाला कम से कम एक व्यक्ति अमेरिका में रहता है।

राय विभाजित
व्हाइट हाउस ने ये स्पष्ट किया कि ये आदेश अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को अमरीकी नागरिकों की फ़ोन पर हुई बातचीत को सुनने का अधिकार नहीं देता है।

लेकिन सरकार चाहे तो किसी संदिग्ध के फ़ोन नंबर पर की जा रही बातचीत को सुनने के लिए कोर्ट से इजाज़त देने की अपील कर सकती है।

इस बारे में अमेरिकी पार्टियों और सांसदों की राय अलग-अलग है। एक निर्दलीय सांसद बर्ने सैंडर्स ने इसकी आलोचना करते हुए कहा, ''ये कहना कि सरकार लाखों अमेरिकियों के फ़ोन रिकॉर्ड की जांच करेगी, मेरी समझ से ये अस्वीकार्य है।''

रिपब्लिकन सांसद रैंड पॉल ने एक बयान जारी कर कहा कि वो संसद में एक बिल पेश करेंगे जिसमें बिना किसी ख़ास कारण के सुरक्षा एजेंसियों को लोगों के फ़ोन रिकॉर्ड जमा करने पर पाबंदी लगाने की बात की जाएगी।

लेकिन एक दूसरे रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक़्क़त नही है।

उन्होंने अपने पक्ष का बचाव करते हुए कहा, ''अगर हम ऐसा नहीं करते तो हम पागल हैं। अगर आप किसी चरमपंथी से बात नहीं कर रहें हैं तो आपको किसी बात की चिंता करने की ज़रूरत ही नही।''


लेकिन नागरिक अधिकारों की वकालत करने वाले गुटों ने इस आदेश का जमकर विरोध किया है।

अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) के क़ानूनी उपनिदेशक जमील जाफ़र का इस बारे में कहना था, ''ये इस बात का एक और सबूत है कि किसी तरह से अमेरिकियों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों को अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की मांगों के आगे समर्पण किया जा रहा है।''

पिछले महीने समाचार एजेंसी एपी के पत्रकारों के फ़ोन रिकॉर्ड जमा किए जाने की ख़बर सार्वजनिक होने के बाद व्हाइट हाउस की काफ़ी आलोचना हुई थी।

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