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मैनहट्टन आतंकी हमला: 'मेरी आखों के सामने ट्रक ने दो लोगों को रौंदा'

Wed, 01 Nov 2017 02:04 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
बीबीसी, हिन्दी Updated Wed, 01 Nov 2017 02:04 PM IST
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new york terror attack, eyewitness explain about the manhattan incident

अमेरिका में जब एक ट्रक ने साइकिल लेन में घुसकर लोगों को कुचलते हुए एक स्कूल बस को टक्कर मारी तो उस समय बाबटुंडे ओगुनीयी वहीं मौजूद थे। अपने सामने हुई इस घटना से वो दहशत में आ गए थे। मंगलवार को दोपहर बाद न्यूयॉर्क के मैनहट्टन में हुई घटना में आठ लोग मारे गए जबकि 11 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।  

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एक 29 साल के व्यक्ति को पुलिस ने गोली मार दी और बाद में गिरफ्तार कर लिया। बाद में सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ये एक 'आतंकी हमला' था। 23 साल के ओगुनीयी कम्प्यूटर साइंस के छात्र हैं और इसी इलाके में रहते हैं। जब ट्रक ने लोगों को रौंदा तो वो मौके पर ही मौजूद थे। उन्होंने मौके पर जो कुछ देखा था, उसे बीबीसी से साझा किया।
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आंखों देखी
मैं अपने कॉलेज के बाहर बैठा हुआ था, तभी मैंने देखा कि एक ट्रक टेढ़े मेढ़े तरीके से आ रहा है। उसकी रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी। जबकि इस इलाके में अधिकतम रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटे रखी गई है। ये बहुत भीड़भाड़ वाला इलाका है।
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ट्रक ने दो लोगों को रौंद दिया, ये मेरी आंखों के सामने हुआ। लेकिन इसके बाद भी चालक गाड़ी को चलाता रहा और साइकिल लेन में घुस गया। इसके बाद उसकी टक्कर एक स्कूल बस से हुई और वो बाईं ओर मुड़ गया। लोग ट्रक की ओर दौड़े ये देखने के लिए कि क्या हुआ है। इसके तुरंत बाद बंदूक चलने की आवाज़ आई और इसके बाद लोग उल्टी दिशा में दौड़ते दिखे।

दर्द की आंखों देखी दास्तान

new york terror attack, eyewitness explain about the manhattan incident

मुझे अपनी आंखों पर ही विश्वास नहीं हुआ, मैं हैरान था। किसी को भी पता नहीं था कि क्या हो रहा है। पहले तो लगा कि ये एक दुर्घटना है। इकट्ठा हुए लोग पशोपेश में थे और उन्हें समझ नहीं रहा था कि उन्हें क्या करना चाहिए।

हम नहीं जानते थे कि जिन लोगों को टक्कर लगते हमने देखा, वो ज़िंदा भी हैं या नहीं। हमें समझ में नहीं आया कि प्रशासनिक अधिकारियों को या इमरजेंसी सेवा को फोन करना चाहिए या छुपने की कोशिश करनी चाहिए।

मैं क्षतिग्रस्त स्कूल बस की ओर गया। मैंने देखा कि अग्निशमन के कर्मचारी बच्चों को स्कूल बस से निकाल रहे हैं। वहां देखा कि वे बस के हिस्से को अलग कर उसमें जाने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे नहीं पता कि बच्चे घायल हुए थे या नहीं, हो सकता है कि कुछ उसमें फंस गए हों। मुझे नहीं पता कि सभी ठीक थे या नहीं।

बाद में मुझे पता चला कि दो लोग नहीं बल्कि आठ लोग मारे गए हैं। ये ऐसी चीजें थीं, जिनकी कोई कभी उम्मीद नहीं करता है। ऐसी घटनाएं आप टीवी और ख़बरों में देखते हैं, लेकिन आप कभी नहीं सोचते कि ऐसा आपके सामने ही घटित हो सकता है और वो भी आपके बिल्कुल करीब।

हम ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों एक आदमी लोगों को कुचलना चाह रहा था और एक स्कूल में टक्कर मार दी। इसका कोई मतलब नहीं है, ये पागलपन है। मुझे याद है कि वो गाड़ी बहुत बेतरतीबी से चला रहा था।

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