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'काले ज्यादा होते हैं पुलिस के निशाने पर'

Tue, 19 Mar 2013 08:49 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Tue, 19 Mar 2013 08:49 AM IST
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new york police searched millions men due to their race

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की सड़कों पर लोगों को रोककर तलाशी लेने की इजाज़त देने वाली पुलिस की नीति को चुनौती देने वाला मुक़दमा शुरू हो गया है।

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इस मामले के वकीलों का कहना है कि लाखों लोगों को उनकी नस्ल की वजह से ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रोका गया है।

वादी पक्ष का कहना है कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए जिन लोगों को रोककर उनकी तलाशी ली गई, उनमें से ज़्यादातर काले या हिस्पैनिक थे।

लेकिन 'रोको और तलाशी लो' नाम की इस नीति के समर्थकों का कहना हैं कि इससे न्यूयॉर्क में हिंसक अपराधों को कम करने में मदद मिली है।

नीति में बदलाव की मांग
चुनौती देने वाले पक्ष ने अदालत से नीति में सुधार करने का आदेश देने के लिए कहा है।

इस मुक़दमे में 100 से ज़्यादा न्यूयॉर्क निवासी, पुलिसकर्मी और विशेषज्ञ गवाही देंगे और मुक़दमा एक महीने से ज़्यादा समय तक चल सकता है।

'सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स' नाम की संस्था ने मुक़दमा उन चार काले पुरुषों की ओर से किया है जिनकी इस नीति के तहत रोककर तलाशी ली गई थी।

अब ये उन सभी लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जिनकी न्यूयॉर्क पुलिस ने इसी तरह सड़कों पर रोककर तलाशी ली और इसमें मांग की गई है कि अदालत एक निरीक्षक नियुक्त करे जो पुलिस की नीति में बदलावों का निरीक्षण करे।
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पहले से ही वैध ठहराई गई नीति पर प्रतिबंध लगाने की मांग तो नहीं की जा रही लेकिन हो सकता है कि जज ऐसे सुधार करने का आदेश दे जिनसे इसके इस्तेमाल करने का तरीक़ा बदल जाए।
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'डरावना और अपमानजनक अनुभव'
सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स के डारियस चार्नी कहते हैं कि हालांकि ये नीति वैध है लेकिन न्यूयॉर्क पुलिस काले और हिस्पैनिक लोगों को अवैध तरीके से निशाना बना रही है।

चार्नी ने कहा कि इस तरह से रोका जाना लोगों के लिए एक "डरावना और अपमानजनक अनुभव" और ये "मनमाना, ग़ैरज़रूरी और असंवैधानिक" कदम था।

लेकिन शहर प्रशासन कहता है कि इस नीति से पुलिस को न्यूयॉर्क में अपराध को ऐतिहासिक स्तर तक कम करने में मदद मिली है और प्रशासन के वकील कहते हैं कि ज़्यादा अपराध शहर के अल्पसंख्यक इलाकों में घटते हैं।

समर्थक
पार्षद पीटर वालौन जूनियर इस नीति के समर्थक हैं।

वे कहते हैं, "अगर हमारे पास उन शहरों के हत्या के आंकड़े होते जहां 'रोको और तलाशी लो' की नीति नहीं इस्तेमाल की जाती, अगर हमारे पास शिकागो के हत्या के आंकड़े होते, तो वो आंकड़ा 1400 हत्याओं का होता, डेट्रॉयट में ये आंकड़ा चार हज़ार होता। ये आंकड़े हल्के में नहीं लिए जा सकते। नागरिक अधिकारों का ज़्यादा बड़ा हनन रोकने से नहीं बल्कि हत्या से होता है। बंदूक के इस्तेमाल से पहले ही उसे गली-मोहल्लों से हटाने का यही एक तरीका है।"

प्रशासन की ओर से मुक़दमा लड़ रही एक वकील हेडी ग्रॉसमैन का कहना था, "न्यूयॉर्क पुलिस विभाग क़ानून की सीमाओं के अंदर रहकर व्यवस्था क़ायम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पूरे शहर में अपराध दर एक सी नहीं है।"


सबसे कम हत्याएं
पिछले साल न्यूयॉर्क में 419 लोगों की हत्या हुई जो कि साठ के दशक में आंकड़े दर्ज करने की शुरुआत के बाद से सबसे कम संख्या है। नब्बे के दशक दो हजार से ज़्यादा लोग प्रति वर्ष मारे जाते थे।

वर्ष 2012 में पुलिस ने पांच लाख 33 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सड़कों पर रोककर उनकी तलाशी ली जबकि वर्ष 2002 में ये संख्या एक लाख 15 हज़ार थी।

जिन लोगों की तलाशी ली गई उनमें से लगभग 87 प्रतिशत काले या हिस्पैनिक थे।

इनमें से लगभग आधे मामलों में पुलिस ने सिर्फ़ सवाल पूछे। लेकिन कुछ अन्य मामलों में अधिकारियों ने लोगों के सामान की जांच की या फिर शरीर को ऊपर से नीचे तक छू कर तलाशी ली।

तलाशी लिए जाने वाले लगभग 10 प्रतिशत मामलों में कथित तौर से गिरफ़्तारी होती है और कभी-कभी हथियार भी बरामद होते हैं।

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