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नासा ने अंतरिक्ष में भेजा चंद्र अभियान

Sat, 07 Sep 2013 02:03 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 07 Sep 2013 02:03 PM IST
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अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ ने चांद पर एक अंतरिक्ष मिशन भेज दिया है।

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बिना इंसान वाले इस अंतरिक्ष अभियान को लाडी (एलएडीईई) का नाम दिया गया है। इस अंतरिक्ष यान को शनिवार को अमरीका के उत्तरी तट पर स्थित वैलप रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र से भेजा गया।

28 करोड़ अमरीकी डॉलर की लागत वाले इस अभियान का मकसद चंद्रमा के आसपास के वातावरण का बारीकी से अध्ययन करना है। इसके साथ ही ये चंद्रमा पर फैले धूल और ग़ुबार के व्यवहार के बारे में जानकारी हासिल करेगा।
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इसके अलावा लाडी चांद पर लेजर संचार प्रणाली की जांच भी करेगा। इसे नासा अपने भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल करना चाहता है। लेजर प्रणाली के जरिए आंकड़े पारंपरिक रेडियो संचार की तुलना में बहुत तेजी से भेजे जा सकते हैं।
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इंजीनियर उम्मीद कर रहे हैं कि लाडी में मौजूद टेस्ट टर्मिनल 600 मेगाबाइट्स प्रति सेकेंड की दर से डाटा डाउनलोड गति हासिल कर पाएंगे।

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईसीए) भी लाडी के संचार कार्यक्रम में दिलचस्पी रखती है क्योंकि इस क्षेत्र को लेकर उसकी भी महत्वाकांक्षा है।

फिलहाल यूरोप और अमरीका एक दूसरे की खोजों से हासिल होने वाली जानकारियों को डाउनलोड करते हैं और भविष्य में नई तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए इसी तरह करते रहने के लिए सहयोग बनाए रखना होगा।

महत्वपूर्ण जानकारी

अभियान में शामिल वैज्ञानिकों में से एक सारा नोबल का कहना है कि ‘‘यह  मिशन बहुत से उन लोगों को आश्चर्यचकित कर देगा जो यह समझते हैं कि चंद्रमा पर कोई वातावरण या फिर पर्यावरण नहीं है।’’

उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वहाँ वातावरण निश्चित तौर पर है, लेकिन काफी सूक्ष्म है ।

उन्होंने कहा, “यह काफी सूक्ष्म है। अणुओं की संख्या कम होने के चलते अणु ना तो टकराते हैं और ना ही उनका संलयन हो पाता है,”

वैज्ञानिक इसे समझने में इसलिए रुचि रखते हैं कि यह स्थिति सौर प्रणाली के अधिकांश भागों में पाई जाती है। लाडी का वज़न 383 किलोग्राम है और ऊंचाई 4.2 मीटर है जबकि यह 8.1 मीटर चौड़ा है।

नासा के विज्ञान प्रमुख जॉन ग्रन्सफील्ड का कहना है कि इस बात में कोई शक नहीं है कि ऑपटिकल संचार ही भविष्य है।

ग्रन्सफील्ड कहते हैं कि ''मंगल ग्रह मिशन 2020 को लेकर ये विचार विमर्श चल ही रहा है कि क्या मंगल की सतह पर उतरने वाले रोवर में लेजर संचार का उपयोग हो सकता है।


मेरे ख्याल से इस बारे में कोई सवाल ही नहीं है कि अगर सौर मंडल में मंगल पर मानवयुक्त यान भेजते हैं और हाई डेफ़िनेशन वाले 3-डी वीडियो चाहते है। तो वहां से सूचनाएं भेजने के लिए लेजर संचार का ही उपयोग करना होगा।''

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