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वायरलः पहली बार कैमरे में कैद हुई रहस्यमयी घोस्ट शॉर्क
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Dec 2016 05:02 PM IST
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चिमाइरा या 'घोस्ट शॉर्क'
- फोटो : Washington Post - Print Shot
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अपने नाम जैसे यूनानी मिथ की तरह ही चिमाइरा या 'घोस्ट शॉर्क' भी रहस्यमयी है। विचित्र मुखाकृति वाली यह जीव आम तौर पर कभी कभार ही दिखती है।
समुद्र की तह में विचरण करने वाली चिमाइरा की आंखें कमजोर और मरी हुई दिखती हैं। 'घोस्ट शॉर्क' भोजन को चबाने के लिए दांत के बजाय टूथ प्लेट्स का उपयोग करती है।
घोस्ट शॉर्क के सिर पर लाइनें हैं जिसके साथ बिंदु बने हुए हैं, जैसे पुराने टांके के निशान हो। पुरुष चिमाइरा के माथे पर ध्यान खींचने वाले सेक्स ऑर्गन्स होते हैं।
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इसको रैटफिश, रैबिटफिश, स्पूकफिश के नाम से भी बुलाया जाता है। हालांकि इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 'घोस्ट शॉर्क' दिखने में कितनी विचित्र है।
और अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने 'घोस्ट शॉर्क' नाम की प्रजाति पर एक वीडियो शूट किया है, जिसके जिंदा रहते हुए अभी तक कोई वीडियो नहीं फिल्माया गया है। यह घोस्ट शॉर्क नीले रंग की रंगत लिए चिमाइरा है।
इस वीडियो को 2009 में फिल्माया गया था, जिसे मोन्टरी बे एक्वेरियम रिसर्च इंस्टीट्यूट ने हाल ही में जारी किया है। इंस्टीट्यूट ने इसके साथ ही रिसर्चर लोनी लुंडस्टन और उनके साथियों के रिसर्च पेपर को भी जारी किया है। इस मछली की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।
'द वॉशिंगटन पोस्ट' की खबर के मुताबिक छह साल पहले एक एनजीओ के रिसर्चर ने रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) को कैलिफोर्निया और हवाई के समुद्र की तहों में सैकड़ों बार उतारा।
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समुद्र की तह में विचरण करने वाली चिमाइरा की आंखें कमजोर और मरी हुई दिखती हैं। 'घोस्ट शॉर्क' भोजन को चबाने के लिए दांत के बजाय टूथ प्लेट्स का उपयोग करती है।
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घोस्ट शॉर्क के सिर पर लाइनें हैं जिसके साथ बिंदु बने हुए हैं, जैसे पुराने टांके के निशान हो। पुरुष चिमाइरा के माथे पर ध्यान खींचने वाले सेक्स ऑर्गन्स होते हैं।
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इसको रैटफिश, रैबिटफिश, स्पूकफिश के नाम से भी बुलाया जाता है। हालांकि इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि 'घोस्ट शॉर्क' दिखने में कितनी विचित्र है।
और अब वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने 'घोस्ट शॉर्क' नाम की प्रजाति पर एक वीडियो शूट किया है, जिसके जिंदा रहते हुए अभी तक कोई वीडियो नहीं फिल्माया गया है। यह घोस्ट शॉर्क नीले रंग की रंगत लिए चिमाइरा है।
इस वीडियो को 2009 में फिल्माया गया था, जिसे मोन्टरी बे एक्वेरियम रिसर्च इंस्टीट्यूट ने हाल ही में जारी किया है। इंस्टीट्यूट ने इसके साथ ही रिसर्चर लोनी लुंडस्टन और उनके साथियों के रिसर्च पेपर को भी जारी किया है। इस मछली की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं।
'द वॉशिंगटन पोस्ट' की खबर के मुताबिक छह साल पहले एक एनजीओ के रिसर्चर ने रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) को कैलिफोर्निया और हवाई के समुद्र की तहों में सैकड़ों बार उतारा।
6,700 फीट की गहराई पर मिली चिमाइरा
चिमाइरा या घोस्ट शॉर्क
- फोटो : Washington Post - Print Shot
इस आरओवी ने समुद्र ही तह में 6,700 फीट की गहराई पर इस फुटेज को कैप्चर किया है। रिसर्चर ने जब फुटेज को देखा, तो वे हैरान हो गए। आरओवी ने घोस्ट शॉर्क की प्रजाति के जीव की तस्वीरें उतारीं थी जिसे अब तक दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर में पकड़ा गया है।
रिसर्च पेपर के मुताबिक लुंडस्टन ने तीन चिमाइरा विशेषज्ञों से संपर्क किया। वीडियो देखने के बाद विशेषज्ञों ने माना कि यह जीव नुकीली नाक वाली नीली रंगत की चिमाइरा है। हालांकि लुंडस्टन और एक्वेरियम के अन्य सदस्य अभी इस बात पर भी 100 फीसदी सहमत नहीं हैं कि यह नीली रंगत वाली चिमाइरा ही है, जबकि इसकी बहुत सारी शारीरिक विशेषताएं समान हैं। इस वजह से लुंडस्टन ने अपने पेपर में इसे Hydrolagus cf.trolli नाम दिया है, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम Hydrolagus trolli है।
इंस्टीट्यूट ने कहा कि पूरी तरह निश्चित होने के लिए रिसर्चरों को एक घोस्ट शॉर्क पकड़ कर उसे सतह पर लाना होगा। अपने पेपर में उन्होंने कहा है कि 'इसे कहना आसान है बजाय करने के', क्योंकि ये मछलियां बहुत बड़ी, तेज और पकड़ने में मुश्किल होती हैं।
रिसर्च पेपर के मुताबिक लुंडस्टन ने तीन चिमाइरा विशेषज्ञों से संपर्क किया। वीडियो देखने के बाद विशेषज्ञों ने माना कि यह जीव नुकीली नाक वाली नीली रंगत की चिमाइरा है। हालांकि लुंडस्टन और एक्वेरियम के अन्य सदस्य अभी इस बात पर भी 100 फीसदी सहमत नहीं हैं कि यह नीली रंगत वाली चिमाइरा ही है, जबकि इसकी बहुत सारी शारीरिक विशेषताएं समान हैं। इस वजह से लुंडस्टन ने अपने पेपर में इसे Hydrolagus cf.trolli नाम दिया है, जबकि इसका वैज्ञानिक नाम Hydrolagus trolli है।
इंस्टीट्यूट ने कहा कि पूरी तरह निश्चित होने के लिए रिसर्चरों को एक घोस्ट शॉर्क पकड़ कर उसे सतह पर लाना होगा। अपने पेपर में उन्होंने कहा है कि 'इसे कहना आसान है बजाय करने के', क्योंकि ये मछलियां बहुत बड़ी, तेज और पकड़ने में मुश्किल होती हैं।
कलाकार रे ट्रोल के नाम पर पड़ा वैज्ञानिक नाम
घोस्ट शॉर्क
- फोटो : Washington Post - Print Shot
रिसर्च पेपर में आगे कहा गया है, 'सवाल ये है कि रिसर्चर इस मछली को कब पकड़ पाएंगे? यदि वे पकड़ पाते हैं, तो उन्हें घोस्ट शॉर्क के पंख और अन्य चीजों के बारे में जांच पड़ताल करनी होगी और साथ ही उसकी कोशिकाओं के डीएनए टेस्ट भी करने होंगे।'
ऐसा करने के बाद उन्हें घोस्ट शॉर्क की नई प्रजाति के नाम से "cf" हटाना होगा या फिर उन्हें एक दूसरे रोचक विकल्प के लिए तैयारी करनी होगी।
नुकीली नाक वाली नीले रंगत की चिमाइरा को पहली बार ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और न्यू कैलेडोनिया के गहरे समुद्र में साल 2002 में रिसर्चर डोमिनिक डिडियर डागित ने खोजा था। डागित फिलाडेल्फिया में एकेडमी ऑफ नैचुरल साइंस में असिस्टेंट क्यूरेटर के तौर पर कार्यरत हैं।
2002 में उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस को बताया था कि उन्होंने अपनी खोज हाइड्रोलगुस ट्रोली ( Hydrolagus trolli) का नाम अलास्का के कलाकार रे ट्राल के नाम पर रखा, क्योंकि दोनों रैटफिश के प्रति विशेष लगाव रखते हैं।
ऐसा करने के बाद उन्हें घोस्ट शॉर्क की नई प्रजाति के नाम से "cf" हटाना होगा या फिर उन्हें एक दूसरे रोचक विकल्प के लिए तैयारी करनी होगी।
नुकीली नाक वाली नीले रंगत की चिमाइरा को पहली बार ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और न्यू कैलेडोनिया के गहरे समुद्र में साल 2002 में रिसर्चर डोमिनिक डिडियर डागित ने खोजा था। डागित फिलाडेल्फिया में एकेडमी ऑफ नैचुरल साइंस में असिस्टेंट क्यूरेटर के तौर पर कार्यरत हैं।
2002 में उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस को बताया था कि उन्होंने अपनी खोज हाइड्रोलगुस ट्रोली ( Hydrolagus trolli) का नाम अलास्का के कलाकार रे ट्राल के नाम पर रखा, क्योंकि दोनों रैटफिश के प्रति विशेष लगाव रखते हैं।