कैदियों की अदला बदली की तैयारी में है पाक और अमेरिका?
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अमेरिका और पाकिस्तान में बढ़ते तनाव के बीच एक खबर यह भी आ रही है कि दोनों देश अपने कैदियों की अदला-बदली की तैयारी कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक ये दोनों कैदी और कोई नहीं बल्कि डॉक्टर शकील अफरीदी और न्यूरोसाइंटिस्ट आफिया सिद्दिकी हैं।
बता दें डॉक्टर अफरीदी वही हैं जिन्होंने अलकायदा सरगना मोहम्मद बिन लादेन तक पहुंचने में अमेरिका की मदद की थी। पाकिस्तानी फिजिशियन अफरीदी ने ही ओसामा बिन लादेन को ट्रैक करने में सीआईए की सहायता की थी। जिसके बाद वह मारा गया। अफरीदी को हाल ही में पेशावर जेल से किसी अज्ञात लोकेशन पर शिफ्ट कर दिया गया है।
वहीं पाकिस्तानी न्यूरोसांइटिस्ट आफिया सिद्दिकी अफगानिस्तान में एक अमेरिकी सैनिक की हत्या के आरोप में टेक्सास जेल में बंद है। इसी हफ्ते पाकिस्तानी काउंसिल जनरल आईशा फारूकी ने टेक्सास जेल में बंद आफिया से मुलाकात भी की थी। जिसके बाद कैदियों की अदला बदली की खबरों को बल मिला। आफिया को 86 साल की जेल की सजा हुई है।
पाक ने अमेरिकी कैदी को वापिस भेजा वाशिंगटन
वैसे तो कैदियों की अदला बदली की ये खबरें काफी समय से ही आ रही थीं लेकिन इस्लामाबाद ने इनको खारिज कर दिया था। इसके साथ ही पाकिस्तानी मीडिया से कुछ इस तरह की खबरें भी आई थीं कि अमेरिका के जेलब्रेक के डर से पाकिस्तान ने अफरीदी को कहीं और शिफ्ट कर दिया है।
साथ ही अमेरिका भी अफरीदी की सेहत को लेकर चिंतित रहता है और पाक से उनकी अच्छी सेहत सुनिश्चित करने को कहता है। अमेरिकी सांसद अफरीदी को अपना हीरो मानते हैं और उनकी रिहाई के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने के पक्ष में हैं। ये सभी बदलाव ऐसे समय में दिख रहे हैं जब इस्लामाबाद ने अपना नया राजदूत वाशिंगटन भेजा है। यह नए राजदूत अली जहांगीर सिद्दिकी हैं जिन्होंने बुधवार को अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत की जगह ली है।
अब ये तो वक्त ही बताएगा कि इन कैदियों की अदला बदली होती है या नहीं क्योंकि एक तरफ तो पाकिस्तान इस तरह की खबरों को खारिज कर देता है पर वहीं दूसरी तरफ वह कुछ ऐसा भी कर देता है जिससे यह साबित होता है कि इस तरह की सौदेबाजी उसके लिए कुछ नई नहीं है। इसका एक उदाहरण बीते महीने का ही है। जिसमें पाकिस्तानी नागरिक पर गाड़ी चलाने वाले अमेरिकी डिप्लोमैट रेमंड डेविस को उसने वापिस वाशिंगटन भेज दिया। पहले उस डिप्लोमैट को जाने नहीं दिया जा रहा था लेकिन जब उसने पीड़ित परिवार को 24 लाख डॉलर की राशि दी तो उसे वापिस अमेरिका जाने दिया गया।