{"_id":"fc63605a-45e8-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"learn-english-online-how-the-internet-is-changing-language","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्या अंग्रेजी को पछाड़ने जा रही है हिंग्लिश?","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
क्या अंग्रेजी को पछाड़ने जा रही है हिंग्लिश?
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 14 Dec 2012 05:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया भर में कई भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं लेकिन इन सबके लिए इंटरनेट पर इंगलिश एक साझा भाषा है और ये एकदम अलग किस्म की भाषा के तौर पर उभर रही है।
विज्ञापन
इंग्लैंड और अमेरिका के बीच 1814 में जो युद्ध हुआ और इस युद्ध के बाद जब अमेरिका का उदय हुआ तब अमेरिका में बहुत बिखराव था। उस वक्त नोआ वेब्स्टर ने सोचा कि साझा भाषा के जरिए देश को एकजुट किया जा सकता है जिससे ब्रिटेन से इतर अमेरिका की अपनी एक पहचान बन सके।
विज्ञापन
वेब्स्टर के शब्दकोष में ब्रितानी अंग्रेजी से अलग शब्दावली थी जैसे अमेरिका में colour की जगह पर color लिखा गया, traveller के स्थान पर traveler और re की जगह पर er का इस्तेमाल शुरू किया।
विज्ञापन
अमेरिकी अंग्रेजी शब्द theatre की जगह theater लिखते हैं। इस अमेरिकी शब्दावली को तैयार होने में 18 वर्ष लगे और वेब्स्टर ने इसके लिए 26 भाषाओं का अध्ययन किया और 70 हजार नए शब्द जोड़े। आज इंटरनेट पर इसी तरह की भाषा का निर्माण हो रहा है और शायद इसकी रफ्तार काफी आगे भी है।
इंटरनेट पर अंग्रेजी
कुछ भाषा विज्ञानी मानते हैं कि आने वाले 10 सालों में अंग्रेजी भाषा इंटरनेट पर राज करेगी लेकिन वो अंग्रेजी भाषा आज की अंग्रेजी से जुदा होगी। इनका मानना है कि ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अंग्रेजी उनकी भी बोलचाल की दूसरी भाषा है, जिनकी मूल भाषा अंग्रेजी नहीं है।
इंटरनेट पर लोग ग़ैरे अंग्रेजी भाषियों से बातचीत के दौरान लोग धड़ल्ले से अंग्रेजी का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि यहां पर व्याकरण और उच्चारण संबंधी कोई बंदिशें भी नहीं हैं। अमेरिकन विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान की प्रोफेसर नाओमी बैरन कहती हैं कि इंटरनेट पर वो लोग अच्छी और अर्थपूर्ण अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं जिनकी मूल भाषा अंग्रेजी नहीं है।
प्रोफेसर नाओमी कहती हैं कि फेसबुक पर तो हिंगलिश (हिंदी-अंग्रेजी), स्पैंगलिश (स्पेनिश-अग्रेजी) और कोंगलिश (कोरियन-अग्रेजी) बोली जा रही है। इस तरह की भाषाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। उनका कहना है कि इंटरनेट पर कुछ शब्द पारंपरिक अंग्रेजी भाषा से सीधे ग्रहण कर लिए गए हैं। जैसे सिंगलिश (सिंगापुर इंग्लिश) में ‘ब्लर’ का अर्थ ‘कन्फ्यूज्ड’ (अस्पष्ट) के तौर पर किया जाता है।
उसी तरह से कोंगलिश में ‘स्किनशिप’ का अर्थ ‘फिजिकल कॉन्टैक्ट’ होता है यानी शारीरिक संबंध। तकनीकि कंपनियां इस नई अंग्रेजी भाषा का ख़ास ध्यान रख रही है और इस तरह की नई शब्दावली को कोष में जोड़ रही है जो पहले से कोष में नहीं थीं।
दुनिया की अधिकांश बड़ी कंपनियां की वेबसाइट अंग्रेजी भाषा में है और छोटे व्यापारी भी वैश्विक ग्राहक को लुभाने के लिए साझा भाषा को लेकर काफी कुछ सीख रहे हैं।
हिंग्लिश
उदाहरण के तौर पर हिंग्लिश यानी हिंदी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेजी के मिश्रण से बनी भाषा जो भारतीय ऑनलाइन उपभोक्ताओं के बीच काफी आम है। ‘ब्रदर इन लॉ’ की जगह हिंग्लिश में ‘को-ब्रदर’ कहा जाता है।
ईव टीजिंग यानी छेड़छाड़ का अब सैक्सुअल हेरासमेंट के स्थान पर इसका इस्तेमाल हो रहा है जिसका अर्थ यौन प्रताड़ना होता है यहां तक कि पोस्टपोन के उलट प्री-पोन शब्द तक का चलन शुरू हो गया है।
दरअसल रोजमर्रा की ज़िंदगी में जिस तरह इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है वो मिश्रित भाषा के फलने-फूलने का जरिया बन रहा है।