जानें, शक्तिशाली टेलीस्कोप जेम्स वेब के बारे में, खोलेगा अंतरिक्ष की रहस्यमयी दुनिया के दरवाजे
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दुनिया का सबसे शक्तिशाली स्पेस टेलीस्कोप जेम्स वेब बनकर तैयार हो चुका है लेकिन असेम्बल का काम पूरा नहीं होने की वजह से इसकी लॉन्चिंग एक साल तक के लिए टाल दी गई है। नासा के अनुसार हमारे लिए यह सबसे कठिन काम है लेकिन इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा, अगले साल तक इसकी लॉन्चिंग की जा सकेगी। योजना के अनुसार अगले साल मई तक इसे अंतरिक्ष भेजने की तैयारी है।
आपको बता दें कि इस टेलीस्कोप के प्रोजेक्ट का काम 22 सालों से चल रहा है जिसमें अब तक 65 हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। नासा के अनुसार यह शक्तिशाली टेलीस्कोप ब्रह्मांड के कई रहस्यों को सुलझा सकता है। यह उन गैलेक्सी, उल्कापिंड और ग्रहों की भी खोज कर सकता है जो ब्रह्मांड के शुरुआती काल में बने थे। यह भी कहा जा रहा है कि यह टेलीस्कोप अंतरिक्ष में एलियन की मौजूदगी का भी पता लगा सकता है। नासा के मुताबिक यह टेलीस्कोप इतना संवेदशनशील है कि अगर चंद्रमा से कुछ दूरी पर कोई भंवरा भी उड़ रहा है तो उसकी आवाज को रिकॉर्ड कर सकते हैं। फ्रेंच गुयाना के रॉकेट-5 के जरिए इसे अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सकेगा।
जानें खासियत
जेम्स वेब टेलीस्कोप बेरिलियम धातु से बना हुआ है, जिसका दर्पण 18 भागों में बंटा हुआ है। इसके दर्पण पर सोने की महीन परत चढ़ाई गई है ताकि इंफ्रारेड परावर्तन अनुकूल हो सके। टेलीस्कोप का नाम नासा के वैज्ञानिक जेम्स वेब के नाम पर रखा गया है।
इस टेलिस्कोप में इन्फ्रारेड कैमरों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन समस्या यह है कि यह सूरज की रौशनी से खराब हो सकते हैं। हीट से बचाने के लिए इसमें एक खास तरह की सनशील्ड तैयार की गई है। सूरज की गर्मी से बचाने के लिए एक टेनिस कोर्ट के आकार की यह पांच लेयर वाली सनशील्ड है। इंसानों के बालों से भी सूक्ष्म हर लेयर, अगली लेयर से ठंडी है।
यह अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा स्पेस साइंस प्रोजेक्ट है। जिसमें समय के साथ कई एडवांस टेक्नोलॉजी को जोड़ा गया है। जिस पर नासा के अलावा यूरोपियन एजेंसी 16 अन्य देश भी काम कर रहे हैं।
इससे पहले नासा ने 1990 में हबल को छोड़ा गया था। जेम्स वेब उससे 100 गुना शक्तिशाली टेलीस्कोप बताया जा रहा है। हबल की मदद से खगोलविदों ने 7 हजार प्रकाश वर्ष दूर तारों के एक समूह को खोजा। इन तारों के बुझते जाने की रफ्तार के आधार पर ब्रह्मांड की उम्र 13 से 14 अरब साल के बीच आंकी गई थी।