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घर बुलाकर भारतीय मूल के प्रोफेसर छात्रों से करवाते थे नौकरों वाला काम, केस दर्ज

Tue, 20 Nov 2018 08:31 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 20 Nov 2018 08:31 AM IST
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Indian origin professor in US make his students to work as his personal servant
आशिम मित्रा

भारतीय मूल के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर पर अपने छात्रों का शोषण करने और उनसे अपने निजी कार्य करवाने के आरोप लगे हैं। प्रोफेसर का नाम आशिम मित्रा है और वह लंबे समय से यूनिवर्सिटी ऑफ मिसूरी-कंसास सिटी (यूएमकेसी) में फार्मेसी पढ़ा रहे हैं। वह अपने छात्रों से लॉन की सफाई, अपने कुत्ते की देखभाल और पौधों को पानी देने का काम करवाते थे। कई बार हफ्तों में एक बार। जब वह और उनकी पत्नी बाहर होते थे।  

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रिपोर्ट के अनुसार मित्रा 24 सालों से यूकेएमसी के स्कूल ऑफ फार्मेसी में पढ़ा रहे हैं। वह अपने छात्रों को निजी नौकर की तरह काम करवाते हैं। इस आरोप को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। लेकिन मित्रा के एक दर्जन छात्रों का कहना है कि उन्होंने नौकर की तरह काम किया है। यूकेएमसी में पढ़े भारतीय छात्र कमेश कुचीमंची ने कहा कि कॉलेज में उसकी जिंदगी आधुनिक दास्ता से ज्यादा और कुछ नहीं थी। 
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कुचीमंची ने आरोप लगाया कि वह भारतीय छात्रों का शोषण करते हैं। जब एक बार उसने मित्रा से कहा था कि वह नौकर नहीं बन सकता तो उन्होंने मुझे यूनिवर्सिटी से बाहर निकालने, अपना वीजा और सबकुछ खो देने की धमकी दी थी। यह उनका डराने का तरीका होता था। या तो आप उनके अनुसार चलें या फिर आपको बाहर निकाल दिया जाएगा। आप ऐसी परिस्थिति में नहीं पड़ना चाहते जहां आपको खाली हाथ लौटना पड़े।
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कुचीमंची की एक साथी मृदुल मुखर्जी जो भारत से हैं उन्होंने मित्रा और यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के खिलाफ दो केस दर्ज कराए हैं। उन्होंने इस केस में कहा गया है कि मित्रा ने विदेशी बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया और जब यूनिवर्सिटी से इसकी शिकायत की गई तो इन्होंने इसे अनसुना कर दिया। आरोपों के अनुसार यूनिवर्सिटी को न केवल मित्रा के व्यवहार के बारे में पता था बल्कि उन्होंने सालों तक उनके खिलाफ आने वाली शिकायतों को दरकिनार कर दिया। इसकी वजह मित्रा उन सफल प्रोफेसर में से एक हैं जो रिसर्च के जरिए स्कूल को मिलियन डॉलर देते हैं। 


वहीं अपने बयान में मित्रा का कहना है, 'सालों से मैं अपने स्नातक छात्रों को अपने घर पर बुलाता रहा हूं जहां वह अपने कोर्स से संबंधित कार्य करते हैं। कई बार उन्होंने मेरी पत्नी द्वारा बनाया गया खाना भी खाया है। मुझे किसी से भी पढ़ाई से गैर संबंधित चीजे करवाने की जरुरत नहीं है। मुझे समझ नहीं आया कि कैसे कोई अपने वीजा को लेकर चिंतित हो सकता है। मैं 60 बच्चों के साथ काम कर चुका हूं और मुझे याद नहीं है कि उनमें से किसी एक के भी वीजा को चुनौती दी गई हो या फिर रद्द किया गया हो।'

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