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भारतीय मूल के इमरान ने ओरलैंडो शूटिंग में बचाई थी कई जानें
एजेंसी/ न्यूयॉर्क
Updated Sat, 18 Jun 2016 12:39 AM IST
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पूर्व अमेरिकी मेरीन सार्जेंट हैं इमरान
- फोटो : Reuters
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भारतीय मूल के पूर्व अमेरिकी मरीन सार्जेट इमरान यूसुफ ने ओरलैंडो के समलैंगिक नाइटक्लब में गोलीबारी के दौरान कई जिंदगियां बचाई थी। इस गोलीबारी में 50 से अधिक लोगों की जान चली गई। यूसुफ पल्स नाइटक्लब में बतौर बाउंसर काम करते हैं। उस दिन जब उन्होंने नाइटक्लब में गोली चलने की पहली आवाज सुनी, तो अपने सैन्य अनुभव से तुरंत खतरे को भांप लिया।
नाइटक्लब में उस वक्त मौजूद सभी लोग डर से कांप रहे थे, ऐसे में यूसुफ खतरे को नजरअंदाज कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए आगे बढ़े और नाइटक्लब का पिछला दरवाजा खोल दिया जिससे कई लोग बाहर निकलने में कामयाब रहे। इमरान यूसुफ ने सीबीएस न्यूज चैनल को बताया कि नाइटक्लब में हॉल के पीछे लोग डर से चिल्ला रहे थे और मैं दरवाजा खोलो, दरवाजा खोलो चिल्ला रहा था।
डर की वजह से कोई भी वहां से हिल नहीं रहा था। उन्होंने कहा, कोई विकल्प नहीं था। हम या तो वहीं रुके रहते और मर जाते या मैं खतरा मोल लेता और वह कुंडी खोलने के लिए कूद पड़ता। उल्लेखनीय है कि यूसुफ की मां व नानी हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि मेरे फौरन हरकत में आने से 60-70 जिंदगियां बच गईं। चैनल के अनुसार, यूसुफ ने कहा, काश मैं और लोगों को भी बचा सकता। बहुत से लोग मारे गए।
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यूसुफ ने पिछले माह ही मरीन कॉर्प्स छोड़ दी। समाचार-पत्र मरीन कोर्प्स टाइम्स ने कहा कि उन्हें सर्विस में रहते हुए नेवी एंड मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मरीन कॉर्प्स में जून 2010 से लेकर मई 2016 तक काम किया था। वह 2011 में अफगानिस्तान में भी तैनात थे।
Published By Rahul Sankrityayan
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नाइटक्लब में उस वक्त मौजूद सभी लोग डर से कांप रहे थे, ऐसे में यूसुफ खतरे को नजरअंदाज कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए आगे बढ़े और नाइटक्लब का पिछला दरवाजा खोल दिया जिससे कई लोग बाहर निकलने में कामयाब रहे। इमरान यूसुफ ने सीबीएस न्यूज चैनल को बताया कि नाइटक्लब में हॉल के पीछे लोग डर से चिल्ला रहे थे और मैं दरवाजा खोलो, दरवाजा खोलो चिल्ला रहा था।
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डर की वजह से कोई भी वहां से हिल नहीं रहा था। उन्होंने कहा, कोई विकल्प नहीं था। हम या तो वहीं रुके रहते और मर जाते या मैं खतरा मोल लेता और वह कुंडी खोलने के लिए कूद पड़ता। उल्लेखनीय है कि यूसुफ की मां व नानी हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि मेरे फौरन हरकत में आने से 60-70 जिंदगियां बच गईं। चैनल के अनुसार, यूसुफ ने कहा, काश मैं और लोगों को भी बचा सकता। बहुत से लोग मारे गए।
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यूसुफ ने पिछले माह ही मरीन कॉर्प्स छोड़ दी। समाचार-पत्र मरीन कोर्प्स टाइम्स ने कहा कि उन्हें सर्विस में रहते हुए नेवी एंड मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मरीन कॉर्प्स में जून 2010 से लेकर मई 2016 तक काम किया था। वह 2011 में अफगानिस्तान में भी तैनात थे।
Published By Rahul Sankrityayan