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चौंकाने वाली रिपोर्ट : वायु प्रदूषण से भारत और चीन में सर्वाधिक मौतें

Thu, 19 Apr 2018 03:39 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 19 Apr 2018 03:39 PM IST
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india and china responsible for more than half of global deaths due to air pollution

वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत की राजधानी दिल्ली में तो एक टाइम पर रेड अलर्ट भी जारी कर दिया गया था। साथ ही इससे होने वाली मौतों के आंकड़े में भी वृद्धि हो रही है। यह हाल केवल भारत का ही नहीं है बल्कि चीन में भी यही स्थिति बनी हुई है। एक अमेरिकन अध्ययन के मुताबिक भारत और चीन दोनों मिलकर वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण से होने वाली आधी से ज्यादा मौतों के लिए उत्तरदायी हैं। अमेरिका स्थित हेल्थ इफेक्ट इंस्टीट्यूट ने वैश्विक हवा पर एक स्टडी की थी जिसे मंगलवार को जारी किया गया। इसके अनुसार चीन और भारत में वायु प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन का PM2.5 प्रदूषण स्तर अब स्थिर होना शुरु हो गया है। लेकिन भारत का प्रदूषण स्तर अभी भी बढ़ रहा है। 

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वहीं वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में साल 1990 से 2010 के बीच दोनों देशों में कमी देखी गई थी। साल 1990 में चीन में प्रति लाख की संख्या पर मृत्यु दर 146 थी जो साल 2016 में घटकर 80 पर आ गई। वहीं भारत में भी ये स्तर कम हुआ। जिसमें प्रति लाख की संख्या पर मृत्यु दर 150 से घटकर 123 पर आ गई। लेकिन भारत में 1990-2010 के बीच ही यह स्थिति रही। नवीनतम डाटा के मुताबिक 2010 के बाद से 2016 तक भारत में प्रदूषण का स्तर काफी अधिक हो गया।
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वायु प्रदूषण से विकासशील देशों में 70 साल और इससे अधिक उम्र वाले लोगों के बीच नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। PM2.5 प्रदूषण के कारण इस्कामिक हर्ट संबंधित बीमारियां होती हैं जो जिंदगी के 16.2 फीसदी साल कम कर देती हैं। चीन में यह आंकड़ा 16.2 प्रतिशत है। इस प्रकार की बीमारी को वहां डिसेबिलिटी एडजस्टिड लाइफ यर्स (डीएएलवाईएस) कहा जाता है। वहीं भारत में यह आंकड़ा 17.8 फसदी है।

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भारत को उठाने होंगे ठोस कदम

india and china responsible for more than half of global deaths due to air pollution

रिपोर्ट के अनुसार चीन और भारत में संयुक्त रूप से घर के बाहर और भीतर का वायु प्रदूषण अधिक है। भारत की 43 फीसदी और चीन की 30 फीसदी जनसंख्या ठोस ईंधन का प्रयोग करती है। वहीं 2016 के आंकड़ों के मुताबिक यह स्तर और भी बढ़ गया जिसमें भारत के 5,600 लाख लोग और चीन के 4,160 लाख लोग ठोस ईंधर का प्रयोग कर रहे थे। 

हालांकि रिपोर्ट में ये बात भी स्वीकार की गई है कि भारत सरकार ने हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए काम करना शुरु कर दिया है। लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को इसके लिए और भी ठोस कदम उठाने होंगे। सरकार को घरों में भारी संख्या में इस्तेमाल होने वाले बायोमास उत्सर्जन, कोयला जलाना और धूल प्रदूषण को कम करना होगा। व्यापक तौर पर रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 7 अरब लोग यानि दुनिया की 95 फीसदी जनसंख्या ऐसे इलाकों में रह रही है जहां की हवा अस्वास्थ्यकर है। 

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