साइबर हमलों से सहमा अमेरिका, चीन पर शक
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अमेरिकी सरकार से जुड़ी लगभग सभी एजेंसियों के कंप्यूटर हैक करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
ऐसी आशंका है कि हैकरों पूर्व और वर्तमान के करीब 40 लाख कर्मचारियों से जुड़े आंकड़े उड़ा लिए। फिलहाल शक की सूई चीन की ओर उठ रही हैं। जानकार इसे सरकारी कंप्यूटर नेटवर्क की सबसे बड़ी सेंध बता रहे हैं।
अपने एक बयान में अमेरिका के कार्मिक प्रबंधन कार्यालय ने कहा कि यह साइबर सुरक्षा से संबंधित घटना है। इससे पूर्व और वर्तमान संघीय कर्मचारियों की निजी जानकारी सहित व्यक्तिगत आंकड़े प्रभावित हुए हैं।
जांचकर्ताओं को शक, हैकिंग के पीछे चीनी सेना
अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने एक बयान में बताया कि हम इसकी जांच करेंगे और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को सामने लाएंगे।
खुफिया मामलों के सीनेट चयन समिति के सदस्य और सांसद मार्क वार्नर ने कहा कि साइबर हमले हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और हमारी अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं। लोगों की ‘व्यक्तिगत जानकारी’ चुराने की इस तरह की बढ़ती घटनाओं को हम बर्दाश्त नहीं कर सकते।
हालांकि सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है कि है कि इसके पीछे किसका हाथ है। वहां के मीडिया संगठनों के मुताबिक जांचकर्ताओं को लगता है कि इसमें चीनी सेना का हाथ है।
उनके मुताबिक, पहले भी चीन ने इस तरह के साइबर हमले किए हैं। अमेरिकी सरकार के कंप्यूटर हैक करने की साल भरके भीतर दूसरी घटना है। वाशिंगटन पोस्ट और वॉल स्ट्रीट जनरल ने अपनी रिपोर्ट में इस घटना के लिए सीधे तौर पर चीन को कसूरवार बताया। हालांकि चीन ने आरोपों से इनकार किया है।