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मंगल पर गहराई में दिखीं ग्लेशियर की परतें
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, टक्सन (एरिजोना)
Updated Sun, 14 Jan 2018 12:20 AM IST
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मंगल ग्रह
लंबे समय से माना जाता रहा है कि मंगल ग्रह पर बर्फ है। लेकिन यह कहां और कितनी गहराई पर है, इस बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं थी। अब वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर गहराई में ग्लेशियर देखे जाने का दावा किया है। इससे यह अंदाजा लगाने में सहूलियत होगी कि लाल ग्रह पर कितना पानी हो सकता है। अमेरिकी पत्रिका ‘साइंस’ ने यह खबर दी है।
लाल ग्रह पर भूमि में कटाव के कारण आठ ऐसी जगहें दिखी हैं, जहां बर्फ है। कई जगह तो यह सतह से महज एक मीटर नीचे है लेकिन दूसरी जगहों पर 100 मीटर की गहराई में भी मौजूद है। जमीन के भीतर मौजूद चट्टान ‘विशुद्ध बर्फ’ जैसी दिख रही है। यह रिपोर्ट 2005 में लाल ग्रह की टोह लेने के लिए भेजे गए ऑर्बिटर से हासिल आंकड़ों पर आधारित है।
पढ़ें- 75 साल पहले पति-पत्नी निकले थे दूध लेने, एक-दूसरे से चिपकी फ्रोजन डेडबॉडी मिली
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अमेरिका के एरिजोना प्रांत के टक्सन में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना लुनार एंड प्लेनेटरी लेबोरेटरी के शोधकर्ता शेन बियर्ने ने यहां तक कहा कि ‘अंतरिक्ष यात्री अपने साथ एक बाल्टी और फावड़ा ले जाकर मंगल की सतह से जितनी बर्फ चाहें बटोरकर अपने पानी का जुगाड़ कर सकते हैं।’ ताजा जानकारी शोधकर्ताओं के लिए अहम साबित हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ 2030 में मंगल ग्रह पर अपना पहला मानव खोजी दल भेजने की तैयारी कर रही है।
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लाल ग्रह पर भूमि में कटाव के कारण आठ ऐसी जगहें दिखी हैं, जहां बर्फ है। कई जगह तो यह सतह से महज एक मीटर नीचे है लेकिन दूसरी जगहों पर 100 मीटर की गहराई में भी मौजूद है। जमीन के भीतर मौजूद चट्टान ‘विशुद्ध बर्फ’ जैसी दिख रही है। यह रिपोर्ट 2005 में लाल ग्रह की टोह लेने के लिए भेजे गए ऑर्बिटर से हासिल आंकड़ों पर आधारित है।
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कई परतों में मिली बर्फ ज्यादा पुरानी नहीं
mars
अमेरिका में एरिजोना के जियोलॉजिकल सर्वे से जुड़े भूवैज्ञानिक कॉलिन डुंडास के मुताबिक, इस तरह की बर्फ जितना पहले सोचा गया था, उससे कहीं ज्यादा दूर तक फैली है। बर्फ में अलग-अलग रंग की कई परतें हैं, जिनसे पता चलता है कि यह अलग-अलग काल खंड में जमा हुई हैं।
अक्सर देखा जाता है कि लंबे अंतराल में खगोलीय कचरा गिरते रहने से किसी ग्रह की सतह ऊबड़-खाबड़ और गड्ढों वाली हो जाती है। लेकिन मंगल की सतह पर मिली ग्लेशियर की परतों के बाद वैज्ञानिक मान रहे हैं कि बर्फ जमे ज्यादा वक्त नहीं हुआ है, क्योंकि यहां की सतह चिकनी है और उसमें गड्ढे नहीं दिख रहे हैं।
इंसानों के रहने लायक नहीं मंगल की जमीन
बर्फ की चट्टानें मंगल के ध्रुवों से काफी नजदीक हैं, जो सर्दी के दौरान गहरे अंधकार में डूब जाते हैं। इसलिए इंसानों के लिए लंबे समय तक वहां शिविर बनाकर रहना संभव नहीं होगा। हालांकि वैज्ञानिक इन ग्लेशियरों का कुछ हिस्सा अगर खोद सके तो मंगल ग्रह की जलवायु और वहां जीवन की संभावना के बारे में काफी जानकारी मिल सकेगी।
अक्सर देखा जाता है कि लंबे अंतराल में खगोलीय कचरा गिरते रहने से किसी ग्रह की सतह ऊबड़-खाबड़ और गड्ढों वाली हो जाती है। लेकिन मंगल की सतह पर मिली ग्लेशियर की परतों के बाद वैज्ञानिक मान रहे हैं कि बर्फ जमे ज्यादा वक्त नहीं हुआ है, क्योंकि यहां की सतह चिकनी है और उसमें गड्ढे नहीं दिख रहे हैं।
इंसानों के रहने लायक नहीं मंगल की जमीन
बर्फ की चट्टानें मंगल के ध्रुवों से काफी नजदीक हैं, जो सर्दी के दौरान गहरे अंधकार में डूब जाते हैं। इसलिए इंसानों के लिए लंबे समय तक वहां शिविर बनाकर रहना संभव नहीं होगा। हालांकि वैज्ञानिक इन ग्लेशियरों का कुछ हिस्सा अगर खोद सके तो मंगल ग्रह की जलवायु और वहां जीवन की संभावना के बारे में काफी जानकारी मिल सकेगी।