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गर्भवती मां पर भारी पड़ते भ्रूण के अधिकार

Sat, 02 Feb 2013 10:53 AM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sat, 02 Feb 2013 10:53 AM IST
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fetal rights heavy on pregnant mother

अमेरिका में गर्भवती महिलाओं के एक संगठन का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाइयों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

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सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका भ्रूण के अधिकारों की रक्षा के मामले में जरूरत से ज्यादा सक्रियता दिखा रहा है।

एक चीनी रेस्त्रां में काम करने वाली बेई बेई शुआई आठ महीने की गर्भवती थी जब उनका अपने बॉयफ्रेंड और बच्चे के पिता से रिश्ता खत्म हो गया। इससे दुखी हो कर शुआई ने चूहे मारने वाली दवा खा कर अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला किया।
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अदालती दस्तावेज के अनुसार शुआई ने जो सुइसाइड नोट छोड़ा उसमें उन्होंने अपने बॉयफ्रेंड से मुखातिब हो कर कहा था कि मैं इस बच्चे को भी अपने साथ ले जा रही हूं जिसे तुमने क्रिस्टल नाम दिया था।
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कानूनी पेंच
शुआई की जान बच गई लेकिन उनके सुइसाइड नोट के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में शुआई ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन चार दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद शुआई पर हत्या और भ्रूण हत्या की कोशिश के आरोप भी लगे।

अमेरिका के इंडियाना राज्य में ये इस तरह का पहला मामला है। इस अमेरिकी राज्य में हाल ही में एक कानून पारित किया गया है जिसके अनुसार कानूनी तरीके से गर्भपात के अलावा किसी भी और तरह से गर्भ को खत्म करने की मनाही है। इसके अलावा राज्य के कानून में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि जानबूझ कर भ्रूण को खत्म करना हत्या है।

शुआई के मामले को देख रहे अभियोजक टेरी करी बताते हैं कि कानून कहता है कि भ्रूण का दर्जा उसकी मां से अलग है और हम कानून को लागू कर रहे हैं। वो कहते हैं कि शुआई के नोट में साफ लिखा है कि वो भ्रूण को मारना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने नए कानून का उल्लंघन किया है।

'नागरिक अधिकार का हनन'
लेकिन सब ऐसा नहीं मानते हैं। शुआई की वकील लिंडा पेंस का कहना है कि 200 साल से कानून गर्भवती महिला के अधिकारों की रक्षा करता रहा है, उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलाता रहा है।

Bei Bei Shauiवो कहती है कि इस बात की संभावना नहीं है कि चूहे मारने की दवा से शुआई के बच्चे की मौत हुई थी, इसलिए उन पर हत्या के आरोप लगाना उनके नागरिक अधिकारों का हनन है।

इंडियाना की अदालतों ने पेंस की इस दलील को खारिज कर दिया कि शुआई को कानून के तहत बराबर सुरक्षा नहीं दी गई है। लेकिन उन्होंने ये मानने से भी इनकार कर दिया कि बच्चे की मौत चूहे मारने की दवा की वजह से हुई। इसके बाद करी ने कहा कि उन्हें हत्या के आरोप हटाने पड़ सकते हैं।

मां बनाम भ्रूण
उधर महिला संगठनों का कहना है कि कानूनी दाव पेंचों में फंसने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। द नेशनल एडवोकेट्स फॉर प्रेगनेंट वीमन (एनएपीडब्ल्यू) ने इसी महीने एक अध्ययन प्रकाशित किया है। इसमें गर्भवती महिलाओं के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और जबरन चिकित्सीय हस्तक्षेप से जुड़े 400 मामलों का जिक्र है।

एनएपीडब्ल्यू की कार्यकारी निदेशक लिन पाल्ट्रोव का कहना है कि गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर इतनी तवज्जो दी जा रही है कि उससे गर्भवती महिलाओं के अधिकार छिन रहे हैं। वो बताती हैं कि अमेरिका के 38 राज्यों में ऐसे कानून हैं जो अजन्मे बच्चे के अधिकार को गर्भवती महिला से ऊपर रखते हैं। इन कानूनों में भ्रूण की हत्या होने पर महिला के लिए कड़ी सजा और हत्या के अतिरिक्त आरोपों का प्रावधान है।


एसोसिएशन ऑफ प्रोसिक्यूटिंग अटॉर्नी के मुख्य कार्यकारी डेविड लाबान कहते हैं कि भ्रूण बनाम मां के अधिकार हमेशा एक मुद्दा रहेगा। लेकिन शुआई की वकील का कहना है कि उनकी मुव्वकिल को बदनाम किया जा रहा है।

वो कहती हैं कि ये तथ्य ही त्रासदीपूर्ण है कि वो इतनी हताश थी कि चूहे मारने की दवा खाकर अपनी जिंदगी को खत्म करना चाहती थी। शुआई के मामले में अप्रैल से मुकदमा शुरू होगा।

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