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भारत ने भी ड्रीमलाइनर को जमीन पर उतारा
बीबीसी हिंदी
Updated Thu, 17 Jan 2013 09:29 AM IST
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जापान और अमेरिका के बाद भारत ने भी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ान कुछ समय के लिए रोक दी है।
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नागरिक उड्डयन मामलों के महानिदेशक अरुण मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि कुछ समय के लिए ये फैसला किया गया है। बोइंग इस बारे में जब सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं दूर कर देगा तो उड़ानें फिर से शुरू हो सकेंगी।
भारत ने ये फैसला अमेरिका में उड्डयन क्षेत्र पर निगरानी रखने वाले फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के उस फैसले के बाद लिया जिसके तहत सभी अमेरिकी विमान कंपनियों को ड्रीमलाइनर की उड़ानें कुछ समय के लिए बंद करने के लिए कहा गया है।
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इससे पहले जापान की दो प्रमुख कंपनियां ड्रीमलाइनर की उड़ानें रोक चुकी हैं क्योंकि उन विमानों की बैटरी में गड़बड़ी आने के बाद विमान को आपात स्थिति में उतारना पड़ा था। वैसे बोइंग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 787 विमान पूरी तरह सुरक्षित है।
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अमेरिका में रोक
अमेरिका में उड़ानें रोकने का फैसला जापान में ड्रीमलाइनर के एक विमान में बैटरी में गड़बड़ी आने के बाद किया गया है। अब एफएए ने कहा है कि उड़ानों से पहले कंपनियों को ये देखना होगा कि बैटरियां सुरक्षित हैं या नहीं। अमेरिका में वैसे फिलहाल सिर्फ यूनाइटेड एयरलाइंस ही 787 ड्रीमलाइनर विमानों का इस्तेमाल कर रही है।
जापान में ऑल निप्पॉन एयरवेज की उड़ान संख्या एनएच 692 को उड़ान के तुरंत बाद ही उतारना पड़ा था। इसके बाद एयरवेज ने 17 ड्रीमलाइनरों की उड़ानें रोक दी हैं। जापान एयरलाइंस ने भी इसी तरह की कार्रवाई करते हुए अगले नोटिस तक 787 ड्रीमलाइनर की उड़ानें रद्द कर दी हैं।
जापान की घटना
एशिया में जापान के अलावा सिर्फ भारत के पास ड्रीमलाइनर विमान हैं। एयर इंडिया के पास छह ड्रीमलाइनर विमान हैं। भारतीय अधिकारियों ने कहा है कि वे बोइंग के साथ संपर्क में हैं मगर फिलहाल ड्रीमलाइनर विमानों की उड़ान रोकने का उनका कोई इरादा नहीं है।
बुधवार को जापान में हुई घटना में जब विमान पश्चिमी जापान के यामागुची उबे से उड़ा और टोकियो के हानेदा हवाई अड्डे की ओर जा रहा था तो पायलट ने अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर चेतावनी का निशान देखा।
ऑल निप्पॉन एयरवेज के अनुसार उस संदेश में बताया गया था कि बिजली के उपकरणों वाले एक हिस्से में धुआं उठ रहा है। धुआं कहां से निकला इसका पता नहीं चल सका है। पायलट को ये संदेश मिला की बैटरी में गड़बड़ी है और इसके बाद विमान को उड़ान के आधे घंटे बाद ही ताकामात्सु हवाई अड्डे पर उतारा गया। अमेरिकी शेयर बाजार में इसके बाद बोइंग के शेयरों में तीन प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
मुश्किलें
पिछले कुछ हफ्तों में ड्रीमलाइनर विमानों में ईंधन लीक करने, एक कॉकपिट की खिड़की के शीशे में दरार आ जाने, ब्रेक की समस्याएं और बिजली के कुछ उपकरणों में आग लग जाने जैसी परेशानियां सामने आई हैं।
इन परेशानियों को जहां यात्रियों के बीच और मीडिया में सुरक्षा से जुड़े बड़े मसले बताया जा रहा है तो वहीं उड्डयन क्षेत्र पर नजर रखने वाले कई लोगों के अनुसार उन्हें इससे ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ है।
मगर जैसे-जैसे इस तरह की परेशानियां बढ़ रही हैं इसे सिर्फ शुरुआती दिक्कतें बताने वालों के लिए भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
ये कहा जाना कि ये सभी परेशानियां आसानी से ठीक की जा सकने वाली गड़बड़ियां हैं, निश्चित तौर पर सवाल उठाता है कि अक्तूबर 2011 में उड़ान भरने से पहले इनके बारे में पता क्यों नहीं चला और उसे ठीक क्यों नहीं कर लिया गया?
ऑल निप्पॉन एयरवेज ही ड्रीमलाइनर के पहले खरीदार थे जिन्हें ये विमान मिलना था। उन्हें भी डिलिवरी में तीन साल की देरी हुई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बोइंग के इंजीनियरों ने उस दौरान सुरक्षा के सभी पहलुओं की जांच क्यों नहीं की।
इधर इन विमानों का इस्तेमाल करने वाली जिन एयरलाइंस को इनकी उड़ानें रद्द करनी होंगी उनके लिए चिंता ये होगी कि सुरक्षा के चलते उड़ान रद्द होने के बाद उनकी लागत पर तो कोई कमी आएगी नहीं या फिर उन्हें इसकी जांच में सहयोग की तैयारी करनी होगी और साथ ही इन सबकी मरम्मत में लगने वाला समय भी आखिरकार एयरलाइंस को ही नुक़सान पहुंचाएगा।
दुनिया भर में ड्रीमलाइनर
एयर इंडिया- 6
ऑल निप्पॉन एयरवेज (जापान)- 17
इथियोपियन एयरलाइंस- 4
जापान एयरलाइंस- 7
एलएएन एयरलाइंस (चिली)- 3
लॉट पोलिश एयरलाइंस- 2
कतर एयरवेज- 5
यूनाइटेड एयरलाइंस (अमेरिका)- 6
कुल- 49 (स्रोत- बोइंग)