पाकिस्तान के खिलाफ अपना रुख बदले अमेरिका, अन्य विकल्पों पर दे ध्यान
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विशेषज्ञों ने अमेरिकी सरकार को सलाह दी है कि कि आतंकियों के पनाहगाह देश पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका को अपना रुख बदलना चाहिए। पाकिस्तान ने भारत जैसे देशों के प्रति आतंकी हमलों को रोकने के लिए अभी तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया है।
इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस पॉलिसी सेंटर, आरएनडी कॉरपोरेशन के निदेशक सेथ जी जोन्स ने अमेरिकी संसद की विदेश मामलों की समिति के समक्ष कहा कि 'कांग्रेस' ने पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य सहायता में कमी की है। इस सहायता में अभी और भी कमी की जा सकती है। उन्होंने ये भी कहा कि विशिष्ट संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को लागू किया जा सकता है। अमेरिका अन्य देशों को भी ऐसा करन के लिए कह सकता है। अमेरिका को पाकिस्तान के साथ अपने रिश्तों के साथ विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (आईसीजी) ने अपनी 2017 की पहली वॉच लिस्ट में भी कहा है कि अमेरिका की एक ऐसा देश है जो पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है। आईसीजी हिंसक संघर्षों पर विचार करने वाला एक समूह है।
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क्षेत्र की स्थिरता के लिए पाकिस्तान की केंद्रीय भूमिका
समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान के पड़ोसी आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस्लामाबाद हमेशा से तालिबान और काबुल के बीच बातचीत के लिए अनिच्छुक रहा है। यही वजह है कि वो अफगानी आतंकवाद को समर्थन देता रहा है।
यही नहीं पाकिस्तान इन आतंकियों क अपने यहां महफूज किए हुए है और उन्हें फंड जुटाने, आतंकियों को भर्ती करने की भी पूरी छूट दे रहा है। ऐसे में अमेरिका की ये अहम जिम्मेदारी है कि वो पाक पर दबाव बनाए और इस तरह के आतंकवाद के समर्थन का खात्मा कराए। अमेरिका ही है जो क्षेत्र में स्थिरता ला सकता है।
अमेरिका इस्लामाबाद के समर्थन के बिना पाकिस्तान के भीतर तालिबान के ठिकानों पर दबाव डालने के लिए और कदम उठा सकता है। अगर पाकिस्तान आतंकी संगठनों के साथ रिश्तों में कमी लाता है तो उसके साथ बेहतर रिश्ते बनाने के बारे में विचार किया जा सकता है। पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए पाकिस्तान की केंद्रीय भूमिका है। ऐसे में पाकिस्तान के संबंधों में विकल्पों पर विचार करना अमेरिका के हित में है। अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता ला सकता है।